पेपर लीक और वित्तीय अनियमितता जैसे आरोपों के बीच अशोक गहलोत की पिछली सरकार से एक और घोटाले की बात सामने आई है। शिक्षा मंत्री मदन दिलावर के मुताबिक, गहलोत सरकार ने कोविड महामारी के दौरान मिड-डे मील योजना और मदरसा बोर्ड में यूनिफॉर्म वितरण में घोटाला किया है। भजनलाल सरकार उस समय हुई वित्तीय अनियमितता की जांच कराएगी और जो भी दोषी होगा, उसे बख्शा नहीं जाएगा। मदन दिलावर ने यह भी कहा कि खाना पकाने की सामग्री खरीदने के टेंडर में भी गड़बड़ियां हुई थीं। उस समय मिड-डे मील योजना में 1700 करोड़ रुपये से अधिक का घोटाला किया गया था।
"शिक्षा के साथ बच्चों को अच्छे संस्कार भी मिलें"
राजस्थान विधानसभा में शिक्षा विभाग की अनुदान मांगों पर हुई बहस में मदन दिलावर ने जवाब दिया। शिक्षा मंत्री ने सदन में कहा कि राजस्थान का हर बच्चा न केवल अच्छी शिक्षा प्राप्त करे, बल्कि अच्छे संस्कार भी प्राप्त करें, इसके लिए परिवार और विद्यालय दोनों की अहम भूमिका होती है। उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत प्रारंभिक शिक्षा में मातृभाषा या स्थानीय भाषा में शिक्षा देने की बात कही गई है। इसके अलावा, यह आदेश भी जारी किए गए हैं कि विद्यालय के दौरान कोई शिक्षक विद्यालय नहीं छोड़ सके।
66 लाख 22 हजार विद्यार्थियों को दी गई सामग्री
मदन दिलावर ने आगे कहा कि सीएजी की जांच रिपोर्ट में यह कहा गया है कि अशोक गहलोत सरकार के दौरान मिड-डे मील योजना में बड़ा घोटाला हुआ है। कोविड-19 महामारी के दौरान मिड-डे मील वितरित नहीं किया जा सका, क्योंकि बच्चे स्कूल नहीं आ रहे थे। इस पर सरकार ने निर्णय लिया कि मिड-डे मील की सामग्री बच्चों के घरों तक पहुंचाई जाएगी। वित्त विभाग ने इस योजना के तहत अभिभावकों के खातों में भुगतान कराने की सलाह दी थी, लेकिन विभाग ने सामग्री ही वितरित करने का निर्णय लिया।
सीएजी रिपोर्ट का हवाला देते हुए दिलावर ने उठाए सवाल, 1705 करोड़ का घोटाला होने का आरोप
सीएजी रिपोर्ट का हवाला देते हुए शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने कहा कि कोविड के कारण जब सब घरों में ही थे और कोई बाहर नहीं निकल रहा था, तो यह साफ नजर आता है कि मिड-डे मील सामग्री की खरीद टेंडर में गंभीर गड़बड़ियां हुई थीं। उन्होंने दावा किया कि इस घोटाले में 1705 करोड़ रुपये की भारी राशि शामिल है। उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि जैसलमेर जिले में 17 लाख पैकेट पड़े हुए मिले थे, जबकि रिकॉर्ड में यह दिखा दिया गया था कि सभी बच्चों तक मिड-डे मील पहुंच चुका है। यह स्पष्ट रूप से इस बात का संकेत है कि इसमें बड़ा घोटाला हुआ था, और इस घोटाले की जांच सीएजी ने की, जो बेहद सटीक और निष्पक्ष तरीके से की गई है।
मदन दिलावर ने कहा- चहेतों को क्लीनचिट दी गई, अब फिर से होगी जांच
मदन दिलावर ने आरोप लगाया कि शिक्षा विभाग ने इस मामले में अपनी चहेती टीम से जांच करवाई थी और घोटाले में शामिल लोगों को क्लीनचिट दे दी थी, जिसे उन्होंने विधानसभा में निरस्त कर दिया है। अब, उन्होंने कहा कि हम एक नई जांच कमेटी का गठन करेंगे, ताकि इस मामले की फिर से जांच की जा सके। साथ ही, उन्होंने यह भी कहा कि जांच कमेटी से यह सुनिश्चित किया जाएगा कि जल्द से जल्द रिपोर्ट दी जाए। उन्होंने दोहराया कि दोषियों को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा। इसके अलावा, उन्होंने यह भी जानकारी दी कि मदरसा बोर्ड में यूनिफॉर्म वितरण में भी घोटाला हुआ है।