
सोमवार को लोकसभा में हुई चर्चा के दौरान रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ और पहलगाम आतंकी हमले पर विस्तार से बात की और विपक्ष पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने विपक्ष की आलोचना का जवाब देते हुए कहा, “सवाल सिर्फ यह नहीं होना चाहिए कि हमारे कितने विमान गिरे, बल्कि यह भी पूछा जाना चाहिए कि हमने दुश्मन को कितना नुकसान पहुंचाया। परीक्षा में यह मायने नहीं रखता कि पेंसिल टूटी या पेन गिरा, असली बात यह है कि परिणाम क्या आया।”
ऑपरेशन सिंदूर क्यों रोका गया? रक्षा मंत्री ने किया स्पष्ट
राजनाथ सिंह ने स्पष्ट किया कि ऑपरेशन सिंदूर को स्थगित करने के पीछे कोई दबाव नहीं था, बल्कि इसका कारण यह था कि सेना ने अपने रणनीतिक और सैन्य लक्ष्य पहले ही प्राप्त कर लिए थे। उन्होंने आश्वस्त किया कि अगर पाकिस्तान की ओर से कोई नई हरकत हुई, तो यह ऑपरेशन दोबारा शुरू किया जा सकता है।
आतंकी ठिकानों पर सटीक वार, 22 मिनट में मिशन पूरा
रक्षा मंत्री ने बताया कि भारतीय सेना ने पाकिस्तान और पीओके में स्थित 9 आतंकवादी शिविरों को निशाना बनाया। इनमें से 7 ठिकानों को पूरी तरह नेस्तनाबूद कर दिया गया। राजनाथ सिंह के अनुसार, यह पूरा अभियान सिर्फ 22 मिनट में संपन्न हो गया और यह एक "नॉन-एस्केलेटरी स्ट्राइक" थी, यानी इसका मकसद तनाव बढ़ाना नहीं था।
भारतीय सेना की सूझबूझ: न कोई जवान हताहत, न आम नागरिक प्रभावित
उन्होंने गर्व के साथ बताया कि इस ऑपरेशन में एक भी भारतीय सैनिक को कोई नुकसान नहीं पहुंचा। सेना ने पूरी योजना रणनीतिक तरीके से बनाई थी, ताकि आतंकियों को करारा जवाब दिया जा सके, लेकिन निर्दोष नागरिकों को किसी तरह की क्षति न पहुंचे। यह भारतीय सेना की दक्षता और मानवीय दृष्टिकोण का प्रमाण है।
पाकिस्तान को सख्त संदेश: जवाब अब कार्रवाई से मिलेगा
अपने संबोधन के अंतिम हिस्से में राजनाथ सिंह ने पाकिस्तान को चेतावनी दी कि अगर उसने भविष्य में कोई दुस्साहस किया, तो भारत चुप नहीं बैठेगा। उन्होंने कहा, “हमने पहले मित्रता का हाथ बढ़ाया था, लेकिन पाकिस्तान ने उसकी कद्र नहीं की। अब हम जवाब उसी भाषा में देंगे जो बालाकोट स्ट्राइक में दी गई थी।”
उन्होंने यह भी कहा कि पाकिस्तान के शासक जानते हैं कि वे भारत से युद्ध में नहीं जीत सकते, इसलिए आतंकवाद को हथियार बनाकर इस्तेमाल करते हैं।














