न्यूज़
FIFA 2026 Yogi Adityanath Jyotish Donald Trump Narendra Modi Rahul Gandhi

प्राकृतिक सुन्दरता के बूते धरती का स्वर्ग कहलाता है श्रीनगर, करवाता है मैदानी शहरों का अहसास, पर्यटकों की पहली पसन्द शिकारा

श्रीनगर, जम्मू कश्‍मीर राज्‍य की ग्रीष्‍मकालीन राजधानी है। कश्मीर घाटी के मध्य में बसा श्रीनगर भारत के प्रमुख पर्यटन स्थलों में से हैं।

Posts by : Geeta | Updated on: Wed, 26 Jul 2023 10:47:57

प्राकृतिक सुन्दरता के बूते धरती का स्वर्ग कहलाता है श्रीनगर, करवाता है मैदानी शहरों का अहसास, पर्यटकों की पहली पसन्द शिकारा

श्रीनगर, जम्मू कश्‍मीर राज्‍य की ग्रीष्‍मकालीन राजधानी है। कश्मीर घाटी के मध्य में बसा श्रीनगर भारत के प्रमुख पर्यटन स्थलों में से हैं। श्रीनगर एक ओर जहाँ डल झील के लिए प्रसिद्ध है वहीं दूसरी ओर विभिन्न मंदिरों के लिए विशेष रूप से प्रसिद्ध है। स्वच्छ झील और ऊँचे पर्वतों के बीच बसे श्रीनगर की अर्थव्यवस्था का आधार लम्बे समय से मुख्यतः पर्यटन है। झेलम नदी के तट पर स्थित श्रीनगर भारतवासी धरती का स्‍वर्ग और पूरब का वेनिस कहते हैं। श्रीनगर एक बेहद सुन्दर शहर है। श्रीनगर मुख्‍य रूप से दो शब्‍दों से मिलकर बना है श्री और नगर। श्री का अर्थ होता है धन और नगर यानि शहर। धन का शहर से तात्‍पर्य है कि हर प्रकार से सम्‍पन्‍न, किसी भी प्रकार की कोई कमी न हों।

उत्तरी भारत, झेलम नदी के तट पर बसा यह शहर कश्मीर घाटी में 1,600 मीटर की ऊँचाई पर स्थित है। श्रीनगर को झीलों का नगर भी कहा जाता है। श्रीनगर चीड़, फ़र और देवदार के वृक्षों से ढके पर्वतों के बीच स्थित है। शहर के पास ही गुलमर्ग, फुलों की घाटी 2,590 मीटर की ऊँचाई पर स्थित हैं। जहाँ से हिमालय के उच्चतम शिखरों में से एक, नंगा पर्वत (ऊँचाई 8,126 मीटर) और कश्मीर घाटी का नयनाभिराम दृश्य दिखाई देता है।

यहां आने वाला हर सैलानी सबसे पहले श्रीनगर पहुंचता है, जो कि यहां का प्रमुख शहर तथा राज्य की ग्रीष्मकालीन राजधानी है। श्रीनगर घाटी का मुख्य व्यावसायिक केंद्र भी है। अन्य पर्वतीय स्थलों की तुलना में यह शहर कुछ अलग लगता है। यहां के घर व बाजार पहाडी ढलानों पर नहीं बसे। एक विस्तृत घाटी के मध्य स्थित होने के कारण यह मैदानी शहरों जैसा लगता है। किंतु पृष्ठभूमि में दिखाई पडते बर्फाछादित पर्वत शिखर यह एहसास कराते हैं कि सैलानी वास्तव में समुद्रतल से 1730 मीटर ऊंची सैरगाह में हैं। हाउसबोट में रहने वालों को जब कहीं आना-जाना होता है तो पहले वे शिकारे से सडक तक आते हैं। झील के सौंदर्य को निरखने के लिए शिकारे से जरूर घूमना चाहिए। इस तरह घूमते हुए शॉल, केसर, आभूषण, फूल आदि बेचने वाले अपने शिकारे में सजी दुकान के साथ आपके करीब आते रहेंगे। यही नहीं, आप पानी में तैरते फोटो स्टूडियो में कश्मीरी ड्रेस में अपनी तसवीर भी खिंचवा सकते हैं।

