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पीतल हस्तशिल्प के लिए विश्व में प्रसिद्ध है मुरादाबाद, धार्मिक स्थलों की प्रसिद्धि के चलते आते हैं पर्यटक

मुरादाबाद भारत के उत्तर प्रदेश राज्य के मुरादाबाद ज़िले में स्थित एक नगर है। यह ज़िले का मुख्यालय भी है।

Posts by : Geeta | Updated on: Wed, 02 Aug 2023 8:57:10

पीतल हस्तशिल्प के लिए विश्व में प्रसिद्ध है मुरादाबाद, धार्मिक स्थलों की प्रसिद्धि के चलते आते हैं पर्यटक

मुरादाबाद भारत के उत्तर प्रदेश राज्य के मुरादाबाद ज़िले में स्थित एक नगर है। यह ज़िले का मुख्यालय भी है। उत्तर प्रदेश का मुरादाबाद जिला रामगंगा नदी के किनारे पर स्थित है यहां की जलवायु सम व विषम है तथा मुरादाबाद जिले में एक नगर पंचायत कांठ भी तथा तहसील व कांठ थाना उत्तर प्रदेश में नंबर 1 की श्रेणी में प्रथम स्थान प्राप्त है।

मुरादाबाद पीतल हस्तशिल्प के निर्यात के लिए प्रसिद्ध है। रामगंगा नदी के तट पर स्थित मुरादाबाद पीतल पर की गई हस्तशिल्प के लिए पूरे विश्व में प्रसिद्ध है। इसका निर्यात केवल भारत में ही नहीं अपितु अमेरिका, ब्रिटेन, कनाडा, जर्मनी और मध्य पूर्व एशिया आदि देशों में भी किया जाता है। अमरोहा, गजरौला और तिगरी आदि यहाँ के प्रमुख पयर्टन स्थलों में से हैं। रामगंगा और गंगा यहाँ की दो प्रमुख नदियाँ हैं। मुरादाबाद विशेष रूप से प्राचीन समय की हस्तकला, पीतल के उत्पादों पर की रचनात्मकता और हॉर्न हैंडीक्राफ्ट के लिए सबसे अधिक प्रसिद्ध है। यह जिला बिजनौर जिला के उत्तर, बदायूँ जिला के दक्षिण, रामपुर जिला के पूर्व और ज्योतिबा फुले नगर जिला के पश्चिम से घिरा हुआ है।

पूर्व में यह शहर चौपला नाम से जाना जाता था जो हिमालय के तराई और कुमाऊं क्षेत्रों में व्यवसाय और दैनिक जीवनोपयोगी वस्तुओं की प्राप्ति का प्रमुख स्थान रहा है बाद में इसका वर्तमान नाम यह सन् 1600+ में मुग़ल सम्राट शाहजहाँ के बेटे मुराद के नाम पर रखा गया; जिसके कारण इस शहर का नाम मुरादाबाद पड़ गया। 1624 ई. में सम्भल के गर्वनर रुस्तम खान ने मुरादाबाद शहर पर कब्जा कर लिया था और इस जगह पर एक किले का निर्माण करवाया था। उनके नाम पर इस जगह का नाम रुस्तम खान रखा गया। इसके पश्चात् मुरादाबाद शहर की स्थापना मुगल शासक शाहजहाँ के पुत्र मुराद बख्श ने की थी। अत: उसके नाम पर इस जगह का नाम मुरादाबाद रख दिया गया।

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विदुर कुटी

विदुर महाभारत काल से ही महानतम पुरुषों में गिने जातें हैं। कहा जाता है की, जब महाभारत का युद्ध आरम्भ होने वाला था तो पांडवों और कौरवों ने विदुर से अनुरोध किया की वे उनके छोटे बच्चों और महिलाओं की देखभाल करें। विदुर सबकी सुरक्षा नहीं कर सकते थे इसलिए उन्होंने विदुर कुटीर के नाम से एक आश्रम बनाया। दुर्योधन से मतभेद के बाद से उन्होंने यह फैसला किया की वे अपना सारा जीवन इस कुटिया में बिताएगे। हालांकि उस दौरान भगवान श्री कृष्ण जी ने भी विदुर कुटी की खास बनावट पर विदुर की काफी प्रशंसा की थी। आज वही विदुर कुटीर उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद जिले में स्थित है। जिसे अब दारानगर के नाम से भी जाना जाता है। भारी तादाद में पर्यटक इस विदुर कुटी के दर्शन करने आते हैं।

