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स्तन कैंसर से बचाव के लिए समय पर जाँच है जरूरी? जानें कौन-कौन से टेस्ट किए जाते हैं

स्तन कैंसर तब होता है जब स्तन की कोशिकाएँ असामान्य रूप से बढ़ने लगती हैं। यह वृद्धि आमतौर पर दूध नलिकाओं या दूध बनाने वाले लोब्यूल्स में शुरू होती है।

Posts by : Varsha Singh | Updated on: Mon, 10 Feb 2025 12:14:45

स्तन कैंसर से बचाव के लिए समय पर जाँच है जरूरी? जानें कौन-कौन से टेस्ट किए जाते हैं

स्तन कैंसर महिलाओं में सबसे आम कैंसर है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, 2022 में 2.3 मिलियन महिलाओं में स्तन कैंसर का निदान किया गया था, और इसके कारण वैश्विक स्तर पर 6,70,000 मौतें हुई थीं। लगभग 99% मामलों में स्तन कैंसर महिलाओं में होता है, जबकि पुरुषों में इसकी संभावना 0.5-1% होती है।

स्तन कैंसर तब होता है जब स्तन की कोशिकाएँ असामान्य रूप से बढ़ने लगती हैं। यह वृद्धि आमतौर पर दूध नलिकाओं या दूध बनाने वाले लोब्यूल्स में शुरू होती है। यदि इसका समय पर इलाज न किया जाए, तो यह ट्यूमर का रूप ले सकता है और शरीर के अन्य हिस्सों में फैल सकता है, जिससे यह घातक हो सकता है।

हालांकि, यदि स्तन कैंसर का शुरुआती चरण में पता चल जाए, तो उपचार की सफलता दर काफी बढ़ जाती है। इसलिए, समय-समय पर जाँच करवाना बेहद ज़रूरी है, ताकि शुरुआती अवस्था में ही इसका निदान किया जा सके। आइए जानते हैं, स्तन कैंसर का पता लगाने के लिए कौन-कौन से टेस्ट किए जाते हैं।

स्तन कैंसर से बचाव के लिए समय पर जाँच है जरूरी? जानें कौन-कौन से टेस्ट किए जाते हैं

स्तन कैंसर का पता लगाने के लिए कौन सा टेस्ट किया जाता है

स्तन कैंसर का शीघ्र पता लगाने के लिए कई प्रकार के टेस्ट किए जाते हैं, जो शुरुआती चरण में निदान और उपचार में सहायक होते हैं। पहला तरीका है खुद से पहचान (Breast Self-Examination - BSE), जिसमें महिलाएँ अपने स्तनों में होने वाले किसी भी बदलाव जैसे गांठ, असामान्य डिस्चार्ज, या त्वचा में सिकुड़न की जाँच स्वयं कर सकती हैं। इसे मासिक धर्म समाप्त होने के 3 से 5 दिन बाद करना सबसे उपयुक्त होता है। हालाँकि, यह कोई चिकित्सा परीक्षण नहीं है, लेकिन शुरुआती पहचान के लिए उपयोगी हो सकता है।

स्तन कैंसर से बचाव के लिए समय पर जाँच है जरूरी? जानें कौन-कौन से टेस्ट किए जाते हैं

मैमोग्राफी (Mammography):

मैमोग्राफी (Mammography) एक महत्वपूर्ण स्क्रीनिंग टेस्ट है, जो विशेष एक्स-रे तकनीक के माध्यम से स्तन टिशू में असामान्य परिवर्तनों की जाँच करता है। यह शुरुआती अवस्था में स्तन कैंसर का पता लगाने का सबसे प्रभावी तरीका माना जाता है। 40 वर्ष से अधिक उम्र की महिलाओं को नियमित रूप से मैमोग्राफी करवानी चाहिए, विशेष रूप से यदि परिवार में स्तन कैंसर का इतिहास रहा हो। इस परीक्षण में स्तन को एक विशेष मशीन के बीच रखकर उसकी स्पष्ट छवि ली जाती है, जिससे माइक्रोकैल्सीफिकेशन और ट्यूमर का पता लगाया जा सकता है।

स्तन कैंसर से बचाव के लिए समय पर जाँच है जरूरी? जानें कौन-कौन से टेस्ट किए जाते हैं

स्तन अल्ट्रासाउंड (Breast Ultrasound)

स्तन अल्ट्रासाउंड (Breast Ultrasound) उच्च-आवृत्ति वाली ध्वनि तरंगों का उपयोग करता है, जो स्तन के अंदरूनी टिशू और संरचना को दिखाने में मदद करता है। जब मैमोग्राफी में कोई संदिग्ध गांठ दिखाई देती है, तो डॉक्टर अक्सर इस परीक्षण की सलाह देते हैं। यह गर्भवती महिलाओं या युवा महिलाओं के लिए अधिक उपयुक्त होता है, क्योंकि उनकी त्वचा अधिक घनी होती है। यह टेस्ट ठोस गांठ और तरल से भरे सिस्ट के बीच अंतर बताने में सहायक होता है।

स्तन कैंसर से बचाव के लिए समय पर जाँच है जरूरी? जानें कौन-कौन से टेस्ट किए जाते हैं

मैग्नेटिक रेजोनेंस इमेजिंग (MRI - Magnetic Resonance Imaging)

मैग्नेटिक रेजोनेंस इमेजिंग (MRI - Magnetic Resonance Imaging) एक उन्नत इमेजिंग तकनीक है, जिसमें चुंबकीय और रेडियो तरंगों की सहायता से स्तन की विस्तृत छवियाँ प्राप्त की जाती हैं। जिन महिलाओं को स्तन कैंसर होने का अधिक खतरा होता है, जैसे कि पारिवारिक इतिहास या आनुवंशिक परिवर्तन (BRCA1 या BRCA2 जीन म्यूटेशन), उनके लिए यह टेस्ट फायदेमंद होता है। इसके अलावा, यदि मैमोग्राफी और अल्ट्रासाउंड से स्पष्ट परिणाम नहीं मिलते, तो डॉक्टर एमआरआई की सलाह देते हैं। यह उन छोटे ट्यूमर का भी पता लगाने में मदद करता है, जो अन्य स्क्रीनिंग टेस्ट से नहीं दिखते।

स्तन कैंसर से बचाव के लिए समय पर जाँच है जरूरी? जानें कौन-कौन से टेस्ट किए जाते हैं

बायोप्सी (Biopsy)

बायोप्सी (Biopsy) स्तन कैंसर की पुष्टि करने का सबसे सटीक तरीका है। इसमें स्तन के टिशू का एक छोटा सा नमूना निकालकर माइक्रोस्कोप के नीचे जाँच की जाती है। जब अन्य इमेजिंग टेस्ट में कोई असामान्य गांठ दिखाई देती है, तब डॉक्टर बायोप्सी करने की सलाह देते हैं। इसके विभिन्न प्रकार होते हैं, जैसे फाइन नीडल एस्पिरेशन बायोप्सी (FNAC), कोर नीडल बायोप्सी, और सर्जिकल बायोप्सी। यह परीक्षण यह निर्धारित करने में मदद करता है कि गांठ कैंसरग्रस्त है या नहीं, और यदि है, तो किस प्रकार की है और कितनी तेजी से फैल रही है।

इन सभी परीक्षणों का उद्देश्य स्तन कैंसर का शीघ्र और सटीक निदान करना है, ताकि समय पर उपचार शुरू किया जा सके। नियमित जाँच और सही समय पर चिकित्सकीय परामर्श लेने से स्तन कैंसर का खतरा कम किया जा सकता है और जीवन बचाया जा सकता है।

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