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  • दुर्गा माता के प्रसिद्द 5 मंदिर, रखते है अपना पौराणिक महत्व

दुर्गा माता के प्रसिद्द 5 मंदिर, रखते है अपना पौराणिक महत्व

By: Ankur Wed, 10 Oct 2018 6:14 PM

दुर्गा माता के प्रसिद्द 5 मंदिर, रखते है अपना पौराणिक महत्व

आज कलश स्थापना के साथ ही मातारानी का पर्व नवरात्रि शुरू हो चुका हैं और इसी के साथ ही मातारानी के दर्शन के लिए मंदिरों में भक्तों की कतारें लगने लगी हैं। हमारे देश में मातारानी के कई मंदिर हैं, लेकिन कुछ मंदिर ऐसे हैं जो अपना पौराणिक महत्व लिए हुए हैं, जिनका दर्शन करने और मातारानी का आशीर्वाद पाने के लिए भक्त दूर-दूर से यहाँ आते हैं। आज हम आपको मातारानी के इन्हीं मंदिरों के बारे में बताने जा रहे हैं। तो आइये जानते हैं इनके बारे में।

* अम्बाजी मंदिर, गुजरात

यह मंदिर गुजरात-राजस्थान सीमा पर स्थित है। माना जाता है कि यह मंदिर लगभग बारह सौ साल पुराना है। इस मंदिर के जीर्णोद्धार का काम 1975 से शुरू हुआ था और तब से अब तक जारी है। श्वेत संगमरमर से निर्मित यह मंदिर बेहद भव्य है। मंदिर का शिखर एक सौ तीन फुट ऊंचा है। शिखर पर 358 स्वर्ण कलश सुसज्जित हैं। मां अम्बा-भवानी के शक्तिपीठों में से एक इस मंदिर के प्रति मां के भक्तों में अपार श्रद्धा है। मंदिर के गर्भगृह में मांकी कोई प्रतिमा स्थापित नहीं है। यहां मां का एक श्री-यंत्र स्थापित है। इस श्री-यंत्र को कुछ इस प्रकार सजाया जाता है कि देखने वाले को लगे कि मां अम्बे यहां साक्षात विराजी हैं। नवरात्र में यहां का पूरा वातावरण शक्तिमय रहता है।

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* दुर्गा मंदिर, वाराणसी

यह वाराणसी के रामनगर में स्थित है। माना जाता है कि इस मंदिर का निर्माण एक बंगाली महारानी ने 18 वीं सदी में करवाया था। यह मंदिर, भारतीय वास्तुकला की उत्तर भारतीय शैली की नागारा शैली में बनी हुई है। इस मंदिर में एक वर्गाकार आकृति का तालाब बना हुआ है जो दुर्गा कुंड के नाम से जाना जाता है। यह इमारत लाल रंग से रंगी हुई है जिसमें गेरू रंग का अर्क भी है। मंदिर में देवी के वस्त्र भी गेरू रंग के है। एक मान्यता के अनुसार, इस मंदिर में स्थापित मूर्ति को मनुष्यों द्वारा नहीं बनाया गया है बल्कि यह मूर्ति स्वयं प्रकट हुई थी, जो लोगों की बुरी ताकतों से रक्षा करने आई थी। नवरात्रि और अन्य त्योहारों के दौरान इस मंदिर में हजारों भक्तगण श्रद्धापूर्वक आते हैं।

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* श्री महालक्ष्मी मंदिर, कोल्हापुर

श्री महालक्ष्मी मंदिर विभिन्न शक्ति पीठों में से एक है और महाराष्ट्र के कोल्हापुर में स्थित है। यहां जो भी भक्त अपनी मनोकामना लेकर आता है मां के आशीर्वाद से वह मुराद पूरी हो जाती है। भगवान विष्णु की पत्नी होने के नाते इस मंदिर का नाम माता महालक्ष्मी पड़ा।

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* श्रीसंगी कलिका मंदिर, कर्नाटक

श्रीसंगी कलिका मंदिर काली मां को समर्पित है और यह कर्नाटक के बेलगाम में स्थित है। यह कर्नाटक का सबसे प्रसिद्ध मंदिर है और यहां पर मां दुर्गा के काली रूप की पूजा करने का विधान है।

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* दंतेश्वरी मंदिर, छत्तीसगढ़

छत्तीसगढ़ के बस्तर क्षेत्र में स्थित है दन्तेवाड़ा का प्रसिद्ध दंतेश्वरी मंदिर। हसीन वादियों के लिए मशहूर यह मंदिर काफी पुराना है। ऐसी मान्यता है कि यहां सती का दांत गिरा था, जिसके कारण जगह का नाम दंतेश्वरी पड़ा।

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