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सरकार-विपक्ष के बीच हुई गरमागरम बहस के बाद लोकसभा में पास Waqf Amendment Bill, अब राज्यसभा में होगा पेश

लोकसभा में तीखी बहस के बाद वक्फ संशोधन विधेयक पारित। असदुद्दीन ओवैसी ने विरोध में विधेयक की प्रति फाड़ी। विपक्ष ने इसे असंवैधानिक बताया, जबकि सरकार ने सभी आपत्तियों का जवाब देकर आशंकाएं दूर करने का प्रयास किया। नया कानून अधिसूचना जारी होते ही लागू होगा।

Posts by : Sandeep Gupta | Updated on: Thu, 03 Apr 2025 8:15:03

सरकार-विपक्ष के बीच हुई गरमागरम बहस के बाद लोकसभा में पास Waqf Amendment Bill, अब राज्यसभा में होगा पेश

सरकार और विपक्ष के बीच तीखी बहस के बाद बुधवार को लोकसभा में वक्फ संशोधन विधेयक पारित हो गया। विधेयक के समर्थन में 288 और विरोध में 232 वोट डाले गए। विधेयक को पारित करने के लिए सदन आधी रात के बाद तक चला।

एआईएमआईएम अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने इसे मुसलमानों पर हमला बताते हुए विरोध स्वरूप विधेयक की प्रति फाड़ दी। विपक्ष ने इस विधेयक को संविधान के मूल ढांचे के खिलाफ बताया, लेकिन सरकार ने सभी आपत्तियों का विस्तार से जवाब दिया और संबंधित आशंकाओं को दूर करने का प्रयास किया। सरकार ने मुस्लिम समुदाय को आश्वस्त किया कि यह कानून मस्जिदों या दरगाहों को छीनने अथवा धार्मिक मामलों में हस्तक्षेप के लिए नहीं, बल्कि वक्फ संपत्तियों के सुचारु प्रबंधन और नियमन के लिए लाया गया है।

अधिसूचना जारी होते ही लागू होगा नया कानून

नया कानून अधिसूचना जारी होने के दिन से ही प्रभावी हो जाएगा। विपक्ष द्वारा विधेयक को असंवैधानिक बताए जाने पर अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री किरेन रिजिजू ने स्पष्ट किया कि वक्फ संपत्ति से संबंधित कानून दशकों से अस्तित्व में हैं, और अदालतों ने इन्हें रद्द नहीं किया है। उन्होंने कहा कि ऐसे गंभीर विषयों पर हल्के में बयानबाजी नहीं होनी चाहिए। साथ ही, उन्होंने जोर देकर कहा कि भारत दुनिया में अल्पसंख्यकों के लिए सबसे सुरक्षित देश है।

विपक्ष की ओर से गौरव गोगोई, केसी वेणुगोपाल, असदुद्दीन ओवैसी और अरविंद सावंत ने विधेयक में संशोधन पेश किए, लेकिन सदन ने इन्हें खारिज कर दिया। दूसरी ओर, अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री किरेन रिजिजू के संशोधन को स्वीकार कर लिया गया। अब यह विधेयक आगे की प्रक्रिया के लिए राज्यसभा में पेश किया जाएगा।

विपक्षी दलों के रुख में नरमी

विधेयक पर चर्चा के दौरान जदयू, तेदेपा और लोजपा (आर) सहित एनडीए के सभी सहयोगी दल पूरी तरह से एकजुट नजर आए। दूसरी ओर, शुरू में कड़े विरोध का दावा करने वाले विपक्षी दलों के रुख में नरमी देखने को मिली। कांग्रेस और समाजवादी पार्टी सहित कुछ दलों को विधेयक के मूल प्रावधानों से नहीं, बल्कि संशोधन के कुछ बिंदुओं पर आपत्ति थी। दोनों पक्षों ने अपने-अपने सदस्यों की सदन में उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए व्हिप जारी किया था। पहले बहस के लिए आठ घंटे निर्धारित थे, जिसे बाद में ढाई घंटे और बढ़ा दिया गया। लोकसभा में करीब 12 घंटे तक चली मैराथन बहस के बाद जवाब देते हुए रिजिजू ने कहा कि इस विधेयक के पारित होने के बाद गरीब मुसलमान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को धन्यवाद देंगे।

विपक्ष का विरोध, सरकार की सफाई

विपक्षी सदस्यों ने विधेयक को मुस्लिम विरोधी करार दिया, जिसे रिजिजू ने खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि गृह मंत्री अमित शाह ने सभी मुद्दों पर स्पष्ट स्पष्टीकरण दिया है, लेकिन कुछ नेता सच्चाई स्वीकार करने को तैयार नहीं हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि विधेयक असंवैधानिक होता, तो अदालत इसे पहले ही रद्द कर चुकी होती।

असदुद्दीन ओवैसी ने उठाए विभिन्न मुद्दे, सरकार ने दिया जवाब

अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने कई मुद्दे उठाए, जिनमें वक्फ संपत्तियों को लेकर सवाल शामिल थे। ओवैसी ने पूछा कि अगर वक्फ में मुसलमानों के बच्चों के लिए प्रावधान किया जा रहा है, तो हिंदुओं के लिए क्यों नहीं? इस पर रिजिजू ने स्पष्ट किया कि हिंदुओं के लिए पहले से ही अलग प्रावधान मौजूद हैं, इसलिए इसके लिए नया कानून बनाने की जरूरत नहीं है।

