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बारिश के मौसम में तेजी से फैलता है लेप्टोस्पायरोसिस इंफेक्शन, जानिए इस बीमारी का कारण, लक्षण और बचाव

लेप्टोस्पायरोसिस बैक्टीरिया, संक्रमित जानवर ( मुख्य रूप से चूहे ) के मूत्र से या मृत जानवर से संक्रमित ऊतक के माध्यम से फ़ैलता है।

Posts by : Priyanka | Updated on: Wed, 31 July 2024 10:07:07

बारिश के मौसम में तेजी से फैलता है लेप्टोस्पायरोसिस इंफेक्शन, जानिए इस बीमारी का कारण, लक्षण और बचाव

लेप्टोस्पायरोसिस बैक्टीरिया, संक्रमित जानवर ( मुख्य रूप से चूहे ) के मूत्र से या मृत जानवर से संक्रमित ऊतक के माध्यम से फ़ैलता है। जानकारी के अनुसार, चूहे ने कहीं यूरिन किया और कोई कटी त्वचा का शख्स उसके संपर्क में आए तो लेप्टोस्पायरोसिस होने की आशंका रहती है। यह बैक्टीरिया छह माह पानी में जिंदा रहता है। इस संक्रमण के फैलने के लिए जुलाई से अक्टूबर का महीना सबसे प्रभावी माना जाता है। लेप्टोस्पायरोसिस को रैट फीवर के नाम से भी जाना जाता है। बारिश में मच्छरों के कारण होने वाली बीमारी चिकनगुनिया के बारे में तो लोग जानते हैं, लेकिन शायद लेप्टोस्पायरोसिस के बारे में जानकारी कम ही लोग रखते होंगे।ये एक ऐसी बीमारी है जिसकी चपेट में किसी भी आयु वर्ग के लोग आ सकते हैं। लेप्टोस्पाइरा बैक्टीरिया के कारण लेप्टोस्पायरोसिस फैलता है, यह बैक्टीरिया खरोंच, आंखों, नाक या मुंह के माध्यम से आपको इंफेक्टेड कर सकता है। यहां हम आपको बताएंगे लेप्टोस्पायरोसिस संक्रमण क्या है, इसके लक्षण और बचाव के तरीके।

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लेप्टोस्पायरोसिस होता क्या है?

लेप्टोस्पायरोसिस एक तरह का बैक्टीरियल इन्फेक्शन है, जो इंसानों और जानवरों दोनों को संक्रमित कर सकता है। यह लेप्टोस्पाइरा जीनस के बैक्टीरिया के कारण होता है। इंसानों में लेप्टोस्पाइरा के कई तरह के लक्षण देखने को मिलते हैं। जिनमें से कई अन्य बीमारियों के लक्षणों से मिलते हैं। इसके अलावा कई मरीजों में इसका एक भी लक्षण नजर नहीं आता। लेप्टोस्पायरोसिस कोई मामूली बीमारी नहीं है, इसका समय पर इलाज न होने से किडनी डैमेज, लिवर फेल, सांस संबंधी समस्या और यहां तक कि मौत भी हो सकती है।

ऐसे फैलता है

इस बीमारी के वाहक चूहे व पालतू जानवर हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, संक्रमण एक संक्रमित जानवर के मूत्र से या मृत जानवर से संक्रमित ऊतक के माध्यम से फ़ैल सकता है। यह बैक्टीरिया निम्नलिखित के द्वारा शरीर में प्रवेश कर सकता है। इसके अलावा, जानवरों के साथ काम करना या दूषित मिट्टी, कीचड़ या बाढ़ के पानी के संपर्क में आने से इस डिजीज के होने का अधिक खतरा होता है। डॉक्टर बताते हैं कि बरसात के मौसम में यह संक्रमण काफी तेजी से फैलता है। जल जमाव और बाढ़ के कारण कीड़े-मकोड़े जैसे चूहे घरों में चले जाते हैं। जिससे ‘लेप्टोस्पायरोसिस’ का संक्रमण बढ़ जाता है।

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डिजीज के लक्षण क्या हैं?

लेप्टोस्पायरोसिस के लक्षण भी अन्य बीमारियों जैसे डेंगू, टाइफाइड और वायरल हेपेटाइटिस जैसे हैं। क्लिनिकल संकेत और लक्षण हल्के फ्लू और किसी किसी में बहुत गंभीर भी हो सकते हैं। लगभग 5-15 प्रतिशत अनुपचारित मामलों में यह गंभीर और घातक भी हो सकता है।इस डिजीज के लक्षण ठंड लगने के साथ तेज बुखार आना, तीव्र सिरदर्द, शरीर-दर्द या मांसपेशियों में दर्द, लाल आंखें, भूख में कमी, दस्त या उल्टी होना भी होते हैं।

किसके लिए ज्यादा खतरनाक हैं?

किसी भी अन्य डिजीज की तरह लेप्टोस्पायरोसिस से संक्रमण का खतरा जोखिम की मात्रा पर निर्भर करता है। चूंकि चूहे संक्रमण के प्राथमिक स्रोत होते हैं, इसलिए चूहों से पीड़ित परिसर में रहने वाले या काम करने वाले लोगों में संक्रमण का खतरा अधिक होता है। इसके अलावा, कुछ लोगों जैसे कि खेत मजदूर, पशुचिकित्सा, सीवर श्रमिकों को उनके काम की प्रकृति जो उन्हें चूहों और अन्य जानवरों जैसे वाहक के करीब निकटता में लाते हैं, के कारण जोखिम है।

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लेप्टोस्पायरोसिस का इलाज

लेप्टोस्पायरोसिस का इलाज एंटीबायोटिक दवाओं से किया जा सकता है, जिन्हें बीमारी की शुरुआत में ही डॉक्टर से संपर्क कर के लिया जाना चाहिए। वहीं, अधिक गंभीर लक्षणों वाले व्यक्तियों की जांच के बाद ही डॉक्टर इलाज और दवाएं तय करते हैं। हालांकि, किसी भी बीमारी से बचने के लिए परहेज सबसे अच्छा इलाज होता है।

लेप्टोस्पायरोसिस का बचाव क्या हैं ?


बचाव के लिए हमें अन्य संक्रमण जैसे ही साफ- सफाई का ध्यान रखना है। खाने से पहले हाथों को अच्छे से धोना, गंदे पानी व गीले मैदानों के संपर्क में आने के बाद सफाई का खासतौर पर ध्यान रखना, अपने घरों को चूहों से मुक्त रखना, कीचड़ वाले मैदान में जाने से बचना, शरीर पर लगे घाव को साफ व कवर रखना। इसके अलावे, भोजन को हर समय ढक कर रखें। कूड़े के ढेर को ढंककर और कचरे का निपटान समय पर और उचित तरीके से करें।

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