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इन प्राचीन विश्वविद्यालयों के कारण बना था भारत विश्वगुरु, हजारों छात्र पढ़ते थे एकसाथ

भारत समय के साथ विकसित देशों को टक्कर दे रहा हैं और हर क्षेत्र में अग्रणी हैं। बात करें शिक्षा की तो देश में इस समय कई विश्वविद्यालय हैं जो अपनी उच्च शिक्षा के लिए जाने जाते हैं। इसी के साथ ही देखने को मिलता हैं कि आजकल छात्र शिक्षा के लिए विदेश जाते हैं।

Posts by : Ankur Mundra | Updated on: Sun, 05 Mar 2023 11:53:33

इन प्राचीन विश्वविद्यालयों के कारण बना था भारत विश्वगुरु, हजारों छात्र पढ़ते थे एकसाथ

भारत समय के साथ विकसित देशों को टक्कर दे रहा हैं और हर क्षेत्र में अग्रणी हैं। बात करें शिक्षा की तो देश में इस समय कई विश्वविद्यालय हैं जो अपनी उच्च शिक्षा के लिए जाने जाते हैं। इसी के साथ ही देखने को मिलता हैं कि आजकल छात्र शिक्षा के लिए विदेश जाते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि पहले एक समय ऐसा था कि विदेश से लोग पढ़ने के लिए भारत आया करते थे। आपको यकीन नहीं हो रहा होगा, लेकिन यह सच हैं। भारत में चौथी शताब्दी से लेकर छठी शताब्दी तक ऐसे कई विश्वविद्यालय बने जो आज भी भारत के इतिहास में दर्ज हैं और यहां मिलने वाली शिक्षा के चलते ही भारत विश्वगुरु भी कहलाया। विभिन्न देशो के छात्रों ने इन प्राचीन विश्वविद्यालयों में शिक्षा प्राप्त करने का गौरव हासिल किया है। आइये जानते हैं भारत के इन प्रमुख प्राचीन विश्वविद्यालयों के बारे में...

इन प्राचीन विश्वविद्यालयों के कारण बना था भारत विश्वगुरु, हजारों छात्र पढ़ते थे एकसाथ

तक्षशिला विश्वविद्यालय

भारत में सबसे पहले और सबसे प्राचीन जिस विश्वविद्यालय का नाम लिया जाता है, वो था तक्षशिला। इतिहास में यह कहा जाता है कि इस विश्वविद्यालय का निर्माण लगभग 27000 वर्ष पहले किया गया था। आपकी जानकारी के लिए यह बता दें कि आज यह विश्वविद्यालय पाकिस्तान में है लेकिन, भारत के बटवारे से पहले यह भारत के सबसे पुराने विश्वविद्यालयों में से एक था। इस विश्वविद्यालय में विश्व के अलग-अलग कोने से स्टूडेंट पढ़ने आते थे। यहां आयुर्वेद, नितिशास्त्र जैसे कई विषय पढ़ाए जाते थे। यह भी कहा जाता है कि यहां कई देशों के राजकुमार भी विश्वविद्यालय में पढ़ने आते पढ़ते थे।

इन प्राचीन विश्वविद्यालयों के कारण बना था भारत विश्वगुरु, हजारों छात्र पढ़ते थे एकसाथ

नालंदा विश्वविद्यालय

भारत के बिहार राज्य में स्थित नालंदा को तक्षशिला के बाद सबसे प्राचीन और सबसे बड़े विश्वविद्यालय के तौर पर जाना जाता है। इस विश्वविद्यालय का निर्माण 450-470 ई। के दौरान उस समय के गुप्त वंश के शासक कुमारगुप्त ने किया था। इस विश्वविद्यालय में उस समय केवल भारत के ही नहीं बल्कि, चीन, जापान, तिब्बत, कोरिया, इंडोनेशिया और तुर्की जैसे कई बड़े देशों से छात्र-छात्राएं पढ़ने के लिए आते थे। इस विश्वविद्यालय के बारे में ऐसा भी कहा जाता है कि उस समय इस विश्वविद्यालय में कम से कम 300 से अधिक क्लास रूम थे, जहां पर करीब 10 हजार छात्र एक साथ पढ़ते थे। यहां के टीचर्स व छात्रों के लिए 9 मंजिल की एक बहुत बड़ी लाइब्रेरी भी थी। यहां पर दाखिला लेना बहुत मुश्किल माना जाता था, दाखिले के लिए छात्रों को प्रवेश परीक्षा पास करना जरूरी था।

इन प्राचीन विश्वविद्यालयों के कारण बना था भारत विश्वगुरु, हजारों छात्र पढ़ते थे एकसाथ

