कोरोना के बाद जीका वायरस, जानिए इससे जुड़े हर सवाल का जवाब

By: Pinki Tue, 13 July 2021 10:36 AM

कोरोना के बाद जीका वायरस, जानिए इससे जुड़े हर सवाल का जवाब

कोरोना संकट के बीच केरल में अब जीका वायरस का खतरा बढ़ रहा है। एक दिन पहले यहां, 73 साल की एक महिला की जांच में जीका वायरस की पुष्टि हुई जिसके बाद राज्य में संक्रमण के कुल मामले बढ़कर 19 हो गया है। इनमें 24 साल की गर्भवती महिला भी शामिल है। रविवार को 22 महीने का एक बच्चा जीका वायरस से संक्रमित (zika virus in kerala) मिला है।

पिछले कुछ सालों से दुनिया के कई देशों में बेहद छोटे सिर और अविकसित मस्तिष्क वाले बच्चे जन्म ले चुके हैं। यह जीका वायरस की वजह से ही है। केरल के सभी जिलों में मच्छरों से बचने के लिए फॉगिंग और अस्पतालों में खास जांचें शुरू कर दी गई हैं। दरअसल जीका वायरस मच्‍छर के काटने से फैलता है। जीका वायरस साल 1947 में यूगांडा के जीका जंगल में रहने वाले बंदरों में सबसे पहले ये वायरस पाया गया था। मगर सन् 1952 में इसे औपचारिक रूप से एक खास वायरस माना गया। ये वायरस मुख्‍यत: इनफेक्‍टेड एडीज मच्छर के काटने से मनुष्यों में फैलता है। ऐसे में जब यह वायरस इतना खतरनाक है तो इसके बारे में भी जानना बेहद जरुरी है और इससे कैसे बचा जा सकता है

तो ऐसे जीका वायरस से जुड़े कुछ जरुरी सवालों के जवाबों के बारे में आज हम जानते है

जीका वायरस क्या है?

जीका फ्लेविवाइरिडे फैमिली का एक वायरस है। जीका एडीज प्रजाति के मच्छरों के काटने से फैलता है। एडीज मच्छर से ही डेंगू, चिकनगुनिया और येलो फीवर भी फैलता है। जीका वायरस गर्भवती महिला से उसके बच्‍चे में गर्भवास्था के दौरान फैल सकता है और इसके कारण बच्चा अविकसित दिमाग के साथ पैदा हो सकता है। ब्राजील में करीब 1600 बच्‍चे साल 2015 में कई विकारों के साथ पैदा हुए थे। जीका वायरस साल 1947 में यूगांडा के जीका जंगल में रहने वाले बंदरों में सबसे पहले ये वायरस पाया गया था। जिसके बाद इस वायरस का नाम जीका वायरस रखा गया। 1952 में युगांडा और तंजानिया में यह पहली बार इंसानों में पाया गया। 2007 में फेडरेटेड स्टेट्स ऑफ माइक्रोनेशिया के आइलैंड यप में जीका वायरस पहली बार फैला। इसके बाद 2013 में जीका वायरस बड़े स्तर पर फ्रेंच पॉलीनेशिया और उसके आसपास छोटे-छोटे देशों में फैला था।

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मच्छरों के अलावा किसी और तरह से भी फैलता है जीका वायरस?

हां, मच्छरों के अलावा यौन संबंधों से भी जीका वायरस एक से दूसरे व्यक्ति में जा सकता है। वहीं यह गर्भवती महिला के गर्भ में पल रहे बच्चे को भी संक्रमित कर सकता है। इसके अलावा अमेरिका के सेंटर्स फॉर डिजीज कंट्रोल (CDC) का कहना है कि जीका वायरस खून चढ़ाने से भी फैल सकता है, हालांकि, इसके बारे में अभी 100% नहीं कहा जाता है।

क्यों खतरनाक है जीका वायरस?

जीका वायरस को माइक्रोसेफली के चलते ज्यादा खतरनाक माना जाता है। गर्भवती महिलाओं के जीका वायरस से संक्रमित होने पर यह वायरस उनके गर्भस्थ शिशु में चला जाता है। इससे शिशु गर्भ में ही माइक्रोसेफली का शिकार हो जाता है। इस जन्मजात विकार के शिकार बच्चे का सिर दूसरे बच्चों के मुकाबले काफी छोटा होता है और ठीक से विकसित नहीं हो पाता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन का कहना है कि जिन देशों में जीका का प्रकोप फैला वहां गुइलेन-बैरे सिंड्रोम में भी तेजी से बढ़ोतरी हुई है। यह एक न्यूरोलॉजिकल विकार है जो लकवा और मौत का कारण बन सकता है। यूएस नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ द्वारा जारी की गई एक स्टडी में कहा गया है कि गुइलेन-बैरे सिंड्रोम के शिकार लोगों में मृत्युदर 8.3% थी।

जीका वायरस के लक्षण क्या हैं?