मुख्य आकर्षण

प्राकृतिक सुन्दरता के बूते धरती का स्वर्ग कहलाता है श्रीनगर, करवाता है मैदानी शहरों का अहसास, पर्यटकों की पहली पसन्द शिकारा

हजरत बल

श्रीनगर केवल प्राकृतिक सौंदर्य ही नहीं, वास्तु विरासत की दृष्टि से भी खूब समृद्ध है। यहां कई सुंदर मस्जिदें हैं। हजरत बल यहां का महत्वपूर्ण धर्मस्थल है। यहां हजरत मोहम्मद का बाल संग्रहीत होने के कारण मुसलिम समुदाय के लिए यह अत्यंत पवित्र स्थान है। संगमरमर की बनी इस सफेद इमारत का गुंबद दूर से ही पर्यटकों को इसकी भव्यता का एहसास कराता है। इस मस्जिद को कई अन्य नामों जैसे हजरतबल, अस्सार-ए-शरीफ, मादिनात-ऊस-सेनी, दरगाह शरीफ और दरगाह आदि के नाम से भी जाना जाता है। इस मस्जिद के समीप ही एक खूबसूरत बगीचा और इश्‍रातत महल है। जिसका निर्माण 1623 ई. में सादिक खान ने करवाया था।

प्राकृतिक सुन्दरता के बूते धरती का स्वर्ग कहलाता है श्रीनगर, करवाता है मैदानी शहरों का अहसास, पर्यटकों की पहली पसन्द शिकारा

शंकराचार्य मंदिर

श्रीनगर के मध्य हरीपर्वत पहाडी पर 16वीं शताब्दी में बना एक किला भी पर्यटकों को आकर्षित करता है। इसका निर्माण अफगान गवर्नर अता मुहम्मद खान ने करवाया था। अकबर ने इस किले का विस्तार किया था। दूसरी ओर डल झील के सामने तख्त-ए-सुलेमान पहाडी है। उसके शिखर पर प्रसिद्ध शंकराचार्य मंदिर है। यह प्राचीन मंदिर भगवान शंकर को समर्पित है। 10वीं शताब्दी में आदि गुरु शंकराचार्य यहां आए थे, जिसके कारण इस मंदिर का यही नाम पड गया। पहाडी से एक ओर डल झील का विस्तार तो दूसरी ओर श्रीनगर का विहंगम दृश्य देखते बनता है। पृष्ठभूमि में हिमशिखरों की भव्य कतार साफ नजर आती है। यह मंदिर शंकराचार्य पर्वत पर स्थित है। शंकराचार्य मंदिर समुद्र तल से 1100 फीट की ऊंचाई पर स्थित है। इसे तख्त-ए-सुलेमन के नाम से भी जाना जाता है। यह मंदिर कश्मीर स्थित सबसे पुराने मंदिरों में से एक है। इस मंदिर का निर्माण राजा गोपादित्य ने 371 ई. पूर्व करवाया था। डोगरा शासक महाराजा गुलाब सिंह ने मंदिर तक पंहुचने के लिए सीढ़िया बनवाई थी। इसके अलावा मंदिर की वास्तुकला भी काफी खूबसूरत है।

प्राकृतिक सुन्दरता के बूते धरती का स्वर्ग कहलाता है श्रीनगर, करवाता है मैदानी शहरों का अहसास, पर्यटकों की पहली पसन्द शिकारा

डल झील

पांच मील लम्बी और ढाई मील चौड़ी डल झील श्रीनगर की ही नहीं बल्कि पूरे भारत की सबसे खूबसूरत झीलों में से है। दुनिया भर में यह झील विशेष रूप से शिकारों या हाऊस बोट के लिए जानी जाती है। डल झील के आस-पास की प्राकृतिक सुंदरता अधिक संख्या में लोगों को अपनी ओर आकर्षित करती है। डल झील चार भागों गगरीबल, लोकुट डल, बोड डल और नागिन में बंटी हुई है। इसके अलावा यहां स्थित दो द्वीप सोना लेंक और रूपा लेंक इस झील की खूबसूरती को ओर अधिक बढ़ाते हैं।

