
लगभग तीन महीने पहले जम्मू-कश्मीर की वादियों में गूंजे गोलियों के शोर का जवाब अब भारतीय सेना ने बेहद ठोस अंदाज़ में दिया है। 22 अप्रैल 2025 को हुए पहलगाम आतंकी हमले के 97 दिन बाद भारतीय सुरक्षा बलों ने ‘ऑपरेशन महादेव’ के तहत एक निर्णायक कार्रवाई को अंजाम दिया।
इस संयुक्त अभियान में श्रीनगर के लिडवास क्षेत्र में तीन पाकिस्तानी आतंकियों को ढेर कर एक बार फिर यह साबित कर दिया गया कि भारत अब आतंक के हर वार का करारा जवाब देने को तैयार है।
ऑपरेशन की पृष्ठभूमि: पहलगाम हमले के पीछे के गुनहगार
सूत्रों की मानें तो मारे गए आतंकियों में सुलेमान, यासिर और अली के नाम सामने आए हैं। शुरुआती जानकारी के अनुसार, इनमें से सुलेमान और यासिर वही आतंकी हैं, जिन्होंने पहलगाम में पर्यटकों को मौत के घाट उतारा था। हालांकि, इस संबंध में सेना द्वारा आधिकारिक पुष्टि अभी लंबित है। सेना ने बताया कि आतंकियों की शिनाख्त की प्रक्रिया चल रही है और शाम तक मीडिया को पूरी जानकारी प्रदान की जाएगी।
भारी मात्रा में हथियार और विस्फोटक बरामद
मुठभेड़ के बाद सुरक्षा बलों को आतंकियों के पास से उन्नत युद्ध सामग्री प्राप्त हुई। इनमें शामिल हैं -
अमेरिकी M4 कार्बाइन राइफल
AK-47 रायफलें
17 राइफल ग्रेनेड
अन्य संदिग्ध सैन्य उपकरण
इस सफलता के बाद इलाके में सुरक्षा व्यवस्था और भी सख्त कर दी गई है। अधिकारियों ने बताया कि खुफिया सूचनाओं के आधार पर यह अभियान प्रारंभ हुआ था। सुबह के वक्त फायरिंग की आवाजें सुनाई दीं, जिसके बाद सेना ने पूरे क्षेत्र को घेरकर आतंकियों को ठिकाने लगा दिया।
जब बैसरन घाटी बनी थी नरसंहार का मंजर
22 अप्रैल की उस भयानक सुबह को भुला पाना देशवासियों के लिए आसान नहीं है। पहलगाम से लगभग 6 किलोमीटर दूर बैसरन घाटी में तीन आतंकियों ने पर्यटकों पर सुनियोजित हमला किया था।
इस हमले की क्रूरता की इंतिहा थी कि धार्मिक पहचान के आधार पर निर्दोष लोगों को निशाना बनाया गया। इसमें 26 लोगों की जान चली गई, जबकि 16 अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए। इस घटना ने पूरे देश को गुस्से और ग़म से भर दिया था।
तीन नाम जो बन गए आतंक की पहचान
हमले के 48 घंटे के भीतर, 24 अप्रैल को, अनंतनाग पुलिस ने उन तीन आतंकियों की पहचान सार्वजनिक की जिन पर हमले का संदेह था:
आदिल हुसैन ठोकर – अनंतनाग का स्थानीय निवासी
हाशिम मूसा उर्फ सुलेमान – पाकिस्तान का आतंकवादी
अली उर्फ तल्हा भाई – पाकिस्तानी नागरिक
हाशिम मूसा और अली, दोनों पर ₹20 लाख का इनाम घोषित था। हाशिम को पाकिस्तानी सेना की स्पेशल सर्विस यूनिट का प्रशिक्षित सदस्य भी माना जाता है। यह वही मूसा था, जिसे पहलगाम नरसंहार का मास्टरमाइंड बताया जा रहा है।
एनआईए की जांच और संदिग्ध गिरफ्तारियां
हाल के सप्ताहों में, राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने इस हमले से संबंधित दो संदिग्धों को हिरासत में लिया था। इनसे पूछताछ के दौरान ऐसे सुराग मिले जो आतंकियों की पहचान और मॉड्यूल की विस्तृत योजना को उजागर करते हैं।
हालांकि यह स्पष्ट नहीं है कि गिरफ्तार किए गए संदिग्धों ने जिन नामों का खुलासा किया, वे वही तीन आतंकी हैं या कोई अन्य। लेकिन अब तक की कार्रवाई और ऑपरेशन की दिशा यह इशारा कर रही है कि ‘ऑपरेशन महादेव’ उसी आतंकी नेटवर्क को निशाना बनाने के लिए शुरू किया गया, जिसने अप्रैल के हमले को अंजाम दिया था।
भारत का बदला हुआ रुख: सटीकता से कार्यवाही
‘ऑपरेशन महादेव’ केवल एक जवाबी सैन्य कार्रवाई नहीं, बल्कि भारत के बदलते सुरक्षा दृष्टिकोण का जीवंत उदाहरण है। अब जवाब केवल सीमाओं पर नहीं दिए जा रहे, बल्कि हमलों की योजना बनाने वालों तक पहुंचकर उन्हें समाप्त किया जा रहा है। यह ऑपरेशन न केवल सेना की रणनीतिक शक्ति का प्रमाण है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि देश आतंक के खिलाफ रक्षात्मक नहीं, आक्रामक नीति अपनाने को तैयार है।














