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Navratri 2022 : पश्चिम बंगाल में हैं तो जरूर करें मां काली के इन 7 मंदिरों के दर्शन

देशभर में मातारानी के कई मंदिर हैं जहां नवरात्रि के त्यौहार की रौनक देखी जा सकती हैं और भक्तों का जमावड़ा भी। भक्त आस्था दिखाते हुए मातारानी के मंदिरों में पहुंचते हैं। दुर्गा पूजा का यह पर्व देखने का असली मजा पश्चिम बंगाल और यहां की राजधानी कोलकाता में हैं

Posts by : Ankur Mundra | Updated on: Tue, 04 Oct 2022 12:35:02

Navratri 2022 : पश्चिम बंगाल में हैं तो जरूर करें मां काली के इन 7 मंदिरों के दर्शन

देशभर में मातारानी के कई मंदिर हैं जहां नवरात्रि के त्यौहार की रौनक देखी जा सकती हैं और भक्तों का जमावड़ा भी। भक्त आस्था दिखाते हुए मातारानी के मंदिरों में पहुंचते हैं। दुर्गा पूजा का यह पर्व देखने का असली मजा पश्चिम बंगाल और यहां की राजधानी कोलकाता में हैं जहां एक से बढ़कर एक भव्य पंडाल सजते हैं। धार्मिक मान्यताओं की बात करें, तो कोलकाता मां काली का निवास स्थान माना जाता है। इसी कारण इस शहर का नाम कोलकाता पड़ा। अगर आप नवरात्रि के पर्व का आनंद लेने पश्चिम बंगाल आए हैं, तो आज हम आपको मां काली के कुछ प्रसिद्द मंदिरों के बारे में बताने जा रहे हैं जिनके दर्शन भी जरूर करें।

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दक्षिणेश्वर काली मंदिर

हुगली नदी के तट पर स्थित दक्षिणेश्वर काली मंदिर 51 शक्तिपीठों में से एक मंदिर है। यहां लोग दूर-दूर से दर्शन करने के लिये आते हैं। भक्तों के लिये यह स्थान किसी सिद्ध स्थान से कम नहीं है। दक्षिणेश्वर काली मंदिर की गणना भारत के महानतम देवी तीर्थों में कि जाती है। काली माता का यह मंदिर दो मंजिला है जो कि नौ गुंबदों पर खड़ा है। इन गुंबदों पर खड़े लगभग सौ फीट ऊंचे मंदिर के गर्भगृह में मां काली की सुंदर मूर्ति स्थापित है और यहां काली मां की मूर्ति लेटे हुए भगवान शिव की छाती पर खड़ी है। कहते हैं कि दक्षिणेश्वर काली मंदिर में रामकृष्ण परमहंस को दक्षिणेश्वर काली ने दर्शन दिया था। दक्षिणेश्वर काली मंदिर से लगा हुआ परमहंस देव का कमरा है, जिसमें उनका पलंग तथा दूसरे स्मृतिचिह्न सुरक्षित हैं। दक्षिणेश्वर काली मंदिर के बाहर परमहंस की धर्मपत्नी श्रीशारदा माता तथा रानी रासमणि का समाधि मंदिर है और वह वट वृक्ष है, जिसके नीचे परमहंस देव ध्यान किया करते थे।

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सर्वमंगला मंदिर

पश्चिम बंगाल में बर्दवान की मां सर्वमंगला भगवती के मंदिरका एक विशिष्ट स्थान है। बर्दवान के डी.एन. सरकार रोड पर स्थित मां का यह मंदिर और इसके शिखर इतने विशाल हैं, जो दूर से ही नजर आते हैं। इस मंदिर की बाह्य व आंतरिक संरचना कोलकाता केप्रसिद्ध दक्षिणेश्वर मंदिर जैसी है। इस मंदिर के निर्माण में टेराकोटा कला शैली का अभिनव प्रयोग देखने लायक है। इसके शिखर पर की गई मीनाकारी बहुत आकर्षक व मनभावन है। मंदिर के गर्भगृह में ऊंचे पाठपीठ पर शस्त्रों से सुसज्जित अठारह भुजाओं वाली माता की अष्टधातु से बनी मूर्ति स्थापित है, जो शेर पर सवार हैं। माता की यह मूर्ति हजार वर्ष से ज्यादा पुरानी बताई जाती है। सर्वमंगला मंदिर से राजा से लेकर आम जनता की आस्था जुड़ी हुई है और बर्दवान आने वाले ढेरों लोग यहां माता का दर्शन अवश्य करते हैं। इस मंदिर में भगवती के साथ-साथ गणेशजी, भगवान शिवशंकर, भैरवनाथ, मां अन्नपूर्णा, हनुमान जी की भी प्रतिमाएं हैं और बड़े बगीचे के साथ अतिथि निवास भी है।