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बड़े हनुमान जी मंदिर

वैसे देखा जाए तो भारत में हनुमानजी के कई बहुत सारे भव्य मंदिर मौजूद हैं लेकिन मुरादाबाद के चदौंसी के छोटे शहर हनुमानघरी में स्थित बड़े हनुमानजी के मंदिर की अपनी एक अलग ही विशेषता है। यह मंदिर सबसे प्राचीन और प्रसिद्ध मंदिरों में से एक है। यहाँ भगवान हनुमान की मूर्ति स्थापित है। ऐसा अनुमान लगाया जाता है कि यह मंदिर लगभग 400 साल पहले बनाया गया था और मंदिर ठीक सीता आश्रम के मैदान के पास ही मौजूद है। और यह मंदिर एक पहाड़ी के ऊपर विद्यमान है। इस मंदिर की एक खास बात यह है कि इस मंदिर के ठीक नीचे प्राचीन समय की एक गुफा है जो कि एक स्थान से दूसरे स्थान पहुंचने के लिए बनी हुई थी। पुराणों के अनुसार इस पवित्र गुफा में हनुमान जी अवतरित हुए थे। मंदिर में भगवान राम की मूर्ति के साथी उनके परिवार की भी मूर्तियाँ है और श्री कृष्णा और भगवान शिव के परिवार की मूर्तियाँ भी है। मंदिर की पवित्रता से रू-ब-रू और दर्शन करने के लिए पर्यटक यहां दूर-दूर से दर्शन करने के लिए आते हैं।

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प्रकटेश्वर शिव धाम मुरादाबाद

प्रकटेश्वर शिव धाम मुरादाबाद का एक प्रसिद्ध शिव मंदिर है। यह मंदिर शिव भगवान जी को समर्पित है और यह मंदिर बहुत सुंदर है। यह मंदिर मुरादाबाद में काठ तहसील में लाडलाबाद में स्थित है। यहां पर आकर शांति मिलती है। इस मंदिर की स्थापना 2006 में की गई थी। इस मंदिर के बारे में कहा जाता है कि, मंदिर में आकर मनोकामना मांगने से मनोकामना पूरी होती है। प्रकटेश्वर शिव धाम पर आपको और बहुत सारे देवी देवताओं के दर्शन करने के लिए मिलते हैं। यहां पर आपको हनुमान जी, शिव भगवान जी, माता सीता जी, गणेश जी, नंदी महाराज जी के दर्शन करने के लिए मिलते हैं। यहां पर विष्णु भगवान जी की भी बहुत सुंदर प्रतिमा देखने के लिए मिलती है। आप यहां पर घूमने के लिए आ सकते हैं। यहां पर सावन सोमवार में बहुत सारे लोग आते हैं।

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अमरोहा

अमरोहा मुरादाबाद से तीस किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। कहा जाता है कि इस शहर का निर्माण लगभग 3,000 पूर्व हआ था। इसकी स्थापना हस्तिनापुर के राजा अमरजोध ने की थी। बाद में दिल्ली के राजा पृथ्वी राजा की बहन अम्बा देवी द्वारा अमरोहा का पुनर्निर्माण करवाया गया। इसके बाद जब तक यहां मुगलों का प्रवेश नहीं हो गया इस जगह पर त्यागियों ने शासन किया। आम और मछली यहां बाहुल्य मात्रा में उपलब्ध है। इसके अतिरिक्त, ऐसा भी कहा जाता है कि जब शराफुद्दीन इस जगह पर आया था तब स्थानीय लोगों ने उन्हें आम और मछली पेश की थी। इसके बाद ही से इस जगह को अमरोहा के नाम से जाना जाने लगा। अमरोहा स्थित प्रमुख स्थलों में वसुदेव मंदिर, तुलसी पार्क, बायें का कुंआ, नसरूद्दीन साहिब की मजार, दरगाह भूर शाह और मजार शाह विजयत साहिब आदि स्थित है।

