
जम्मू-कश्मीर में एक बार फिर सुरक्षा बलों ने आतंकवाद के खिलाफ निर्णायक बढ़त ली है। श्रीनगर के समीप लिडवास क्षेत्र में भारतीय सेना, जम्मू-कश्मीर पुलिस और सीआरपीएफ ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए एक बड़े आतंकी नेटवर्क को ध्वस्त किया। ‘ऑपरेशन महादेव’ नामक इस गुप्त सैन्य अभियान में लश्कर-ए-तैयबा के शीर्ष आतंकी और 20 लाख के इनामी अपराधी हाशिम मूसा समेत तीन आतंकियों को ढेर कर दिया गया। यह कार्रवाई दो दिन तक चली, और सोमवार को इसके सफल समापन की पुष्टि हुई।
साजिश का भांडा फूटा, पहाड़ियों में छिपे आतंकवादियों पर टूटा कहर
इस कार्रवाई की रूपरेखा चिनार कॉर्प्स ने तैयार की थी। लिडवास का इलाका बेहद दुर्गम और घने जंगलों से घिरा हुआ है, जहां आतंकी समूहों ने अस्थायी अड्डे बना रखे थे। सूत्रों के अनुसार, दाचीगाम के जंगलों में हाल ही में एक संदिग्ध रेडियो संवाद पकड़ा गया था, जिसने सुरक्षाबलों को सतर्क कर दिया। जांच में संकेत मिले कि यह बातचीत पहलगाम में हुए नरसंहार से संबंधित आतंकी मॉड्यूल से जुड़ी हो सकती है।
कदम-कदम पर सतर्कता, हर मूवमेंट पर रही नजर
सूचना की पुष्टि के बाद, सेना ने रणनीतिक तरीके से इलाके की घेराबंदी शुरू की। स्थानीय नागरिकों और गश्ती टुकड़ियों की मदद से आतंकियों की मौजूदगी की जानकारी मिली। इसके बाद सेना की 24 राष्ट्रीय राइफल्स और 4 पैरा की विशेष इकाइयों को मौके पर भेजा गया। दो दिनों तक सतत तलाशी अभियान चला, जिसके बाद सोमवार सुबह 11:30 बजे सुरक्षाबलों और आतंकियों के बीच मुठभेड़ शुरू हुई।
करीब एक घंटे तक चली इस भीषण गोलीबारी के बाद दोपहर 12:37 बजे ड्रोन से मिले लाइव फुटेज में तीनों आतंकियों के मारे जाने की पुष्टि हुई। इस मुठभेड़ में लश्कर का बड़ा नाम हाशिम मूसा भी मारा गया, जो पिछले कई महीनों से सुरक्षा एजेंसियों के रडार पर था।
हाशिम मूसा: वह खूंखार चेहरा जो पहलगाम हत्याकांड के पीछे था
हाशिम मूसा केवल लश्कर-ए-तैयबा का ही नहीं, बल्कि जैश-ए-मोहम्मद के साथ मिलकर बने आतंकी गठजोड़ का भी हिस्सा था। 22 अप्रैल 2025 को हुए भीषण पहलगाम आतंकी हमले का मास्टरमाइंड यही था, जिसमें 26 पर्यटकों की क्रूरतापूर्वक हत्या कर दी गई थी। एनआईए ने उस पर ₹20 लाख का इनाम घोषित किया था और तभी से वह सुरक्षा बलों की प्राथमिक हिट लिस्ट में शामिल था।
ऑपरेशन सिंदूर के बाद की निर्णायक चाल
गौरतलब है कि पहलगाम की घटना के तुरंत बाद भारत ने ऑपरेशन सिंदूर के अंतर्गत पाकिस्तान और पीओके में स्थित 9 आतंकी ठिकानों को नेस्तनाबूद कर दिया था। इसमें 100 से अधिक आतंकियों का खात्मा हुआ था। लेकिन ‘ऑपरेशन महादेव’ में प्रत्यक्ष तौर पर हमले के योजनाकारों को निशाना बनाया गया और उन्हें ढेर कर एक नई सैन्य उपलब्धि दर्ज की गई।
सूत्रों की मानें, तो यह ऑपरेशन पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। अब भी इलाके के घने जंगलों में 2 से 4 और आतंकियों की मौजूदगी की आशंका जताई जा रही है। तलाशी अभियान लिडवास के आसपास लगातार जारी है।
रणनीति और संकल्प: भारत की सुरक्षा नीति में नई धार
'ऑपरेशन महादेव' न केवल एक सैन्य सफलता है, बल्कि यह भारत की बदली हुई सुरक्षा नीति का भी स्पष्ट संकेत है। आतंकी हमलों का जवाब अब केवल सीमित कार्रवाई तक सीमित नहीं है, बल्कि योजनाकारों को भी सटीकता से ढूंढकर खत्म किया जा रहा है। यह बदलाव भारतीय सुरक्षा तंत्र की तकनीकी, रणनीतिक और खुफिया क्षमता का प्रमाण है।