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कालीघाट मंदिर

कोलकाता में काली मां का सिद्ध मंदिर कालीघाट भी है। इस मंदिर में काली मां की प्रतिमा का मुख काले पत्थरों से बना हुआ है। काली मां की जीभ, हाथ और दांत सोने से मढ़े हुए हैं। यह जगह काली मां के भक्तों के लिए सबसे बड़ा मंदिर है। 200 साल पुराने इस मंदिर की खास परंपरा है की यहां हर रोज रात 12 बजे के बाद मंदिर का कपाट बंद कर दिया जाता है और सुबह ठीक 4 बजे मंगल आरती के वक्त कपाट दोबारा खोल दिया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के कारण देवी को स्नान कराते समय प्रधान पुरोहित की आंखों पर पट्टी बांध दी जाती है। यह मंदिर अघोर क्रियाओं और तंत्र-मंत्र के लिए प्रसिद्ध है। नवरात्र की महाअष्टमी के दिन मंदिर में पशु बलि की परंपरा है।

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चाइनीज काली मंदिर

कोलकाता के टांगरा में एक 60 साल पुराना चाइनीज काली मंदिर है। इस मंदिर की एक ख़ास बात ये है कि दुर्गा पूजा के दौरान प्रवासी चीनी लोग इस मंदिर में दर्शन करने आते हैं। यहाँ आने वालों में ज्यादातर लोग या तो बौद्ध हैं या फिर ईसाई। एक बात और है जो इस मंदिर को खास बनाती है वो ये है कि इस मंदिर के मुख्य पुजारी बंगाली ब्राह्मण होते हैं । इस मंदिर की एक दिलचस्प बात ये भी है कि यहां आने वाले मां के भक्तों को प्रशाद में नूडल्स, चावल और सब्जियों से बनी करी परोसी जाती है।

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त्रिपुरा सुंदरी मंदिर

पश्चिम बंगाल के प्रसिद्ध मंदिरों में से एक मंदिर है। यह हिंदू मंदिर पश्चिम बंगाल के गरिया इलाके में काफी मान्यता वाला मंदिर माना जाता है। त्रिपुरा के गोमती जिले के प्राचीन उदयपुर शहर में स्थित त्रिपुर सुंदरी मंदिर हिंदुओं के 51 शक्तिपीठों में से एक माना जाता है और इसे पूर्वोत्तर भारत के महत्वपूर्ण स्थानों में गिना जाता है। हिन्दू ग्रंथों में इस स्थान का वर्णन एक ऐसे क्षेत्र के रूप में किया गया है, जहाँ माता सती का दाहिना पैर गिरा था। इस क्षेत्र को माताबाड़ी क्षेत्र के नाम से भी जाना जाता है और यह एक पहाड़ी के ऊपर स्थित है। यहाँ माँ भगवती को त्रिपुर सुंदरी और उनके साथ विराजमान भैरव को त्रिपुरेश के नाम से जाना जाता है। इस मंदिर के दर्शन करने के लिए भारी संख्या में कई पर्यटक और स्थानीय लोगों आते हैं। यह पश्चिम बंगाल में प्रसिद्ध देवी मंदिरों में से एक है।

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रामपारा कालीबाड़ी मंदिर

पश्चिम बंगाल के प्रसिद्ध मंदिर में से एक रामपारा कालीबाड़ी मंदिर भी है, यह कोलकाता से लगभग 35 किलोमीटर दूरी पर स्थित है। मान्यतानुसार, इस मंदिर में मां सिद्धेश्वरी काली भगवान शिव के स्त्री रूप में स्थापित हैं। यह प्राचीन मंदिर रामपारा के नंदी परिवार द्वारा बनाया गया था जो काली मां के परम भक्त थे। रामपारा कालीबाड़ी अपनी काली पूजा के लिए भी प्रसिद्ध है जो हर साल दिवाली के दौरान अक्टूबर और नवंबर के महीने में आयोजित की जाती है। इस पूजा के दौरान बड़ी संख्या में भक्त इस मंदिर में आते हैं।

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कृपामयी काली मंदिर

कृपामयी काली मंदिर, पश्चिम बंगाल के 24 परगना जिले के बारानगर (ग्रेटर कोलकाता) में हुगली नदी के पूर्वी तट पर स्थित है। यह मंदिर 1848 में जयराम मित्रा द्वारा बनाया गया था, जो एक प्रसिद्ध जमींदार और काली मां के भक्त थे। माना जाता है कि यहां मां काली एक अपने क्रोधी स्वभाव के विपरीत कृपामयी रूप में विराजती हैं और भक्तों पर अपनी कृपा बरसाती हैं। यह भी पश्चिम बंगाल में बने प्राचीन काली मंदिरों में से एक है।

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