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करतारपुर साहिब: सिखों के अलावा कौन-कौन जा सकता है और कितनी देनी पड़ती है फीस?; पूरी जानकारी

भारत में सिख धर्म का इतिहास अत्यंत समृद्ध और महत्वपूर्ण है। सिख धर्म के धार्मिक स्थल न केवल सिखों के लिए बल्कि अन्य समुदायों के लिए भी आस्था और श्रद्धा का केंद्र हैं।

Posts by : Nupur Rawat | Updated on: Tue, 21 Jan 2025 12:24:24

करतारपुर साहिब: सिखों के अलावा कौन-कौन जा सकता है और कितनी देनी पड़ती है फीस?; पूरी जानकारी

भारत में सिख धर्म का इतिहास अत्यंत समृद्ध और महत्वपूर्ण है। सिख धर्म के धार्मिक स्थल न केवल सिखों के लिए बल्कि अन्य समुदायों के लिए भी आस्था और श्रद्धा का केंद्र हैं। इन धार्मिक स्थलों में कुछ खास गुरुद्वारे हैं जो विशेष रूप से प्रमुख हैं, जैसे कि पांच तख्त, जिनमें सबसे प्रमुख है श्री अकाल तख्त साहिब जो अमृतसर में स्थित है। इसके अलावा, पंजाब के विभिन्न हिस्सों में तख्त श्री केशगढ़ साहिब, तख्त श्री दमदमा साहिब, तख्त श्री पटना साहिब और तख्त श्री हजूर साहिब भी स्थित हैं। इन गुरुद्वारों के अलावा एक और अत्यंत पवित्र स्थल है करतारपुर साहिब, जो पाकिस्तान में स्थित है।

करतारपुर साहिब का ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व

करतारपुर साहिब गुरुद्वारा सिखों के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण है क्योंकि यह वह स्थान है जहां गुरु नानक देव जी ने अपने जीवन के अंतिम वर्ष बिताए थे। यह स्थान पंजाब के नरोवाल जिले में स्थित है, जो पाकिस्तान में है। करतारपुर साहिब सिख धर्म के अनुयायियों के लिए एक अत्यंत पवित्र स्थान है, और यहां हर साल लाखों श्रद्धालु दर्शन के लिए आते हैं। 1999 में भारत और पाकिस्तान के बीच करतारपुर कॉरिडोर की योजना का शुभारंभ हुआ था, जो भारत के पंजाब के गुरदासपुर जिले से पाकिस्तान के करतारपुर साहिब तक सीधा मार्ग प्रदान करता है।

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क्या केवल सिख ही जा सकते हैं?

अक्सर श्रद्धालुओं के मन में यह सवाल उठता है कि क्या केवल सिख धर्म के अनुयायी ही करतारपुर साहिब जा सकते हैं या अन्य धर्म के लोग भी वहां जा सकते हैं। इस सवाल का उत्तर है कि, करतारपुर साहिब में किसी भी धर्म के अनुयायी के प्रवेश पर कोई पाबंदी नहीं है। सिख धर्म की एक महत्वपूर्ण विशेषता है कि यहां सभी धर्मों के लोगों के लिए समान सम्मान और आस्था का वातावरण है।

गुरुद्वारे में किसी भी धर्म का व्यक्ति आ सकता है और यहां चलने वाले लंगर (समुदाय रसोई) में भोजन भी कर सकता है। इसके अलावा, हिन्दू, मुस्लिम, जैन, पारसी, ईसाई और अन्य धर्मों के लोग भी यहां श्रद्धा भाव से दर्शन करने के लिए आ सकते हैं। इसका उद्देश्य केवल धार्मिक एकता और मानवता को बढ़ावा देना है, जिससे सभी धर्मों के लोग एक साथ आकर इस पवित्र स्थान की महिमा का अनुभव कर सकें।

करतारपुर साहिब जाने के लिए फीस

करतारपुर साहिब पाकिस्तान में स्थित होने के कारण, यह दोनों देशों - भारत और पाकिस्तान के संयुक्त प्रबंधन में है। पाकिस्तान सरकार द्वारा इस पवित्र स्थल तक पहुंचने के लिए एक विशेष मार्ग, जिसे करतारपुर कॉरिडोर कहा जाता है, बनाया गया है। इस कॉरिडोर के माध्यम से भारतीय श्रद्धालु बिना वीजा के पाकिस्तान में प्रवेश कर सकते हैं। हालांकि, इस यात्रा के लिए एक निश्चित शुल्क भी लिया जाता है।

भारत से करतारपुर साहिब जाने के लिए 20 डॉलर की फीस चुकानी होती है, जो पाकिस्तान सरकार द्वारा तय की गई है। यदि वर्तमान में 1 डॉलर का मूल्य 86.50 रुपये के आसपास है, तो भारतीय श्रद्धालुओं को लगभग 1700 रुपये की फीस चुकानी पड़ती है। यह फीस यात्रा की व्यवस्था और सुरक्षा के लिए ली जाती है। फीस का भुगतान ऑनलाइन किया जा सकता है, और यात्रा के लिए पंजीकरण भी आवश्यक होता है।

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करतारपुर साहिब जाने के नियम और सुविधाएं

पंजीकरण और वीजा: भारतीय श्रद्धालु करतारपुर साहिब जाने के लिए पहले ऑनलाइन पंजीकरण कराना होता है। पंजीकरण के बाद ही वे अपनी यात्रा पर जा सकते हैं। यह पंजीकरण भारत सरकार की वेबसाइट पर किया जा सकता है।

सुरक्षा: करतारपुर कॉरिडोर के रास्ते पर सुरक्षा का ध्यान रखा जाता है, ताकि श्रद्धालु पूरी तरह से सुरक्षित यात्रा कर सकें। इस मार्ग पर पाकिस्तानी और भारतीय सुरक्षा बलों की मौजूदगी रहती है।

यात्रा के समय की अवधि: भारतीय श्रद्धालु को एक दिन के लिए करतारपुर साहिब जाने की अनुमति होती है। इसमें वे पूरे दिन वहां रह सकते हैं, लेकिन वापसी का समय नियत होता है।

भोजन और लंगर: करतारपुर साहिब में सभी धर्मों के लोग लंगर (समुदाय रसोई) में भोजन कर सकते हैं। यह सेवा पूरी तरह से मुफ्त होती है और श्रद्धालुओं को यहां आकर सेवाएं दी जाती हैं।

स्वास्थ्य और चिकित्सा सुविधाएं: यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं को कोई स्वास्थ्य समस्या होने पर पाकिस्तान सरकार की तरफ से मेडिकल सुविधाएं उपलब्ध कराई जाती हैं।

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