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बारिश में क्यों बढ़ जाता है फूड प्वाइजनिंग का खतरा? जानें कारण और बचाव

बारिश में फूड पॉइजनिंग आपको कई बार हो सकती है। दरअसल, इस मौसम में हमारा हाजमा तो कमजोर होता ही है, साथ ही पेट से जुड़ी समस्याएं भी आपको परेशान कर सकती हैं।

Posts by : Priyanka | Updated on: Sat, 20 Jul 2024 11:42:42

बारिश में क्यों बढ़ जाता है फूड प्वाइजनिंग का खतरा? जानें कारण और बचाव

बारिश में फूड पॉइजनिंग आपको कई बार हो सकती है। दरअसल, इस मौसम में हमारा हाजमा तो कमजोर होता ही है, साथ ही पेट से जुड़ी समस्याएं भी आपको परेशान कर सकती हैं। लेकिन, ये ऐसी स्थिति है जिसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। इस मौसम में कई ऐसे कारण हैं जो कि फूड पॉइजनिंग की वजह बन सकते हैं और आपको गंभीर रूप से बीमार कर सकते हैं। तो, आइए जानते हैं इन कारणों के बारे में विस्तार से।

खाद्य विषाक्तता यानी फूड प्वॉइजनिंग एक आम समस्या है, जो दूषित भोजन या पेय पदार्थों के सेवन से होती है। यह हानिकारक बैक्टीरिया, वायरस या पैरासाइट के कारण हो सकती है।ज्यादातर मामलों में फूड प्वॉइजनिंग का कारण स्टेफायलोकोकस या ई। कोलाई बैक्टीरिया का संक्रमण होता है, जो ब्लड, किडनी और नर्वस सिस्टम को प्रभावित कर सकता है। देश के ज्यादातर हिस्सों में मानसून की शुरुआत हो चुकी है। ये मौसम भीषण गर्मी से राहत दिलाने वाला माना जाता है, पर मानसून अपने साथ कई प्रकार की बीमारियों को लेकर भी आता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, मानसून के दौरान सेहत के लेकर विशेष सावधानी बरतनी जरूरी है। क्या खाएं-क्या नहीं इस बात को लेकर अलर्ट रहने की जरूरत है। खान-पान में बरती गई असावधानी फूड पॉइजनिंग जैसी पाचन से संबंधित दिक्कतों का कारण बन सकती है।स्वास्थ्य विशेषज्ञ बताते हैं, मानसून के दिनों में डायरिया, कब्ज और अपच जैसी पाचन स्वास्थ्य से संबंधित जटिलताओं का खतरा बढ़ जाता है। फूड पॉइजनिंग से बचाव को लेकर उपाय करते रहना जरूरी है।आइए जानते हैं, मानसून में पाचन संबंधित समस्याएं क्यों बढ़ जाती हैं और इसस बचाव के लिए आहार संबंधित किन बातों पर ध्यान देना जरूरी है।

बारिश में क्यों बढ़ जाता है फूड प्वाइजनिंग का खतरा? जानें कारण और बचाव

क्यों संक्रमित होता है फूड

जब किसी फूड को बाहर छोड़ दिया जाए। जैसे कच्ची सब्जी या कोई भी फूड तो इसमें ये बैक्टीरिया पनपने लगते हैं। अगर इसी फूड को अच्छी तरह से पकाया न जाए तो यह फूड प्वाइजनिंग का कारण बन जाता है। आमतौर पर अगर सब्जियों या किसी भी चीज को सही से पकाया जाए तो बैक्टीरिया मर जाता है। इससे फूड प्वाइजनिंग नहीं होती है।

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बासी खाने की वजह से

फूड पॉइजनिंग, बासी खाने की वजह से हो सकती है। दरअसल, इस मौसम में सुबह या रात का रखा खाना भी आपको गंभीर रूप से बीमार कर सकता है। उमस की वजह से इस समय कोई भी खाना जल्दी खराब हो जाता है या आम भाषा में कहें खट्टा हो जाता है। असल में ये फर्मेंटेशन का प्रोसेस है जो कि फूड पॉइजनिंग का कारण बनता है।

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बाहर का खाना

बारिश में बाहर का खाना आपके लिए जहर हो सकता है। ये आपको कभी भी बीमार कर सकता है। चाहे पानी पुरी का पानी हो या कोई आलू की सब्जी। बारिश में फूड पॉइजनिंग की समस्या आपको कभी भी हो सकती है। इसके अलावा चाइनीस फूड का सेवन भी फूड प्वाइजनिंग का कारण बन सकता है।

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दूषित पानी

दूषित पानी, बारिश में आसानी से फूड पॉइजनिंग का कारण बन सकता है। चाहे ये पानी आपके घर का हो या फिर ये सप्लाई से आए, ये आपको गंभीर रूप से बीमार करता है। क्योंकि इस मौसम में फंगल और बैक्टीरियल इंफेक्शन का खतरा ज्यादा होता है जिसकी वजह से आप इस समस्या के शिकार हो सकते हैं।

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खराब सब्जियों और फलों के कारण

खराब सब्जियों और फलों के कारण आपको फूड पॉइजनिंग की समस्या हो सकती है। दरअसल, इस मौसम में कच्चे फलों और सब्जियों का ज्यादा सेवन, आपके पेट में इंफेक्शन पैदा करता है। इससे आपक गंभीर रूप से बीमार हो सकते हैं। जैसे कि बुखार, सिर दर्द, दस्त और कमजोरी।

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मानसून में क्या खाना चाहिए?

मानसून के दौरान कुछ चीजों को आहार में शामिल करना लाभकारी हो सकता है। आहार में प्रोबायोटिक्स शामिल करें: दही, छाछ जैसी चीजों का सेवन करना फायदेमंद माना जाता है। प्रोबायोटिक्स वाली चीजें गुड बैक्टीरिया को बढ़ावा देती हैं जिससे हमारा पाचन तंत्र ठीक रहता है। हाइड्रेशन जरूरी: पर्याप्त मात्रा में पानी पीने से शरीर से विषाक्त पदार्थ बाहर निकलते हैं और पाचन तंत्र स्वस्थ रहता है। पाचन संबंधित समस्याओं और विषाक्तता से बचे रहने के लिए उबाल कर ठंडा करके पानी पिएं।

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क्या नहीं खाना चाहिए

मानसून के दौरान होने वाली समस्याओं से बचे रहने के लिए कच्ची सब्जियां खाने से बचें। कच्ची सब्जियों के बजाय उबली हुई या अच्छे से पकाकर ही सब्जियां खाएं। पत्तेदार साग खाने से भी इस मौसम में बचा जाना चाहिए। पत्तियों के बीच नमी के कारण इनमें विषाणुओं के पनपने का खतरा रहता है। साग खाने से बचना चाहिए।

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