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बिहार के खूबसूरत झरनों को देखकर प्राकृतिक सौंदर्य के कायल हो जाते हैं पर्यटक, तेज गति से बढ़ता पर्यटन स्थल

बिहार में मानसून ने दस्तक दे दी है। करीब 17 सालों बाद ऐसा हुआ है कि समय से पहले ही बिहार में मानसून आ गया है।

Posts by : Geeta | Updated on: Thu, 15 Jun 2023 10:03:06

बिहार के खूबसूरत झरनों को देखकर प्राकृतिक सौंदर्य के कायल हो जाते हैं पर्यटक, तेज गति से बढ़ता पर्यटन स्थल

बिहार में मानसून ने दस्तक दे दी है। करीब 17 सालों बाद ऐसा हुआ है कि समय से पहले ही बिहार में मानसून आ गया है। मानसून की एंट्री हो चुकी हो और बिहार के वाटरफॉल्स पर स्थानीय लोगों की भीड़ ना उमड़े ऐसा कैसे हो सकता है। जब भी वाटरफॉल्स की बात होती है तो अक्सर लोग बिहार का नाम लेना ही भूल जाते हैं। क्या आपने कभी बिहार की प्राकृतिक सुंदरता का पता लगाया है? यदि नहीं, तो आपको इसके खूबसूरत झरनों की यात्रा की योजना बनाने पर विचार करना चाहिए, जो राज्य के प्राकृतिक वैभव हैं। भले ही जंगलों, झरनों और अन्य प्राकृतिक सुंदरियों के बारे में बात करने पर बिहार सबसे कम चर्चा वाला राज्य है, फिर भी यह कई प्राकृतिक प्रेमियों और वन्यजीव फोटोग्राफरों द्वारा दौरा किया जाता है जो यहां बिहार की कुछ अपरंपरागत तस्वीरें लेने के लिए आते हैं। इसके स्तूपों और अन्य प्राचीन चमत्कारों को देखने के अलावा, आपको इसकी प्राकृतिक सुंदरता की एक झलक भी देखनी चाहिए जो पूरे राज्य में फैली हुई है। तो आइए जानते हैं बिहार के इन खूबसूरत झरनों के बारे में...

बिहार के खूबसूरत झरनों को देखकर प्राकृतिक सौंदर्य के कायल हो जाते हैं पर्यटक, तेज गति से बढ़ता पर्यटन स्थल

काकोलट वाटरफॉल

बिहार और झारखंड की सीमा के नजदीक नवादा जिले से 35 किमी दूर यह वाटरफॉल चारों तरफ हरे-भरे वन क्षेत्र से घिरा हुआ है। बारिश के दिनों में तो यहां इतनी हरियाली होती है कि देखकर लगता मानों यह पूरा क्षेत्र गहरे हरे रंग की चादर ओढ़े हुए है। मकर संक्रांति के समय यहां 3 दिवसीय मेला भी लगता है। यह वाटरफॉल बिहार के सबसे बेहतरीन झरनों में गिना जाता है। करीब 150 से 160 फीट की ऊंचाई से नीचे जलाशय में गिरने वाला झरना मानसून के समय काफी मनमोहक दिखायी देता है।

बिहार के खूबसूरत झरनों को देखकर प्राकृतिक सौंदर्य के कायल हो जाते हैं पर्यटक, तेज गति से बढ़ता पर्यटन स्थल

तेलहर वाटरफॉल

रथ यात्रा के दिन कोलकाता का हर बच्चा निकालता है अपनी 3 मंजील रथरथ यात्रा के दिन कोलकाता का हर बच्चा निकालता है अपनी 3 मंजील रथ तेलहर वाटरफॉल भी कैमूर जिले में मौजूद है जो कैमूर वाइल्डलाइफ अभ्यारण्य का हिस्सा है। यह झरना दुर्गावती नदी के उद्गम स्थल के करीब है। झरना 80 मीटर की ऊंचाई से नीचे तेलहर कुंड में गिरता है। मानसून के समय चारों तरफ प्राकृतिक सुन्दरता अपनी अनोखी छटा बिखेरती है। हरियाली और पक्षियों की चहचहाहट पर्यटकों को इस जगह की तरफ आकर्षित करती है। हालांकि इस कुंड या झरने में नहाने की पर्यटकों को अनुमति नहीं होती है।

