जयपुर के प्रतिष्ठित गिरधारी महाराज कथक केंद्र में एक भव्य सांस्कृतिक संध्या आयोजित की गई, जिसमें पेरिस के त्रिवट इंटरनेशनल स्कूल से आए 18 फ्रांसीसी छात्रों का पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ स्वागत किया गया। यह सांस्कृतिक यात्रा 15 फरवरी से 2 मार्च तक जारी रहेगी, जहां छात्र गुरु-शिष्य परंपरा के तहत कथक, शास्त्रीय संगीत, योग और भारतीय पारंपरिक जीवनशैली का गहन अध्ययन कर रहे हैं। जयपुर में प्रसिद्ध कथक गुरु नमिता जैन से प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद, यह दल राजस्थान के सात प्रमुख शहरों की सांस्कृतिक यात्रा पर निकलेगा। पेरिस में, ये छात्र कथक नृत्य की शिक्षा कमल कांत और मेघा जगावत से प्राप्त करते हैं, जबकि जयपुर प्रवास के दौरान वे भारतीय सांस्कृतिक विरासत को करीब से अनुभव कर रहे हैं।
कार्यक्रम में जयपुर के प्रख्यात सितार वादक इरफ़ान मोहम्मद और तबला वादक शोएब मोहम्मद ने अपनी मनमोहक प्रस्तुतियों से संगीतमय माहौल बना दिया। संध्या की शुरुआत गिरधारी महाराज कथक केंद्र के वरिष्ठ छात्रों द्वारा प्रस्तुत भव्य शिव वंदना से हुई, जिसके बाद तीनताल में कथक का उत्कृष्ट प्रदर्शन किया गया।
मशहूर गायक रमेश मेवाल ने अपनी सुमधुर आवाज़ से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। पेरिस से आए छात्रों ने भी इस सांस्कृतिक संध्या में भाग लिया और रमेश मेवाल के मार्गदर्शन में प्रसिद्ध राजस्थानी लोकगीत "टूटे बाजूबंद री लूम" को सीखा व प्रस्तुत किया। इस लोकगीत की शानदार प्रस्तुति पूरे कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण बनी और दर्शकों की खूब सराहना मिली।
राजस्थान की सांस्कृतिक यात्रा
अब यह दल राजस्थान के सात प्रमुख शहरों की यात्रा करेगा, जहां वे स्थानीय संस्कृति, कला और परंपराओं को करीब से जानेंगे। यह पहल भारतीय कला को वैश्विक मंच पर स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जिसमें कथक केवल एक नृत्य शैली नहीं, बल्कि आत्मा से जुड़ने का माध्यम बन रहा है।
त्रिवट इंटरनेशनल स्कूल के छात्रों ने इस सांस्कृतिक यात्रा को अपने जीवन का अविस्मरणीय अनुभव बताया और भविष्य में पुनः भारत आने की इच्छा जताई। इस अनूठी पहल से भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को अंतरराष्ट्रीय पहचान मिलेगी और भारतीय कला को वैश्विक स्तर पर नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में सहायता मिलेगी।