श्रीनगर का सबसे बडा आकर्षण यहां की डल झील है। जहां सुबह से शाम तक रौनक नजर आती है। सैलानी घंटों इसके किनारे घूमते रहते हैं या शिकारे में बैठ नौका विहार का लुत्फउठाते हैं। दिन के हर प्रहर में इस झील की खूबसूरती का कोई अलग रंग दिखाई देता है। देखा जाए तो डल झील अपने आपमें एक तैरते नगर के समान है। तैरते आवास यानी हाउसबोट, तैरते बाजार और तैरते वेजीटेबल गार्डन इसकी खासियत हैं। कई लोग तो डल झील के तैरते घरों यानी हाउसबोट में रहने का लुत्फलेने के लिए ही यहां आते हैं। झील के मध्य एक छोटे से टापू पर नेहरू पार्क है। वहां से भी झील का रूप कुछ अलग नजर आता है। दूर सडक के पास लगे सरपत के ऊंचे झाडों की कतार, उनके आगे चलता ऊंचा फव्वारा बडा मनोहारी मंजर प्रस्तुत करता है। झील के आसपास पैदल घूमना भी सुखद लगता है। शाम होने पर भी यह झील जीवंत नजर आती है। सूर्यास्त के समय आकाश का नारंगी रंग झील को अपने रंग में रंग लेता है, तो सूर्यास्त के बाद हाउसबोट की जगमगाती लाइटों का प्रतिबिंब झील के सौंदर्य को दुगना कर देता है। शाम के समय यहां खासी भीड नजर आती है।

प्राकृतिक सुन्दरता के बूते धरती का स्वर्ग कहलाता है श्रीनगर, करवाता है मैदानी शहरों का अहसास, पर्यटकों की पहली पसन्द शिकारा

हाउसबोट

भीड-भाड से परे शांत वातावरण में किसी हाउसबोट में रहने की इछा है तो पर्यटक नागिन लेक या झेलम नदी पर खडे हाउसबोट में ठहर सकते हैं। नागिन झील भी कश्मीर की सुंदर और छोटी-सी झील है। यहां प्राय: विदेशी सैलानी ठहरना पसंद करते हैं। उधर झेलम नदी में छोटे हाउसबोट होते हैं। आज हाउसबोट एक तरह की लग्जरी में तब्दील हो चुके हैं और कुछ लोग दूर-दूर से केवल हाउसबोट में रहने का लुत्फउठाने के लिए ही कश्मीर आते हैं। हाउसबोट में ठहरना सचमुच अपने आपमें एक अनोखा अनुभव है भी। पर इसकी शुरुआत वास्तव में लग्जरी नहीं, बल्कि मजबूरी में हुई थी। कश्मीर में हाउसबोट का प्रचलन डोगरा राजाओं के काल में तब शुरू हुआ था, जब उन्होंने किसी बाहरी व्यक्ति द्वारा कश्मीर में स्थायी संपत्ति खरीदने और घर बनाने पर प्रतिबंध लगा दिया था। उस समय कई अंग्रेजों और अन्य लोगों ने बडी नाव पर लकडी के केबिन बना कर यहां रहना शुरू कर दिया। फिर तो डल झील, नागिन झील और झेलम पर हाउसबोट में रहने का चलन हो गया। बाद में स्थानीय लोग भी हाउसबोट में रहने लगे। आज भी झेलम नदी पर स्थानीय लोगों के हाउसबोट तैरते देखे जा सकते हैं। शुरुआती दौर में बने हाउसबोट बहुत छोटे होते थे, उनमें इतनी सुविधाएं भी नहीं थीं, लेकिन अब वे लग्जरी का रूप ले चुके हैं। सभी सुविधाओं से लैस आधुनिक हाउसबोट किसी छोटे होटल के समान हैं। डबल बेड वाले कमरे, अटैच बाथ, वॉर्डरोब, टीवी, डाइनिंग हॉल, खुली डैक आदि सब पानी पर खडे हाउसबोट में होता है। लकडी के बने हाउसबोट देखने में भी बेहद सुंदर लगते हैं। अपने आकार एवं सुविधाओं के आधार पर ये विभिन्न दर्जे के होते हैं। शहर के मध्य बहती झेलम नदी पर बने पुराने लकडी के पुल भी पर्यटकों के लिए एक आकर्षण है। कई मस्जिदें और अन्य भवन इस नदी के निकट ही स्थित है।