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गजरौला

गजरौला राष्ट्रीय राजमार्ग नम्बर 24 पर स्थित है। यह स्थान मुरादाबाद से 53 किलोमीटर और दिल्ली से लगभग 100 किलोमीटर की दूरी पर है। यह शहर महत्वपूर्ण औद्योगिक शहर के रूप में विकसित हो रहा है। कई कुटीर व लघु उद्योग जैसे हिन्दुस्तान लीवर का शिवालिक सेलोलॉस, चड्ढ़ा रबर, वाम ओरगेनिक आदि यहाँ पर स्थित है।

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तिगरी

गंगा नदी पर स्थित तिगरी मुरादाबाद से लगभग 62 किलोमीटर की दूरी पर है। प्रत्येक वर्ष कार्तिक पूर्णिमा के अवसर पर प्रसिद्ध गंगा मेले का आयोजन किया जाता है। लाखों की संख्या में भक्त इस पवित्र जल में स्नान करने के लिए आते हैं।

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मर्चुला

मुरादाबाद से 116 किमी की दूरी पर मर्चुला एक बेहद ही खूबसूरत और हसीन जगह है। पहाड़ों के बीच में मौजूद यह हिल स्टेशन पार्टनर, दोस्त और परिवार के साथ घूमने के लिए बेस्ट है। मानसून के समय यहां पहाड़ बादलों से ढक जाते हैं। मर्चुला में मगरमच्छ व्यू पॉइंट, बारसी गांव और रामनगर नदी जैसी बेहतरीन जगहों को एक्सप्लोर कर सकते हैं। यहां दोस्तों के साथ ट्रैकिंग और फोटोग्राफी का भी लुत्फ उठा सकते हैं।

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अल्मोड़ा

मुरादाबाद से 181 किमी दूरी पर स्थित उत्तराखंड की हसीन वादियों में मौजूद अल्मोड़ा भी किसी जन्नत से कम नहीं है। ऊंचे-ऊंचे पहाड़, घने जंगल और बड़े-बड़े देवदार के पेड़ों के बीच में मौजूद यह शहर काफी प्रसिद्ध है। सर्दी और मानसून के समय अल्मोड़ा की खूबसूरती चरम पर होती है। इसलिए इन दोनों ही मौसम में काफी लोग घूमने के लिए पहुंचते हैं। अल्मोड़ा में आप जीरो पॉइंट, जागेश्वर टेम्पल, सूर्य मंदिर और बिनसर जैसी बेहतरीन जगहों को एक्सप्लोर कर सकते हैं। आपको बता दें कि अल्मोड़ा में बहने वाली दो प्रमुख नदियां कोशी और सुयाल भी चार चांद लगाने का काम करती हैं।

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साईं मंदिर

मंदिर सभी धर्मों के अनुयायियों का स्वागत करता है। मंदिर का मुख्य देवता साईं बाबा है। यह मंदिर साईं भक्तों के बीच बहुत लोकप्रिय है। मंदिर का वास्तुकला बहुत अच्छा है। यह बहुत आकर्षक लग रहा है। मंदिर का वातावरण बहुत शांतिपूर्ण है।

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गौतम बुद्ध पार्क

गौतम बुद्ध पार्क मुरादाबाद, में हर्थला स्टेशन रोड पर स्थित है। यह माना जाता है कि गौतम बुद्ध ने अपने जीवन का अधिकाश: समय उत्तरप्रदेश में बिताया था। यह पार्क मुरादाबाद आने वाले पर्यटकों के अलावा स्थानीय निवासियों के लिए भी पसंदीदा स्थल है।

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डीयर पार्क

इस पार्क में आपको ऐसे बहुत से जानवरों को देखने का मौका मिलेगा जो आपने कभी देखे ना हों। डीयर पार्क, प्रेम वंडरलैंड के पास ही स्थित हिरण पार्क, और इको-पार्क हैं जो कि एक मनोरंजक स्थल है। इस पार्क में आपको मगरमच्छ, बतख और हिरण के साथ साथ और भी कई जानवरों की प्रजातियां देखने को मिलेंगी, और साथ ही यह पार्क उनके संरक्षण के लिए भी काम करता है। यहां आप पार्क में एक जॉगिंग ट्रैक का भी मज़ा ले सकते है, जो कि 13 किमी तक फैला हुआ है। इस पार्क में आपको हमेशा पर्यटकों की आवाजाही देखने को मिल जाएगी। मुरादाबाद से डीयर पार्क 170 दूरी मात्र है।

