मिलावटी पनीर कैसे बनता है?
बाजार में असली पनीर की कीमत बढ़ने के कारण कुछ मिलावटखोर नकली पनीर बनाने के लिए सस्ता मैदा और रसायनों का उपयोग करते हैं। इस प्रक्रिया में दूध की बजाय सस्ता सिंथेटिक दूध या मैदा मिलाया जाता है। फिर इस दूध या मैदे के मिश्रण में सोडियम बाइकार्बोनेट (बेकिंग सोडा) डाला जाता है। इसमें पाम ऑयल या अन्य सस्ते वनस्पति तेल मिलाए जाते हैं। बाद में, बेकिंग पाउडर का उपयोग कर इसे जमने के लिए छोड़ दिया जाता है। जब यह मिश्रण ठोस होकर पनीर जैसा दिखने लगता है, तो इसे काटकर पैक कर दिया जाता है। इस तरह, नकली पनीर तैयार हो जाता है, जो देखने में असली पनीर जैसा लगता है लेकिन उसकी गुणवत्ता और स्वच्छता संदिग्ध होती है।
नकली पनीर खाने के नुकसान
मिलावटी पनीर में पाए जाने वाले स्टार्च और रसायन पेट में जलन, गैस, कब्ज, दस्त जैसी समस्याओं का कारण बन सकते हैं। इसके अलावा, उल्टी या मिचली भी हो सकती है। यदि पनीर गंदे पानी से बना हो तो उसमें बैक्टीरिया जैसे ई.कोलाई और साल्मोनेला हो सकते हैं, जो बुखार, तेज पेट दर्द, चक्कर, और डिहाइड्रेशन (पानी की कमी) का कारण बन सकते हैं। डिटर्जेंट या सिंथेटिक रसायनों से बने पनीर का सेवन करने से त्वचा पर चकत्ते, खुजली, सांस लेने में परेशानी और होंठ-जीभ-गले में सूजन हो सकती है। इसके अलावा, यूरिया और सिंथेटिक दूध से बने पनीर का सेवन किडनी के लिए हानिकारक हो सकता है। इस पनीर में मौजूद फॉर्मलडिहाइड जैसे रसायन कैंसर का कारण बन सकते हैं।
FSSAI ने बताया पनीर में स्टार्च की जांच का तरीका
FSSAI (फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया) ने नकली पनीर की पहचान करने के लिए एक सरल टेस्ट का तरीका बताया है। इस टेस्ट के लिए आपको थोड़ी सी पनीर लेकर उसे 5 मिलीलीटर पानी में उबालना होता है। जब यह ठंडा हो जाए, तब इसमें 2 से 3 बूंद आयोडीन टिंचर डालें। अगर पनीर का रंग नीला हो जाता है, तो इसका मतलब है कि पनीर में स्टार्च मौजूद है, जो उसकी मिलावट का संकेत है।
यह तरीका आपको नकली पनीर की पहचान करने में मदद कर सकता है, जिससे आप अपनी और अपने परिवार की सेहत की सुरक्षा सुनिश्चित कर सकते हैं।