प्राकृतिक सुन्दरता के बूते धरती का स्वर्ग कहलाता है श्रीनगर, करवाता है मैदानी शहरों का अहसास, पर्यटकों की पहली पसन्द शिकारा

निगीन झील

शहर से लगभग 8 किलोमीटर की दुरी पर स्तिथ निगीन झील अपने नील पानी और आश्चर्यजनक खूबसूरती के लिए जाना जाता है जो डल झील का ही एक हिस्सा है। यह श्रीनगर में एक लोकप्रिय स्थल है और शांति से समय बिताने के लिए एकदम सही जगह है। यह झील चिनार के पेड़ों के घने जंगलों से घिरी हुई है और ज़बरवां पर्वत की तलहटी में स्थित है। रोमांच और मस्ती चाहने वालों के लिए यह आकर्षक झील, नौकायन और कई जल गतिविधियों के लिए एक आदर्श स्थान है। निगीन झील, डल झील की तुलना में कम भीड़ भाड़ वाली स्थान है और झील के नील साफ पानी इस स्थान को एक अद्भुत रूप देती है।

प्राकृतिक सुन्दरता के बूते धरती का स्वर्ग कहलाता है श्रीनगर, करवाता है मैदानी शहरों का अहसास, पर्यटकों की पहली पसन्द शिकारा

जामा मस्जिद

जामा मस्जिद कश्मीर की सबसे पुरानी और बड़ी मस्जिदों में से है। मस्जिद की वास्तुकला काफी अदभूत है। माना जाता है कि जामा मस्जिद की नींव सुल्लान सिकंदर ने 1398 ई. में रखी थी। इस मस्जिद की लंबाई 384 फीट और चौड़ाई 38 फीट है। इस मस्जिद में तीस हजार लोग एक-साथ नमाज अदा कर सकते हैं।

प्राकृतिक सुन्दरता के बूते धरती का स्वर्ग कहलाता है श्रीनगर, करवाता है मैदानी शहरों का अहसास, पर्यटकों की पहली पसन्द शिकारा

खीर भवानी मंदिर

श्रीनगर जिले के तुल्लामुला में स्थित खीर भवानी मंदिर यहां के प्रमुख धार्मिक स्थलों में से एक है। यह मंदिर माता रंगने देवी को समर्पित है। प्रत्येक वर्ष जेष्ठ अष्टमी (मई-जून) के अवसर पर मंदिर में वार्षिक उत्सव का आयोजन किया जाता है। इस अवसर पर काफी संख्या में लोग देवी के दर्शन के लिए विशेष रूप से आते हैं।

प्राकृतिक सुन्दरता के बूते धरती का स्वर्ग कहलाता है श्रीनगर, करवाता है मैदानी शहरों का अहसास, पर्यटकों की पहली पसन्द शिकारा

चट्टी पदशाही

चट्टी पदशाही कश्मीर के प्रमुख सिख गुरूद्वारों में से एक है। सिखों के छठें गुरू कश्मीर घूमने के लिए आए थे, उस समय वह यहां कुछ समय के लिए ठहरें थे। यह गुरूद्वारा हरी पर्वत किले से बस कुछ ही दूरी पर स्थित है।

प्राकृतिक सुन्दरता के बूते धरती का स्वर्ग कहलाता है श्रीनगर, करवाता है मैदानी शहरों का अहसास, पर्यटकों की पहली पसन्द शिकारा

निशात बाग

इस बगीचे को 1633 ई. में नूरजहां के भाई आसिफ खान ने बनवाया था। यह बगीचा डल झील के किनारे स्थित है। श्रीनगर जिला मुख्यालय से निशांत गार्डन 11 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। इस जगह से झील के साथ-साथ अन्य कई खूबसूरत दृश्यों का नजारा देखा जा सकता है।

निकटवर्ती स्थल

प्राकृतिक सुन्दरता के बूते धरती का स्वर्ग कहलाता है श्रीनगर, करवाता है मैदानी शहरों का अहसास, पर्यटकों की पहली पसन्द शिकारा