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मंडावर का महल

कहा जाता है कि इंग्लैंड की महारानी विक्टोरिया उर्दू भाषा की शौकीन हुआ करती थीं। उसने भारत से एक शिक्षक मजहर अली को उर्दू और फारसी भाषा सिखाने के लिए इंग्लैंड में अपने महल में बुलाया। उस शिक्षक की सेवाओं से प्रसन्न होकर, इंग्लैंड की महारानी ने 1850 में मंडावर में उस शिक्षक लिए एक शानदार खूबसूरत महल बनवाया, जिसे आज मंडावर का महल के नाम से जाना जाता है। मंडावर के महल में आने वाले पर्यटकों की भारी संख्या इसी बात का प्रमाण है। कि इस महल का आकर्षक कितना ज्यादा होगा। इस महल में आप बिना किसी शुल्क के घूम सकते हैं और तो और इस महल को आप कभी भी आकर घूम सकते हैं। यह महल 24 घण्टे खुला रहता है।

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नजीबुदौला का किला

नजीबुदौला का किला उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद में नजबबाद पर स्थित है। इस किले के पीछे की कहानी भी बेहद खूबसूरत है। नजिबुदौला का यह किला मुगल साम्राज्य के पतन के बाद 18 वीं शताब्दी में गुलाम कादिर उर्फ नजिबुदौला द्वारा बनाया गया था। गुलाम कादिर एक कुख्यात डकैत हुआ करता था जिसे सुल्ताना डाकू के नाम से भी जाना जाता था। यहाँ डकैत ब्रिटिश पुलिस द्वारा गिरफ्तारी से बचने के लिए किले में छुपा रहते थे। आज भी किला उसी तरह खड़ा है। जैसे कि पहले बना हुआ था। आज बही किला पर्यटकों का मुख्य आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। इस किले में 12 महीने पर्यटक देखे जा सकते हैं। मुरादाबाद से यह किला 105 किलोमीटर की मात्र दूरी पर है।

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प्रेम वंडरलैंड और प्रेम वाटर किंगडम

प्रेम वंडरलैंड और प्रेम वाटर किंगडम मुरादाबाद के रामपुर पर रेलवे क्रॉसिंग के पास स्थित है। प्रेम वंडरलैंड और प्रेम वाटर किंगडम एक बहुत बड़े क्षेत्र में बना मनोरंजन परिसर है। यहां पर आकर बुढ़े हों या बच्चे सभी मस्ती करने के लिए बाध्य हो ही जातें हैं। यह वाटर स्पोर्ट्स सभी आयु वर्ग के लोगों विशेष रूप से शहर और आसपास के क्षेत्रों के बच्चों के लिए वाटर स्पोर्ट्स और अन्य मनोरंजक वाटर पार्क है। यहाँ आकर हर कोई अपनी परेशानीयों को बुलाना चाहेगा।

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पातालेश्वर मंदिर

सुनने मात्र से ही पातालेश्वर मंदिर अपने नाम से ही आकर्षक लगता है। मुरादाबाद-आगरा राजमार्ग पर बहजोई से लगभग 6 किमी दूर सादातबाड़ी नामक एक छोटे से गाँव में स्थित है। यह मंदिर भगवान शिव को समर्पित है। हर साल शिवरात्रि के दिन, सावन के सोमवार को यहां भक्तों की भीड़ देख कर ही आप इस मंदिर की ख्याति और महानता को समझ सकते हैं। पातालेश्वर मंदिर में शिवलिंग के दर्शन एवं जलाभिषेक करने को श्रद्धालु कई प्रांतों से सादात बाड़ी पहुंचते हैं। सावन व फाल्गुन मास की शिवतेरस को मंदिर परिसर के निकट मेला लगता है, जिसमें विभिन्न प्रांतों के श्रद्धालु यहां आते हैं।

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