वल्लभी विश्वविद्यालय

वल्लभी विश्वविद्यालय सौराष्ट्र (गुजरात) में स्थित था। प्राचीन काल में वल्लभी विश्वविद्यालय ज्ञान का महत्त्वपूर्ण केन्द्र हुआ करता था और उस दौर यहां कई मठ भी हुआ करते थे। 7वीं सदी के मध्य में यहां चीनी यात्री ह्वेन त्सांग और अन्त में आईचिन आए थे, जिन्होंने इसकी तुलना बिहार के प्राचीन नालन्दा विश्वविद्यालय से की थी। इस विश्वविद्यालय के बारे में ऐसा भी कहां जाता है कि यह बौद्ध धर्म के शिक्षा का प्रमुख केंद्र था। इस विश्वविद्यालय के बारे में यह भी कहा जाता है कि उस समय इसकी इमारत बेहतरीन कला का उदहारण थी, जो धीरे-धीरे नष्ट होती चली गई। यहां आज भी सैलानी घूमने के लिए आते हैं।

इन प्राचीन विश्वविद्यालयों के कारण बना था भारत विश्वगुरु, हजारों छात्र पढ़ते थे एकसाथ

विक्रमशिला विश्वविद्यालय

पाल वंश के राजा धर्म पाल के शासनकाल में निर्मित विक्रमशिला विश्वविद्यालय नालंदा विश्वविद्यालय के बाद दूसरा सबसे प्रमुख शिक्षण केंद्र था। जो वर्तमान में बिहार के भागलपुर शहर में स्थित है। विक्रमशिला विश्वविद्यालय प्राचीन भारत के सबसे बड़े बौद्ध विश्वविद्यालयों में से एक था और भारतीय उपमहाद्वीप में बौद्ध धर्म का एक प्रमुख केंद्र भी था। और यह विश्वविद्यालय बौद्ध, शास्त्र और वेदों की पढाई के लिए जाना जाता था। इतिहासकारों की माने तो विक्रमशिला विश्वविद्यालय ने 8वी शताब्दी से 12वी शताब्दी के अंत तक भारत के प्रमुख शिक्षा केंद्र के रूप में कार्य किया था।

इन प्राचीन विश्वविद्यालयों के कारण बना था भारत विश्वगुरु, हजारों छात्र पढ़ते थे एकसाथ

पुष्पगिरी विश्वविद्यालय

पुष्पगिरी विश्वविद्यालय भारत के उड़ीसा राज्य में है। इसका निर्माण लगभग तीसरी शताब्दी के आस-पास किया गया था। अगले 800 साल तक यानी 11वीं शताब्दी तक ये विश्वविद्यालय शिक्षा के लिए विश्व विख्यात रहा। उस समय यह विश्वविद्यालय उड़ीसा की पहाड़ियों के बीचों-बीच बनवाया गया था। इसके निर्माण के बारे में कहा जाता हैं कि इसे सम्राट अशोक ने बनवाया था। इस विश्वविद्यालय के बारे में ये भी कहा जाता है कि लगभग 700 से 800 सालों तक भारत में शिक्षा का यह प्रमुख केंद्र था।

इन प्राचीन विश्वविद्यालयों के कारण बना था भारत विश्वगुरु, हजारों छात्र पढ़ते थे एकसाथ

रत्नागिरी विश्वविद्यालय

रत्नागिरी विश्वविद्यालय ललितगिरि और उदयगिरि क्षेत्र में स्थित अन्य बौद्ध स्थलों के साथ बौद्ध पर्यटन स्थलों का एक अहम् हिस्सा है। यह तीर्थयात्रा के लिए एक महत्वपूर्ण स्थल था और ओडिशा में बंगाल और पूर्वोत्तर भारत में बौद्ध धर्म का प्रमुख गढ़ है। उदयगिरि और ललितगिरि ओडिशा राज्य में दो बड़े बौद्ध परिसर हैं। जो पुस्पगिरी विश्वविद्यालय का एक हिस्सा है, जिसे ओडिशा के डायमंड त्रिभुज के रूप में जाना जाता है। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण द्वारा किए गए उत्खनन से पता चलता है कि यह एक बड़ा बौद्ध परिसर था। जिसमें बुद्ध, पत्थर के कुएँ और कई टेराकोटा मंदिरों की मूर्तियाँ थीं।

इन प्राचीन विश्वविद्यालयों के कारण बना था भारत विश्वगुरु, हजारों छात्र पढ़ते थे एकसाथ

ओदंतपुर विश्वविद्यालय

ओदंतपुर प्राचीन काल में प्रमुख ऐतिहासिक स्थल हुआ करता था। ओदंतपुर विश्वविद्यालय भी नालंदा और विक्रमशिला विश्वविद्यालय की तरह विख्यात हुआ करता था। लेकिन ओदंतपुर विश्वविद्यालय आज भी धरती के गर्भ में दबा है, जिसके कारण बहुत ही कम लोग इस विश्वविद्यालय के इतिहास से परिचित हैं।

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