जीका वायरस से संक्रमित बहुत से लोगों में कोई लक्षण दिखाई नहीं देते हैं। कुछ लोगों को बेहद हल्के लक्षण होते हैं। जीका वायरस के लक्षण भी डेंगू और वायरल की तरह ही हैं जैसे कि बुखार, जोड़ों का दर्द, शरीर पर लाल चकत्ते, थकान, सिर दर्द और आंखों का लाल होना। हालांकि, इस वायरस का आरएनए अलग तरह का होता है। संक्रमित होने पर जीका वायरस आमतौर पर एक हफ्ते तक संक्रमित व्यक्ति के खून में रहता है। आमतौर पर संक्रमित मच्छर के काटने के 3 से 14 दिन बाद इसके लक्षण दिखने शुरू होते हैं। इससे संक्रमित व्यक्ति इतना बीमार नहीं पड़ते कि उन्हें अस्पताल में भर्ती करना पड़े। जीका वायरस से मृत्यु की आशंका काफी कम होती है। इसी कारण से बहुत लोगों को जीका वायरस से संक्रमित होने का पता ही नहीं चलता। जीका वायरस के लक्षण मच्छरों से काटने से होने वाली दूसरी बीमारियों जैसे ही होते है। जैसे डेंगू और चिकनगुनिया।

डॉक्टर को दिखाना कब जरूरी है?

अगर आपमें जीका वायरस के लक्षण हों और आप जीका के जोखिम वाले इलाकों में गए हों। यदि आप गर्भवती हैं तो डॉक्टरों को दिखाना बहुत जरुरी है। ऐसे में डॉक्टर को अपनी ट्रेवल हिस्ट्री के बारे में जरुर बताए।

क्या इसके लिए कोई वैक्सीन है?

वर्तमान में जीका वायरस संक्रमण का इलाज या रोकथाम करने के लिए कोई वैक्सीन नहीं है। वायरस के फैलाव को काबू करने का एक ही तरीका मच्छर के काटने को रोकना है। दूसरे एहतियाती उपायों में उचित कपड़े पहनना शामिल है। अंदर और बाहर मच्छर को काबू करने के लिए मच्छर को पानी के नजदीक अंडे देने से रोकना है। उष्णकटिबंधीय क्षेत्र मच्छर के प्रजनन के लिए उचित तापमान उपलब्ध कराता है।

जीका वायरस से कैसे बचा जा सकता?

- मच्छरों से बचने के लिए फुल आस्तीन की शर्ट और पैंट पहनें।
- ऐसी जगहों पर रहें जहां AC हो और खिड़की, दरवाजों और रोशनदान में जाली लगी हो।
- घर के भीतर मच्छरों से बचने के लिए तरीकों को अपनाएं। जैसे कहीं भी पानी भरा न रहने दें।
- गर्भवती महिलाओं और नवजातों को दूध पिलाने वाली महिलाओं के लिए सुरक्षित मॉस्किटो रैपलेंट (mosquito repellents) का इस्तेमाल करें।
- दो महीने से कम उम्र के नवजातों और बच्चों के लिए रैपलेंट्स का इस्तेमाल न करें।
- छोटे बच्चों के लिए मच्छरदानी का इस्तेमाल करें।
- अगर कमरे में एसी और जालीदार खिड़की-दरवाजे या रोशनदान न हों तो मच्छरदानी लगाकर ही सोएं।
- किसी भी ऐसी जगह यात्रा न करें जहां जीका वायरस के केस मिल रहे हों।

जीका वायरस होने पर क्या करे?

- जीका वायरस की सटीक दवा नहीं। इसके लक्षणों का इलाज किया जाता है।
- पूरी तरह आराम करें।
- डिहाइड्रेशन से बचने के लिए भरपूर पानी पिएं।
- बुखार और दर्द को कम करने के लिए पैरासिटामॉल ले सकते हैं।
- एस्प्रिन और कोई दूसरी नॉन स्टेरोइडल एंटी इंफ्लेमेटरी ड्रग न लें।
- अगर आप किसी और बीमारी के लिए दवा लेते हो तो डॉक्टर की सलाह से कोई दवा लें।
- मच्छरों के काटने से खुद को बचाएं।

आपकी देखभाल करने वाले और तीमारदार खुद को संक्रमण से कैसे बचाएं?

- अपने किसी बॉडी फ्लूड जैसे खून, स्लाइवा, सीमन आदि से अपने तीमारदार या परिवारवालों को बचाएं।
- असुरक्षित शारीरिक संबंध किसी से भी न बनाएं।
- खुद को और परिवारवालों को मच्छर से बचाकर रखें।
- मच्छरदानी लगाएं, खिड़की दरवाजों या रोशनदान में जाली लगवाएं।
- घर में अगर कोई गर्भवती है तो उसे मच्छरों से बचाएं और खुद से दूर रखें।
- संक्रमित के खून और दूसरे बॉडी फ्लूड्स नंगे हाथ से न छुएं।
- उन जगहों को भी बिना दस्ताने के न छुएं जहां खून या दूसरे बॉडी फ्लूड्स गिरे हों।
- देखभाल के तुरंत बाद साबुन और पानी से अच्छी तरह हाथ धोएं।
- अगर आपके कपड़ों पर संक्रमित का खून या दूसरे बॉडी फ्लूड्स लग जाएं तो उन्हें फौरन उतारकर डिटरजेंट या साबुन से धो दें।
- ऐसे कपड़ों को धोने के लिए ब्लीच का इस्तेमाल जरूरी नहीं।
- जिस सतह पर संक्रमित का खून या दूसरे बॉडी फ्लूड गिरे हों, उसे तुरंत क्लीनर या डिसइन्फेक्टेंट से साफ कर दें।

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