गुलमर्ग

कश्मीर घाटी में श्रीनगर से दूर भी किसी दिशा में निकल जाएं तो प्रकृति के इतने रूप देखने को मिलते हैं कि लगता है जैसे उसने अपना खजाना यहीं समेट रखा है। राजमार्गो पर लगे दिशा-निर्देशों पर लिखे अनेक शहरों के नाम सैलानियों को आकर्षित करते हैं। लेकिन अधिकतर सैलानी, गुलमर्ग, सोनमर्ग और पहलगाम आदि घूमने जाते हैं। गुलमर्ग के रास्ते में कई छोटे सुंदर गांव और आसपास धान के खेत आंखों को सुहाते हैं। सीधी लंबी सडक के दोनों और ऊंची दीवार के समान दिखाई पडती पेडों की कतार अत्यंत भव्य दिखाई देती है। पुरानी फिल्मों में इन रास्तों के बीच फिल्माए गीत पर्यटकों को याद आ जाते हैं। तंग मार्ग के बाद ऊंचाई बढने के साथ ही घने पेडों का सिलसिला शुरू हो जाता है। कुछ देर बाद सैलानी गुलमर्ग पहुंचते हैं तो घास का विस्तृत तश्तरीनुमा मैदान देख कर मंत्रमुग्ध हो जाते हैं। जिस प्रकार उत्तराखंड में पहाडी ढलवां मैदानों को बुग्याल कहते हैं, कश्मीर में उन्हें मर्ग कहते है। गुलमर्ग का अर्थ है फूलों का मैदान। समुद्र तल से 2680 मीटर की ऊंचाई पर स्थित गुलमर्ग सैलानियों के लिए वर्ष भर का रेसॉर्ट है। यहां से किराये पर घोडे लेकर खिलनमर्ग, सेवन स्प्रिंग और अलपत्थर जैसे स्थानों की सैर भी कर सकते हैं।

विश्व का सबसे ऊंचा गोल्फकोर्स भी यहीं है। सर्दियों में जब यहां बर्फ की मोटी चादर बिछी होती है तब यह स्थान हिमक्रीडा और स्कीइंग के शौकीन लोगों के लिए तो जैसे स्वर्ग बन जाता है। यहां चलने वाली गंडोला केबल कार द्वारा बर्फीली ऊंचाइयों तक पहुंचना रोमांचक लगता है। ढलानों पर लगे चीड या देवदार के पेडों पर बर्फलदी दिखती है। तमाम पर्यटक बर्फ पर स्कीइंग का आनंद लेते हैं तो बहुत से स्लेजिंग करके ही संतुष्ट हो लेते हैं। यहां पर्यटक चाहें तो स्कीइंग कोर्स भी कर सकते हैं। हर वर्ष होने वाले विंटर गेम्स के समय यहां विदेशी सैलानी भी बडी तादाद में आते हैं।

प्राकृतिक सुन्दरता के बूते धरती का स्वर्ग कहलाता है श्रीनगर, करवाता है मैदानी शहरों का अहसास, पर्यटकों की पहली पसन्द शिकारा

सोनमर्ग

सोनमर्ग का अर्थ सोने से बना घास का मैदान होता है। यह जगह श्रीनगर के उत्तर-पूर्व से 87 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। सोनमर्ग पर स्थित सिंध घाटी कश्मीर की सबसे बड़ी घाटी है। यह घाटी करीबन साठ मील लम्बी है।

