संजीवनी वटी है प्रमुख रोग प्रतिरक्षा आयुर्वेदिक औषधि, इन बीमारियों में रहती है बड़ी असरदायक

By: Nupur Sun, 13 June 2021 7:51 PM

संजीवनी वटी है प्रमुख रोग प्रतिरक्षा आयुर्वेदिक औषधि, इन बीमारियों में रहती है बड़ी असरदायक

संजीवनी वटी एक प्रमुख विषरोधी (Anti toxic) आयुर्वेदिक औषधि है। संजीवनी वटी सांप के काटने पर विष को खत्म करने के लिए प्रयोग में लाई जाती है। इसके अलावा संजीवनी वटी कीटाणुओं को नष्ट करने के साथ बुखार को भी ठीक करती है। यह अपच से पैदा हुए दोष को ख़त्म करती है। वत्सनाभ (बच्छनाग) की प्रधानता होने के कारण यह कुछ गरम और पसीना तथा पेशाब को बढ़ाने का काम करती है। इन्हीं गुणों के कारण यह वटी बुखार की अवस्था में पसीने के रास्ते और पेशाब के रास्ते बुखार को बाहर निकाले में मदद करती है। यह पतंजलि की एक प्रमुख रोग प्रतिरक्षा औषधि है।

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मूत्र रोग में संजीवनी वटी का इस्तेमाल लाभदायक

अनेक लोग मूत्र रोग से परेशान रहते हैं। इसमें संजीवनी वटी का उपयोग करना चाहिए। मूत्र रोग जैसे पेशाब कम आने की समस्या में संजीवन वटी फायदेमंद होती है। यह पेशाब को साफ करने का काम भी करती है।


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बुखार उतारने में संजीवनी वटी का उपयोग फायदेमंद

संजीवन वटी का इस्तेमाल बुखार को ठीक करने के लिए भी किया जाता है। मौसमी बुखार या पेट की गड़बड़ी के कारण आने वाले बुखार को ठीक करने में संजीवनटी वटी मदद करती है। लगातार हल्का बुखार या मोतीझरा रोग में इसकी एक–एक गोली लौंग के जल के साथ लें। इसके अलावा आप सोंठ, अजवायन तथा सेन्धा नमक तीन–तीन ग्राम लेकर जल के साथ पीस लें। इसे दोबारा जल में मिलाकर थोड़ा-सा गरम कर लें। इसके साथ लें। इससे विकार नष्ट होते हैं और बुखार ठीक समय पर उतर जाता है।


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पाचनतंत्र विकार या अपच की समस्या में संजीवनी वटी का सेवन

अत्यधिक खाने से या बिना भूख के भोजन करने से या दूषित पदार्थ को खाने से पाचन–क्रिया में खराबी होने पर अपच हो जाती है, जिसके कारण पेट में दर्द, पेट में भारीपन, पतला व अनपचा दस्त, कम मात्रा में मूत्र आना तथा वमन (उल्टी) होना आदि हो जाते हैं। ऐसी स्थिति होने पर दो–दो वटी (गोली) एक–एक घण्टे के बाद देनी चाहिए। इससे अधिक भयंकर अवस्था होने पर चार–चार गोली आधा–आधा घण्टे के बाद देने से लाभ होता है।


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पेट के रोगों में करें संजीवनी वटी का सेवन

पाचन कमजोर होने पर पेट में आम यानी अनपचा भोजन जमा हो जाता है, इससे बुखार भी हो जाता है। ऐसे में पेट में भारीपन के साथ-साथ थोड़ा–थोड़ा दस्त होने लगता है। इसके साथ ही बुखार बढ़ना, पसीना न आना, बेचैनी, सिर और पेट में दर्द भी आदि होने लगते हैं। इस अवस्था में संजीवनी वटी का प्रयोग बहुत लाभकारक होता है। इसके साथ–साथ यह पाचक रसों को उत्पन्न कर अपच को ठीक करती है। संजीवनी वटी पसीना की कमी को दूर करती है। सांप के विष, कीटाणु एवं बुखार को नष्ट करती है। यह आमदोष को भी ठीक करती है और आमदोष से होने वाले बुखार, हैजा, आदि रोगों को भी नष्ट करती है। यह पसीना एवं मूत्र द्वारा अन्दर के मलदोष भी बाहर कर देती है।

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