लोकसभा में विधेयक पेश करते हुए रिजिजू ने इसे "उम्मीद" (यूनीफाइड वक्फ मैनेजमेंट इंपावरमेंट, इफिशिएंसी एंड डेवलपमेंट) नाम दिया। उन्होंने कहा कि वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन के लिए यह कानून लाना जरूरी था, क्योंकि यदि ऐसा न किया जाता, तो संसद भवन जैसी इमारतों पर भी वक्फ का दावा किया जा सकता था। उन्होंने 2014 के लोकसभा चुनाव से पहले की घटना का हवाला देते हुए कहा कि तत्कालीन सरकार ने दिल्ली की 123 संपत्तियां वक्फ को सौंप दी थीं। अगर केंद्र में नरेंद्र मोदी सरकार नहीं बनती, तो कई अन्य संपत्तियों पर भी वक्फ का कब्जा हो सकता था।

70 वर्षों से मुस्लिमों को गुमराह किया गया – सरकार

रिजिजू ने विपक्ष द्वारा फैलाए जा रहे भ्रम को भी दूर करने का प्रयास किया। उन्होंने कहा कि यह धारणा गलत है कि रेल और सेना के बाद वक्फ के पास सबसे ज्यादा जमीन है। उन्होंने स्पष्ट किया कि रेल और सेना की जमीन राष्ट्रीय संपत्ति है, जबकि वक्फ की संपत्तियां निजी मानी जाती हैं।

उन्होंने विपक्ष पर आरोप लगाते हुए कहा कि पिछले 70 वर्षों से मुस्लिम समुदाय को सिर्फ वोट बैंक की राजनीति के लिए गुमराह किया जा रहा है। सच्चर कमेटी की रिपोर्ट का हवाला देते हुए उन्होंने बताया कि 2006 में देश में 4.9 लाख वक्फ संपत्तियां थीं, जिनकी कुल आय 163 करोड़ थी। आज यह संख्या बढ़कर 8.72 लाख हो गई है, लेकिन आमदनी सिर्फ तीन करोड़ ही बढ़ी है। उन्होंने कहा कि इस विधेयक से वक्फ संपत्तियों का उचित प्रबंधन होगा, जिससे मुस्लिम समुदाय को सीधा लाभ मिलेगा।

इसके अलावा, उन्होंने वक्फ बोर्ड की मनमानी पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि अब वक्फ बोर्ड किसी भी जमीन को अपना बताकर उस पर दावा नहीं कर सकेगा।

सरकार ने कांग्रेस के उपनेता गौरव गोगोई की उस आपत्ति को भी खारिज कर दिया, जिसमें उन्होंने कहा था कि विधेयक पर गैर-सरकारी संस्थाओं से सुझाव नहीं लिए गए और विपक्ष के एक भी संशोधन प्रस्ताव को स्वीकार नहीं किया गया।

गौरव गोगोई ने लगाए सरकार पर गंभीर आरोप, अमित शाह ने दिया करारा जवाब

कांग्रेस नेता गौरव गोगोई ने सरकार पर हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि वक्फ संशोधन विधेयक संविधान के मूल ढांचे पर हमला करने, अल्पसंख्यकों को बदनाम करने, उन्हें मताधिकार से वंचित करने और समाज को विभाजित करने का एक प्रयास है।

इस पर गृह मंत्री अमित शाह ने पलटवार करते हुए कहा कि संप्रग (UPA) सरकार ने 2013 में केवल चार घंटे की चर्चा के बाद वक्फ विधेयक को पारित कर दिया था, जबकि इस बार इसे संयुक्त संसदीय समिति में 113 घंटे तक गहन चर्चा के बाद लाया गया है। उन्होंने बताया कि 92 लाख से अधिक सुझावों पर विचार करने के बाद यह विधेयक तैयार किया गया है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि सरकार ने इस पर गंभीरता से काम किया है।

सरकार ने किया साफ – वक्फ में कोई गैर-मुस्लिम सदस्य नहीं होगा

सरकार ने वक्फ कानून में संशोधन को लेकर विपक्ष के धार्मिक हस्तक्षेप के आरोपों को पूरी तरह खारिज कर दिया। सरकार ने स्पष्ट किया कि वक्फ प्रबंधन में कोई भी गैर-मुस्लिम सदस्य शामिल नहीं होगा।

हालांकि, सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि वक्फ परिषद और वक्फ बोर्ड में गैर-मुस्लिम सदस्य हो सकते हैं, लेकिन उनका काम धार्मिक मामलों में हस्तक्षेप करना नहीं होगा। वे सिर्फ यह सुनिश्चित करेंगे कि दान में दी गई संपत्तियों का सही ढंग से प्रबंधन किया जाए और उनका सदुपयोग हो।

इसके अलावा, सरकार ने यह भी घोषणा की कि वक्फ में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाई जाएगी, शिया-सुन्नी समुदायों का समुचित प्रतिनिधित्व सुनिश्चित किया जाएगा और पिछड़े वर्गों को भी स्थान मिलेगा।

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