बिहार के खूबसूरत झरनों को देखकर प्राकृतिक सौंदर्य के कायल हो जाते हैं पर्यटक, तेज गति से बढ़ता पर्यटन स्थल

कशिश वाटरफॉल

राजधानी पटना से 175 किमी दूर बिहार के रोहतास जिले में स्थित इस झरने की ऊंचाई लगभग 800 फीट है। कैमूर पहाड़ियों की वादियों में मौजूद यह झरना अपने आप में प्राकृतिक सुन्दरता को समेटे हुए है। इस झरने की विशेषता यह है कि 4 धाराओं के संगम के बाद यह झरना अपना वास्तविक आकार प्राप्त करता है। स्थानीय लोगों का मानना है कि इस झरने में नहाना सेहत के लिए काफी फायदेमंद होती है।

बिहार के खूबसूरत झरनों को देखकर प्राकृतिक सौंदर्य के कायल हो जाते हैं पर्यटक, तेज गति से बढ़ता पर्यटन स्थल

करकटगढ़ वाटरफॉल

कैमूर की पहाड़ियों के पास मौजूद यह वाटरफॉल दोस्तों और परिवार के सदस्यों के साथ पिकनिक पर जाने के लिए बेस्ट जगह है। इस वाटरफॉल की सुन्दरता की सराहना कई विदेशियों ने भी अपने यात्रा संस्मरण में की है। करकटगढ़ झरना कर्मनाशा नदी पर मौजूद है। इस झरने की ऊंचाई करीब 30 मीटर और चौड़ाई 91 मीटर है। इस झरने पर कई वाटरबेस्ड एक्टिविटीज जैसे बोटिंग, तैराकी और मछली पकड़ना भी होते हैं।

बिहार के खूबसूरत झरनों को देखकर प्राकृतिक सौंदर्य के कायल हो जाते हैं पर्यटक, तेज गति से बढ़ता पर्यटन स्थल

मंझर कुंड वाटरफॉल

बिहार के रोहतास जिले में सासाराम से महज 4 किमी दूर मंझर कुंड मानसून के समय बारिश के पानी से लबालब भरा रहता है। इस समय कुंड में गिरने वाला झरना भी पूरी तरह से पानी से भर जाता है। अगर वीकेंड पर गर्मी से बचने के लिए किसी जगह की तलाश कर रहे हैं तो इस कुंड पर जरूर जाएं। यहां आपको प्रकृति के बीच एक अलग ही नजारा दिखेगा। सासाराम से 10 किमी दूर कैमूर की पहाड़ियों पर धुंआ कुंड भी है जहां आप गर्मी से राहत पाने के लिए वीकेंड पर घूमने जरूर जा सकते हैं।

घूमने का सबसे अच्छा समय

यदि आप इन झरनों की अपनी यात्रा का अधिकतम लाभ उठाना चाहते हैं, तो मानसून के दौरान जून से सितंबर तक यात्रा की योजना बनाना सबसे अच्छा है। सर्दियों के दौरान भी, ये स्थान आपको निराश नहीं करेंगे और आपको एक आदर्श अनुभव प्रदान करेंगे। सर्दियों के ट्रिपर्स के लिए, अक्टूबर और दिसंबर के बीच की अवधि सबसे अच्छी होती है। झरनों के आसपास का शांत और सुखद वातावरण आपके लिए सही चाल चलेगा।

करकट और तेलहर झरने तक कैसे पहुंचे

इन दोनों जलाशयों का भ्रमण करने के लिए यह जानना आवश्यक है कि कैमूर जिले तक कैसे पहुंचा जाए। हवाई मार्ग से, कैमूर निकटतम हवाई अड्डे के लिए उड़ान भरकर पहुँचा जा सकता है, जो वाराणसी के बाबतपुर में लाल बहादुर शास्त्री अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा (VNS) है। यहां से आप कैमूर के लिए कैब किराए पर ले सकते हैं। वैकल्पिक रूप से, पर्यटक पटना हवाईअड्डे के लिए भी उड़ान ले सकते हैं, जो दोनों स्थानों के करीब है। यदि ट्रेन से आ रहे हैं, तो भभुआ रोड रेलवे स्टेशन पर उतरें, जो ग्रैंड कॉर्ड रेलवे लाइन के गया-मुगलसराय सेक्शन पर स्थित है। कैमूर जिले तक पहुँचने के लिए सड़क यात्री NH-30 ले सकते हैं।

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