न्यूज़
Yogi Adityanath Tejashwi Yadav Donald Trump Narendra Modi Rahul Gandhi

देश में प्रति दस लाख जनसंख्या पर केवल 15 जज: इंडिया जस्टिस रिपोर्ट 2025

इंडिया जस्टिस रिपोर्ट 2025 के अनुसार, भारत में प्रति दस लाख आबादी पर केवल 15 जज उपलब्ध हैं, जबकि अनुशंसित संख्या 50 है। रिपोर्ट में न्यायिक पदों की भारी रिक्तता, लंबित मामलों की चिंताजनक स्थिति, महिला और सामाजिक प्रतिनिधित्व में असंतुलन को उजागर किया गया है।

Posts by : Rajesh Bhagtani | Updated on: Tue, 15 Apr 2025 7:38:00

देश में प्रति दस लाख जनसंख्या पर केवल 15 जज: इंडिया जस्टिस रिपोर्ट 2025

नई दिल्ली। भारत में प्रति दस लाख आबादी पर सिर्फ 15 न्यायाधीश उपलब्ध हैं, जो कि विधि आयोग की 1987 की सिफारिश—प्रति दस लाख पर 50 जज—से बहुत कम है। यह खुलासा 15 अप्रैल को जारी हुई इंडिया जस्टिस रिपोर्ट 2025 में किया गया है, जो देश में न्यायिक व्यवस्था की स्थिति और प्रदर्शन को लेकर राज्यों की रैंकिंग प्रस्तुत करती है।

रिपोर्ट के अनुसार, 1.4 अरब की आबादी वाले देश में फिलहाल केवल 21,285 जज हैं। इसके विपरीत, अमेरिका में प्रति दस लाख जनसंख्या पर 150 और यूरोप में यह आंकड़ा औसतन 220 है।

रिपोर्ट में बताया गया है कि उच्च न्यायालयों में स्वीकृत पदों के मुकाबले 33 प्रतिशत पद अभी भी रिक्त हैं, जबकि वर्ष 2025 में यह रिक्ति दर 21 प्रतिशत रही। इससे मौजूदा जजों पर कार्यभार अत्यधिक बढ़ गया है।

मामलों का बोझ और लंबित केसों की स्थिति

रिपोर्ट के अनुसार, जिला न्यायालयों में एक जज औसतन 2,200 मामलों का निपटारा करता है। वहीं, इलाहाबाद और मध्य प्रदेश उच्च न्यायालयों में प्रति जज 15,000 मामले लंबित हैं।

मामलों की लंबित स्थिति भी चिंताजनक बताई गई है। रिपोर्ट के अनुसार, कर्नाटक, मणिपुर, मेघालय, सिक्किम और त्रिपुरा को छोड़कर बाकी सभी उच्च न्यायालयों में हर दो में से एक मामला तीन साल से अधिक समय से लंबित है। वहीं, दिल्ली में हर पांच में से एक मामला पांच साल से ज्यादा पुराना है और दो प्रतिशत मामले दस साल से भी अधिक समय से लंबित हैं।

जिला अदालतों की बात करें तो अंडमान और निकोबार, अरुणाचल प्रदेश, बिहार, गोवा, झारखंड, महाराष्ट्र, मेघालय, ओडिशा, राजस्थान, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल में 40 प्रतिशत से अधिक मामले तीन साल से ज्यादा समय से लंबित हैं।

महिला और सामाजिक प्रतिनिधित्व पर रिपोर्ट के निष्कर्ष


रिपोर्ट में कहा गया है कि जिला अदालतों में महिला जजों की भागीदारी 2017 में 30 प्रतिशत थी, जो 2025 में बढ़कर 38.3 प्रतिशत हो गई है। उच्च न्यायालयों में यह आंकड़ा 11.4 प्रतिशत से बढ़कर 14 प्रतिशत हो गया, जबकि सुप्रीम कोर्ट में यह केवल 6 प्रतिशत है। वर्तमान में देश के 25 उच्च न्यायालयों में से केवल एक में महिला मुख्य न्यायाधीश हैं।

