जयपुर। राजस्थान सरकार की तरफ से विधानसभा में बुधवार को पेश किए गए राजस्थान कोचिंग सेंटर नियंत्रण और विनियमन विधेयक 2025 को लेकर संयुक्त अभिभावक संघ ने विरोध जताया है। संघ के मुताबिक यह बिल कोचिंग सेंटरों को संरक्षण देने वाला विधेयक है। संघ के प्रदेश प्रवक्ता अभिषेक जैन बिट्टू ने विधेयक पर नाराजगी जताते हुए कहा कि यह पूरी तरह से कोचिंग सेंटरों के हितों को सुरक्षित रखने के लिए बनाया गया है, जबकि इसमें बढ़ते आत्महत्या के मामलों को रोकने के लिए कोई सख्त प्रावधान नहीं किया गया है।
उन्होंने कहा कि अब तक जितनी भी आत्महत्याएं हुई हैं, उनमें सरकार, प्रशासन और कोचिंग संचालकों ने अभिभावकों को दोषी ठहराया है, लेकिन अगर अभिभावक दोषी हैं, तो उनके लिए इस विधेयक में कोई सजा का प्रावधान क्यों नहीं रखा गया ? संयुक्त अभिभावक संघ ने हालांकि फीस से जुड़े कुछ फैसलों का स्वागत किया है। इस विधेयक के तहत अब किसी भी छात्र को एक साथ पूरी फीस जमा नहीं करनी होगी, बल्कि चार किस्तों में फीस जमा करने का प्रावधान रखा गया है। इसके अलावा, अगर कोई छात्र बीच में पढ़ाई छोड़ देता है, तो उसे 10 दिनों के भीतर फीस वापस करनी होगी। लेकिन संघ ने सवाल उठाया कि कोचिंग संस्थानों की फीस का निर्धारण कैसे होगा ? सरकार ने इस पर कोई स्पष्ट दिशा-निर्देश नहीं दिया है, साथ ही फीस की सीमा क्या होगी ? कोचिंग संचालक अपने मनमाने ढंग से फीस वसूलते रहेंगे या सरकार इस पर नियंत्रण रखेगी ? संयुक्त अभिभावक संघ ने इस विधेयक को लूटने का लाइसेंस बताते हुए कहा कि अब कोचिंग सेंटर अभिभावकों को मनमाने ढंग से लूटेंगे, और सरकार व प्रशासन इन सेंटरों से धन उगाही करेगा।
विधेयक से विद्यार्थियों को कोई ठोस लाभ नहीं
संयुक्त अभिभावक संघ का आरोप है कि यह विधेयक कोचिंग संस्थानों पर दिखावटी नियंत्रण स्थापित करने के लिए लाया गया है, लेकिन इससे छात्रों की सुरक्षा और भविष्य पर कोई ठोस असर नहीं पड़ेगा। अभिषेक जैन ने कहा कि राज्य सरकार ने इस विधेयक में आत्महत्याओं को रोकने के लिए कोई विशेष व्यवस्था नहीं की है । इसके बजाय, सरकार ने केवल कोचिंग सेंटरों का पंजीकरण कराने और नियंत्रण स्थापित करने का ढोंग किया है। उन्होंने कहा कि इस विधेयक को बड़े कोचिंग संस्थानों के दबाव में तैयार किया गया है, जिससे केवल संचालकों को लाभ होगा। जैन ने कहा कि अगर किसी विद्यार्थी की आत्महत्या होती है, तो इसके लिए किसी भी आरोपी के खिलाफ सजा का कोई प्रावधान नहीं रखा गया है, जो कि सरकार की मंशा पर सवाल खड़े करता है।
संघ ने पेपर लीक की समस्या को लेकर भी सरकार पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि पहले भी कई बड़े कोचिंग सेंटरों का नाम पेपर लीक मामलों में सामने आ चुका है, लेकिन सख्त कार्रवाई के अभाव में उन पर कोई असर नहीं पड़ा।अब जब सरकार विधेयक लाई है, तो इसमें पेपर लीक में शामिल कोचिंग सेंटरों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का प्रावधान क्यों नहीं किया गया है ? संघ की मांग है कि ऐसे कोचिंग सेंटरों का पंजीकरण तत्काल रद्द किया जाए और उन पर कानूनी कार्रवाई की जाए।
डिप्टी सीएम बैरवा का बयान
राजस्थान कोचिंग सेंटर नियंत्रण विधेयक पर मीडिया से बात करते हुए डिप्टी सीएम प्रेम चंद बैरवा ने कहा कि कई सालों से अभिभावकों की ओर से छात्रों के आत्महत्या करने की शिकायतें आ रही थीं। हमारे मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने इसे गंभीरता से लिया और हम एक विधेयक लेकर आए हैं, जिसके जरिए इन कोचिंग संस्थानों पर लगाम लगाई जा सकेगी। उन्होंने कहा कि अगर इनमें कोई कमी है , तो उसकी जांच की जा सकेगी, ताकि छात्रों की मानसिक स्थिति और बौद्धिक विकास अच्छा हो सके और वह अच्छी शिक्षा प्राप्त कर सकें। बैरवा ने कहा कि इन कोचिंग संस्थानों पर कुछ नियंत्रण होना चाहिए , ताकि हमारे अभिभावकों और हमारे बच्चों का भविष्य अच्छा हो।