सोनमर्ग भी कश्मीर की एक निराली सैरगाह है। समुद्र तल से लगभग 3000 मीटर की ऊंचाई पर स्थित यह एक रमणीक स्थल है। सिंध नदी के दोनों और फैले यहां के मर्ग सोने से सुंदर दिखाई देते हैं। इसीलिए इसे सोनमर्ग अर्थात सोने का मैदान कहा गया होगा। सोनमर्ग से घुडसवारी करके थाजिवास ग्लेशियर भी देखने जा सकते हैं। वहां ग्लेशियर पर घूमने का आनंद भी लिया जा सकता है। अनंत हिमनदों के सामने खडे होकर प्रकृति की विशालता का एहसास मन में रोमांच उत्पन्न कर देता है। प्रतिवर्ष होने वाली अमरनाथ यात्रा का एक मार्ग सोनमर्ग से बलतल होकर भी है। यहां से लद्दाख के रास्ते में पडने वाला जोजीला दर्रा 30 किमी दूर है। पहलगाम का रास्ता भी सैलानियों को बहुत प्रभावित करता है। मार्ग में पाम्पोर में केसर के खेत दिखाई देते हैं। जगह-जगह क्रिकेट के बैट रखे नजर आते हैं। यहां विलो-ट्री की लकडी से ये बैट बनते हैं। इनके अलावा अवंतिपुर में 9वीं शताब्दी में बने दो मंदिरों के भग्नावशेष तथा मार्तड का सूर्य मंदिर भी आकर्षक हैं। सागरतल से 2130 मीटर की ऊंचाई पर बसा पहलगाम कभी चरवाहों का छोटा सा गांव था। किंतु यहां बिखरी नैसर्गिक छटा ने इसे खुशनुमा सैरगाह बना दिया। लिद्दर नदी इसकी छटा को और बढाती है। नदी पर कई जगह बने लकडी के पुल और दूर दिखते हिमशिखर तो पिक्चर पोस्टकार्ड से दृश्य प्रस्तुत करते हैं। देवदार के जंगल, झरने और फूलों के मैदान तो जगह-जगह नजर आएंगे। बैसरन के मर्ग, आडु, चंदनवाडी जैसे स्थान घोडों पर बैठकर घूमे जा सकते हैं। साहसी पर्यटक पहलगाम से तरसर, मरसर झीलें, दुधसर झील और कोलहाई ग्लेशियर जैसे ट्रेकिंग रूटों पर निकल सकते हैं। अमरनाथ यात्रा का मुख्य मार्ग पहलगाम से चंदनवाडी, शेषनाग होते हुए जाता है।

प्राकृतिक सुन्दरता के बूते धरती का स्वर्ग कहलाता है श्रीनगर, करवाता है मैदानी शहरों का अहसास, पर्यटकों की पहली पसन्द शिकारा

कोकरनाग वेरीनाग

सैलानियों को आकर्षित करने वाले अन्य स्थानों में कोकरनाग 2012 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। यह स्थान औषधीय गुणों वाले प्राकृतिक चश्मों के लिए प्रसिद्ध है। कश्मीरी भाषा में नाग का अर्थ चश्मा भी होता है। वेरीनाग में भी कुछ प्राकृतिक चश्में हैं। यहां बादशाह जहांगीर ने चश्मों का जल एक ताल में एकत्र कर उसके आसपास एक उद्यान बनवाया था। 80 मीटर के दायरे में फैले आठ कोणों वाले इस ताल एवं उद्यान में चिनार के वृक्षों की कतारें सैलानियों का मन मोह लेती है।

राज्य
View More

Shorts see more

पिंपल्स और ऑयली स्किन से छुटकारा पाने के आसान और असरदार तरीके

पिंपल्स और ऑयली स्किन से छुटकारा पाने के आसान और असरदार तरीके

  • पिंपल्स कंट्रोल करें आसान स्टेप्स से
  • साफ और ग्लोइंग स्किन के लिए सही रूटीन अपनाएं
  • हाइड्रेशन और हेल्दी लाइफस्टाइल से स्किन चमकदार बनाएं
read more