दिल्ली की जिला अदालतों में केवल 11 प्रतिशत पद रिक्त हैं और वहां महिला जजों की भागीदारी 45 प्रतिशत है—जो देश में सबसे अधिक मानी गई।

सामाजिक प्रतिनिधित्व की बात करें तो रिपोर्ट में बताया गया कि जिला अदालतों में अनुसूचित जनजाति (ST) समुदाय के केवल 5 प्रतिशत और अनुसूचित जाति (SC) समुदाय के 14 प्रतिशत जज हैं। वर्ष 2018 से अब तक नियुक्त किए गए 698 उच्च न्यायालयों के जजों में से केवल 37 SC और ST समुदाय से हैं। पिछड़ा वर्ग (OBC) का प्रतिनिधित्व 25.6 प्रतिशत रहा।

न्यायिक खर्च और संसाधनों की स्थिति

रिपोर्ट के अनुसार, देश में प्रति व्यक्ति कानूनी सहायता पर खर्च महज ₹6.46 है, जबकि न्यायपालिका पर कुल प्रति व्यक्ति खर्च ₹182 है। किसी भी राज्य का न्यायपालिका पर खर्च उसके कुल वार्षिक बजट का 1 प्रतिशत से अधिक नहीं है।

दिल्ली न्यायपालिका का प्रदर्शन

दिल्ली के जिला न्यायालयों में वर्ष 2024 में एक जज पर औसतन 2,023 मामले थे, जो 2017 में 1,551 थे। हालांकि यह राष्ट्रीय औसत (2,200) से कम है, फिर भी दिल्ली की केस क्लियरेंस रेट (CCR) 2024 में मात्र 78 प्रतिशत रही—जो देश में सबसे कम दरों में से एक है। 2017 से 2024 के बीच दिल्ली केवल एक बार—वर्ष 2023 में—100 प्रतिशत CCR हासिल कर पाई है।

रिपोर्ट का उद्देश्य और प्रकाशन

इंडिया जस्टिस रिपोर्ट की शुरुआत टाटा ट्रस्ट्स ने 2019 में की थी। इसका चौथा संस्करण सेंटर फॉर सोशल जस्टिस, कॉमन कॉज़, कॉमनवेल्थ ह्यूमन राइट्स इनिशिएटिव, DAKSH, टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज–प्रयास, विधि सेंटर फॉर लीगल पॉलिसी और हाउ इंडिया लाइव्स जैसे संस्थानों के सहयोग से तैयार किया गया है। रिपोर्ट का उद्देश्य न्यायिक प्रणाली में संरचनात्मक बदलाव की आवश्यकता को रेखांकित करना और तत्काल रिक्तियों की पूर्ति व समावेशिता बढ़ाने की सिफारिश करना है।

राज्य
View More

Shorts see more

बारिश के मौसम में ग्लोइंग स्किन चाहिए? अपनाएं ब्लू स्किन केयर का ये वायरल ब्यूटी ट्रेंड

बारिश के मौसम में ग्लोइंग स्किन चाहिए? अपनाएं ब्लू स्किन केयर का ये वायरल ब्यूटी ट्रेंड

  • मानसून में स्किन चिपचिपी और पिंपल्स वाली हो जाती है
  • ब्लू स्किन केयर से ठंडक और हाइड्रेशन मिलता है
  • #BlueSkincare ट्रेंड युवाओं में वायरल है
read more

