राजस्थान विधानसभा में सोमवार को ड्रग विभाग में अनियमितताओं, सरकारी स्कूलों में कुक-कम-हेल्पर्स की सैलरी और न्याय प्रणाली की कमजोरियों पर गंभीर चर्चा हुई। सरकार ने ड्रग माफियाओं पर सख्त कार्रवाई करने का आश्वासन दिया, जबकि शिक्षा मंत्री ने कुक-कम-हेल्पर्स का मानदेय बढ़ाने की बात कही, लेकिन उन्हें न्यूनतम मजदूरी में शामिल करने का मामला श्रम विभाग पर छोड़ दिया। विधायकों ने न्याय व्यवस्था को मजबूत करने की जरूरत पर बल दिया और अधिकारियों की अनुपस्थिति पर सवाल उठाए।
अनधिकृत दवाओं की बिक्री पर उठा सवाल
विधायक गुरवीर सिंह ने ड्रग विभाग की लापरवाही और श्रीगंगानगर में बिना डॉक्टर की पर्ची के दवाओं की अवैध बिक्री का मुद्दा उठाया। उन्होंने बताया कि इससे मेडिकेटेड नशे की समस्या बढ़ रही है। उन्होंने मेडिकल स्टोर खोलने के लिए सख्त मानक तय करने और पिछले बजट में घोषित 10 नशा मुक्ति केंद्रों की स्थिति स्पष्ट करने की मांग की।
ड्रग माफियाओं पर कड़ी कार्रवाई का आश्वासन
चिकित्सा मंत्री गजेंद्र सिंह ने कहा कि NDPS एक्ट के तहत ड्रग माफियाओं पर लगातार कार्रवाई की जा रही है। गंगानगर क्षेत्र में कुछ दवाओं पर प्रतिबंध लगाया गया है और ड्रग विभाग नियमित रूप से दवा दुकानों की जांच कर रहा है। उन्होंने आश्वासन दिया कि जल्द ही सख्त कदम उठाए जाएंगे ताकि अवैध दवाओं की बिक्री को रोका जा सके।
विधायक रविंद्र भाटी ने कुक-कम-हेल्पर्स की सैलरी बढ़ाने की मांग उठाई
राजस्थान विधानसभा में विधायक रविंद्र भाटी ने सरकारी स्कूलों में कार्यरत कुक-कम-हेल्पर्स की कम सैलरी का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि राज्य के 65,000 सरकारी स्कूलों में मिड-डे मील बनाने वाले कर्मचारियों को मात्र 3,000 रुपये प्रतिमाह दिए जा रहे हैं, जो बेहद कम है। उन्होंने मांग की कि इन कर्मचारियों को न्यूनतम मजदूरी अधिनियम में शामिल किया जाए ताकि उन्हें उचित वेतन मिल सके।
शिक्षा मंत्री ने दिया जवाब
शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने जवाब में बताया कि पहले कुक-कम-हेल्पर्स का मानदेय 1,000 रुपये था, जिसे बढ़ाकर 2,143 रुपये कर दिया गया है। अप्रैल से इसमें 15% की वृद्धि की जाएगी, जिससे यह 2,800 रुपये तक हो जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि इनका कोई स्थायी पदनाम नहीं होने के कारण इन्हें न्यूनतम मजदूरी अधिनियम में शामिल नहीं किया जा सकता, और यह मामला श्रम विभाग के अंतर्गत आता है।