ताजा खबरें
View More

CJP आंदोलन पर अभिजीत दीपके का बड़ा ऐलान, बोले- मांग पूरी होने तक नहीं हटेंगे पीछे
CJP आंदोलन पर अभिजीत दीपके का बड़ा ऐलान, बोले- मांग पूरी होने तक नहीं हटेंगे पीछे
'बदले की भावना से किया गया केस', खान सर के वकील बोले- सुरक्षा कारणों से चली थी गोली
'बदले की भावना से किया गया केस', खान सर के वकील बोले- सुरक्षा कारणों से चली थी गोली
उत्तराखंड चारधाम यात्रा: केदारनाथ में उमड़ा आस्था का सैलाब, 11 लाख से अधिक पहुंचे श्रद्धालु; स्वास्थ्य कारणों से 161 यात्रियों की मौत
उत्तराखंड चारधाम यात्रा: केदारनाथ में उमड़ा आस्था का सैलाब, 11 लाख से अधिक पहुंचे श्रद्धालु; स्वास्थ्य कारणों से 161 यात्रियों की मौत
CBSE 12वीं री-इवैल्यूएशन के लिए आवेदन का आज आखिरी मौका, रात 12 बजे तक खुला रहेगा पोर्टल
CBSE 12वीं री-इवैल्यूएशन के लिए आवेदन का आज आखिरी मौका, रात 12 बजे तक खुला रहेगा पोर्टल
सियासी जमीन खिसकने के बीच INDIA गठबंधन की याद, दिल्ली बैठक में ममता बनर्जी को कितना मिलेगा समर्थन?
सियासी जमीन खिसकने के बीच INDIA गठबंधन की याद, दिल्ली बैठक में ममता बनर्जी को कितना मिलेगा समर्थन?
पेड्डी स्टार राम चरण की पत्नी संभालती हैं 77 हजार करोड़ का कारोबार, ग्लैमर से दूर बनाई अलग राह
पेड्डी स्टार राम चरण की पत्नी संभालती हैं 77 हजार करोड़ का कारोबार, ग्लैमर से दूर बनाई अलग राह
लग्जरी लाइफस्टाइल दिखाने वाली यूट्यूबर रचना गुर्जर के घर फिल्मी अंदाज में चोरी, नकदी और जेवर लेकर फरार हुए बदमाश
लग्जरी लाइफस्टाइल दिखाने वाली यूट्यूबर रचना गुर्जर के घर फिल्मी अंदाज में चोरी, नकदी और जेवर लेकर फरार हुए बदमाश
बॉक्स ऑफिस पर 'पेद्दी' का तूफान जारी, तीसरे दिन ही 100 करोड़ क्लब के पार पहुंची फिल्म, वर्ल्डवाइड भी मचा रही धमाल
बॉक्स ऑफिस पर 'पेद्दी' का तूफान जारी, तीसरे दिन ही 100 करोड़ क्लब के पार पहुंची फिल्म, वर्ल्डवाइड भी मचा रही धमाल
Samsung यूजर्स के लिए बड़ी खुशखबरी, पुराने फोन भी बनेंगे बिल्कुल नए जैसे, जल्द आ सकता है Android 17 अपडेट
Samsung यूजर्स के लिए बड़ी खुशखबरी, पुराने फोन भी बनेंगे बिल्कुल नए जैसे, जल्द आ सकता है Android 17 अपडेट
CJP प्रदर्शन पर बीजेपी अध्यक्ष नितिन नवीन की पहली प्रतिक्रिया, बोले- विदेश से युवाओं को भटकाने की कोशिशें नहीं होंगी सफल
CJP प्रदर्शन पर बीजेपी अध्यक्ष नितिन नवीन की पहली प्रतिक्रिया, बोले- विदेश से युवाओं को भटकाने की कोशिशें नहीं होंगी सफल
जाम में थमी एंबुलेंस, बिगड़ती हालत देख मरीज को गोद में अस्पताल ले गए परिजन
जाम में थमी एंबुलेंस, बिगड़ती हालत देख मरीज को गोद में अस्पताल ले गए परिजन
घर में आग लगने के पीछे अक्सर होती हैं ये वजहें, समय रहते हो जाएं सतर्क
घर में आग लगने के पीछे अक्सर होती हैं ये वजहें, समय रहते हो जाएं सतर्क
'सिर्फ खेलने नहीं, दो दशक तक राज करने आया हूं', वैभव सूर्यवंशी का बड़ा दावा; विराट कोहली से मुलाकात को बताया सपनों जैसा पल
'सिर्फ खेलने नहीं, दो दशक तक राज करने आया हूं', वैभव सूर्यवंशी का बड़ा दावा; विराट कोहली से मुलाकात को बताया सपनों जैसा पल
बैंक लॉकरों से निकले करोड़ों रुपये, कई मकान और प्लॉट भी मिले; जांच में फंसा इंजीनियर
बैंक लॉकरों से निकले करोड़ों रुपये, कई मकान और प्लॉट भी मिले; जांच में फंसा इंजीनियर