ताजा खबरें
View More

अगर अमेरिका ने तेहरान पर हवाई हमला किया तो ईरान का अगला कदम क्या होगा? खामेनेई की रणनीति उजागर, ट्रंप के लिए बढ़ सकती हैं मुश्किलें
अगर अमेरिका ने तेहरान पर हवाई हमला किया तो ईरान का अगला कदम क्या होगा? खामेनेई की रणनीति उजागर, ट्रंप के लिए बढ़ सकती हैं मुश्किलें
अमेरिका में खामेनेई शासन के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान बड़ा हादसा, भीड़ में घुसा ट्रक, इलाके में अफरा-तफरी
अमेरिका में खामेनेई शासन के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान बड़ा हादसा, भीड़ में घुसा ट्रक, इलाके में अफरा-तफरी
ISRO का ‘अन्वेषा’ सैटेलाइट मिशन, PS3 स्टेज की तकनीकी खामी से अभियान प्रभावित
ISRO का ‘अन्वेषा’ सैटेलाइट मिशन, PS3 स्टेज की तकनीकी खामी से अभियान प्रभावित
‘हिंदू धर्म महान है, जबकि हिंदुत्व विवादास्पद’—मणिशंकर अय्यर के बयान पर बीजेपी का कड़ा जवाब
‘हिंदू धर्म महान है, जबकि हिंदुत्व विवादास्पद’—मणिशंकर अय्यर के बयान पर बीजेपी का कड़ा जवाब
‘गीदड़भभकी से नहीं डरते’, संजय राउत के ‘10 मिनट में मुंबई बंद’ वाले बयान पर देवेंद्र फडणवीस का कड़ा पलटवार
‘गीदड़भभकी से नहीं डरते’, संजय राउत के ‘10 मिनट में मुंबई बंद’ वाले बयान पर देवेंद्र फडणवीस का कड़ा पलटवार
जम्मू-कश्मीर में 150 से अधिक आतंकियों की घुसपैठ की कोशिश, सुरक्षाबलों को हाई अलर्ट पर रखा गया
जम्मू-कश्मीर में 150 से अधिक आतंकियों की घुसपैठ की कोशिश, सुरक्षाबलों को हाई अलर्ट पर रखा गया
मोबाइल और इंटरनेट से दूरी क्यों बनाए रखते हैं NSA अजीत डोभाल? खुद बताया चौंकाने वाला कारण
मोबाइल और इंटरनेट से दूरी क्यों बनाए रखते हैं NSA अजीत डोभाल? खुद बताया चौंकाने वाला कारण
'धुरंधर' की सारा अर्जुन ने दिखाया ग्लैमरस अंदाज, बैकलेस ड्रेस में फ्लॉन्ट किया किलर लुक, फैंस बोले – Gen Z की दीपिका
'धुरंधर' की सारा अर्जुन ने दिखाया ग्लैमरस अंदाज, बैकलेस ड्रेस में फ्लॉन्ट किया किलर लुक, फैंस बोले – Gen Z की दीपिका
तेलंगाना में बच्चों के सिरप में मिला केमिकल इथाइलीन ग्लाइकॉल, जानें कितना खतरनाक है यह
तेलंगाना में बच्चों के सिरप में मिला केमिकल इथाइलीन ग्लाइकॉल, जानें कितना खतरनाक है यह
शरीर पर अचानक क्यों उभरने लगते हैं कई तिल? जानिए इसके पीछे की वजहें
शरीर पर अचानक क्यों उभरने लगते हैं कई तिल? जानिए इसके पीछे की वजहें
मौनी अमावस्या 2026: इस दिन क्या करें और किन बातों से बचें, जानें पूरी जानकारी
मौनी अमावस्या 2026: इस दिन क्या करें और किन बातों से बचें, जानें पूरी जानकारी
पोस्टपार्टम में खुद को कैसे संतुलित रखती हैं परिणीति चोपड़ा? एक्ट्रेस ने बताया—‘हनुमान चालीसा से मिलता है सुकून’
पोस्टपार्टम में खुद को कैसे संतुलित रखती हैं परिणीति चोपड़ा? एक्ट्रेस ने बताया—‘हनुमान चालीसा से मिलता है सुकून’
कहीं आप ‘लव बॉम्बिंग’ के शिकार तो नहीं? जल्द पहचानें वरना पछताना पड़ेगा
कहीं आप ‘लव बॉम्बिंग’ के शिकार तो नहीं? जल्द पहचानें वरना पछताना पड़ेगा
युवाओं में उभरता ‘फिक्टोसेक्सुअलिटी’ ट्रेंड, असली रिश्तों से ज्यादा पसंद आ रहे काल्पनिक किरदार
युवाओं में उभरता ‘फिक्टोसेक्सुअलिटी’ ट्रेंड, असली रिश्तों से ज्यादा पसंद आ रहे काल्पनिक किरदार