महाकुंभ, जो 14 जनवरी से 26 फरवरी तक आयोजित किया गया था, अब समाप्त हो चुका है। इस आयोजन में श्रद्धालुओं को 13 विभिन्न स्थानों से मेला क्षेत्र में लाने के लिए प्रयागराज में कुल 750 शटल बसों का संचालन किया गया। महाकुंभ के दौरान तीन भूला-बिछड़ा केंद्र बनाए गए थे और दो एनजीओ, जिनमें से एक सरकारी था, ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इन केंद्रों ने महाकुंभ के 45 दिनों में 48,499 लोगों को उनके परिजनों से मिलवाया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस दौरान महाकुंभ का 10 बार दौरा किया।
महाकुंभ के दौरान चार महत्वपूर्ण विश्व रिकॉर्ड भी बने, जिनमें शामिल हैं:
- 700 शटल बसों का संचालन
- 300 सफाई कर्मचारियों द्वारा एक साथ नदी की सफाई
- 15,000 सफाई कर्मचारियों द्वारा एक साथ सफाई करना
- 10,000 हैंड प्रिंटिंग कार्ड बनाना
महाकुंभ की विशेषताएँ
महाकुंभ को 4,000 हेक्टेयर में बसाया गया, जो 2019 के अर्धकुंभ से 800 हेक्टेयर अधिक था। पूरे मेला क्षेत्र को 25 हेक्टेयर में बांटा गया और कुल 12 किलोमीटर में पक्के घाट बनाए गए। 1,850 हेक्टेयर क्षेत्र में पार्किंग सुविधाएँ बनाई गईं, जिनमें कुल 101 पार्किंग स्थल थे, जो रोजाना 5 लाख से अधिक वाहनों को पार्क कर सकते थे। इसके अलावा, 31 पांटून ब्रिज, 67,000 से अधिक स्ट्रीट लाइट्स और 1.5 लाख शौचालय बनाए गए। योगी आदित्यनाथ सरकार ने महाकुंभ पर ₹7,000 करोड़ खर्च किए, जबकि केंद्र सरकार ने ₹15,000 करोड़ का योगदान दिया। 2,750 सीसीटीवी कैमरे और 80 वेरिएल मैसेज डिस्प्ले भी लगाए गए थे।
सुरक्षा और निगरानी के इंतजाम
महाकुंभ की सुरक्षा के लिए 268 एआई कैमरे भीड़ की निगरानी के लिए और 240 एआई कैमरे वाहनों की गिनती के लिए लगाए गए थे। कुल 37,000 पुलिसकर्मी इस आयोजन में तैनात थे, और केंद्र बलों को मिलाकर 80,000 सुरक्षाकर्मी महाकुंभ के दौरान तैनात किए गए थे। 16,000 ट्रेनें चलाई गईं, जिनमें 45 दिनों में लगभग 4.5 करोड़ श्रद्धालुओं ने यात्रा की।
बुनियादी सुविधाएँ और इंफ्रास्ट्रक्चर
महाकुंभ में पीने के पानी के लिए 1,248 किलोमीटर लंबी पाइपलाइन बिछाई गई और 56,000 पानी के कनेक्शन दिए गए थे। 9 रेलवे ओवरब्रिज (ROBs) और फ्लाइओवर बनाए गए, साथ ही प्रयागराज में 142 से ज्यादा सड़कों की मरम्मत और चौड़ीकरण किया गया। मेला क्षेत्र में 20,000 सफाई कर्मचारी और 8,000 नावें तैनात की गई थीं।
यह महाकुंभ एक विशाल आयोजन था, जिसमें विश्व रिकॉर्ड, प्रभावशाली इंफ्रास्ट्रक्चर और शानदार संचालन की मिसाल पेश की गई, जो राज्य और केंद्र सरकारों के प्रयासों और हजारों कर्मचारियों की मेहनत का परिणाम था।