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सावधान! एक गलत तरबूज बन सकता है कैंसर की वजह, खरीदते वक्त ध्यान रखें ये बातें

गर्मियों में तरबूज शरीर को ठंडक और हाइड्रेशन देने वाला पसंदीदा फल है, लेकिन हाल ही में इसमें केमिकल मिलावट की खबरें सामने आ रही हैं। इथर, कार्बाइड और आर्टिफिशियल कलर से पकाए गए तरबूज कैंसर और लीवर डैमेज जैसी गंभीर बीमारियों का कारण बन सकते हैं। जानें तरबूज खरीदते समय किन बातों का ध्यान रखना जरूरी है ताकि आप और आपका परिवार सुरक्षित रहें।

Posts by : Jhanvi Gupta | Updated on: Wed, 09 Apr 2025 3:48:14

सावधान! एक गलत तरबूज बन सकता है कैंसर की वजह, खरीदते वक्त ध्यान रखें ये बातें

गर्मियों में तरबूज एक पसंदीदा और ताजगी देने वाला फल माना जाता है, जो शरीर को हाइड्रेट रखने और गर्मी से राहत दिलाने में मदद करता है। यह स्वाद में मीठा और पानी से भरपूर होता है, इसलिए लोग इसे खूब खाना पसंद करते हैं। लेकिन इन दिनों मार्केट में बिक रहे तरबूजों को लेकर कई चिंताजनक खबरें सामने आ रही हैं। बताया जा रहा है कि इन फलों को जल्दी पकाने और ज्यादा लाल दिखाने के लिए केमिकल्स का सहारा लिया जा रहा है, जो स्वास्थ्य के लिए बेहद खतरनाक साबित हो सकते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे तरबूज कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों का कारण बन सकते हैं।

तरबूज से कैसे हो सकता है कैंसर?

आजकल कुछ फल विक्रेता तरबूज को जल्दी पकाने के लिए इथर गैस, कैल्शियम कार्बाइड या अन्य हानिकारक रसायनों का इस्तेमाल कर रहे हैं। ये केमिकल्स तरबूज की सतह में आसानी से समा जाते हैं और जब हम फल को खाते हैं, तो ये शरीर में पहुंचकर कोशिकाओं को नुकसान पहुंचाते हैं, जिससे कैंसर का खतरा बढ़ता है। कार्बाइड से पके फल में एसिटिलीन गैस उत्पन्न होती है, जो एक विषैली गैस मानी जाती है। कुछ मामलों में तरबूज को ज्यादा लाल और आकर्षक दिखाने के लिए उसमें आर्टिफिशियल फूड कलर मिलाया जाता है। अगर ये कलर खाद्य ग्रेड नहीं है, तो यह न केवल पेट की समस्या बल्कि लीवर या आंतों से जुड़ी गंभीर बीमारी का कारण भी बन सकता है। इसके अलावा, अगर तरबूज को लंबे समय तक स्टोर किया गया हो या उसे गलत तरीके से रखा गया हो, तो उसमें फफूंदी लग सकती है। यह फफूंदी अफ्लाटॉक्सिन्स (Aflatoxins) नामक एक घातक टॉक्सिन उत्पन्न करती है, जिसे लीवर कैंसर का बड़ा कारण माना जाता है। गर्म और नम वातावरण में ये टॉक्सिन और भी तेजी से विकसित हो सकते हैं। यही वजह है कि तरबूज खरीदते समय बहुत सतर्क रहने की जरूरत है। प्राकृतिक तरीके से पका हुआ तरबूज ना केवल स्वादिष्ट होता है बल्कि स्वास्थ्य के लिए भी सुरक्षित होता है। खरीदते समय आपको इसके रंग, गंध, बनावट और ध्वनि (टपक टेस्ट) पर जरूर ध्यान देना चाहिए ताकि आप और आपके परिवार की सेहत को खतरे से बचाया जा सके।

कैसे करें सही तरबूज की पहचान? नकली और केमिकलयुक्त तरबूज से ऐसे बचें

गर्मियों में ताजगी पाने के लिए हम सभी तरबूज खाना पसंद करते हैं, लेकिन बाजार में मिलने वाले हर तरबूज पर भरोसा करना ठीक नहीं होता। इन दिनों कुछ विक्रेता तरबूज को जल्दी पकाने और लाल दिखाने के लिए केमिकल्स का इस्तेमाल कर रहे हैं। ऐसे में जरूरी हो जाता है कि हम असली और नकली तरबूज की पहचान करना सीखें।

नकली तरबूज की पहचान करना आसान है अगर आप कुछ बातों पर ध्यान दें। अगर तरबूज का गूदा असामान्य रूप से ज्यादा लाल और चमकदार लगे, तो यह आर्टिफिशियल कलर या केमिकल का संकेत हो सकता है। वहीं, तरबूज काटने पर उसमें से झाग निकलने लगे तो उसे खाने से पूरी तरह बचें, क्योंकि यह केमिकल रिएक्शन का नतीजा हो सकता है। केमिकलयुक्त तरबूज का स्वाद भी हल्का अजीब और अप्राकृतिक लग सकता है। इसके अलावा, अगर तरबूज का छिलका जरूरत से ज्यादा चमकदार या अस्वाभाविक रूप से चिकना लगे, तो ऐसे तरबूज को कतई न खरीदें।

सही और सुरक्षित तरबूज की पहचान भी संभव है अगर कुछ आसान बातों का ध्यान रखा जाए। सबसे पहले तो तरबूज हमेशा किसी भरोसेमंद दुकानदार से ही खरीदें। कटे हुए तरबूज को खुले में न खरीदें, क्योंकि उसमें धूल, बैक्टीरिया और कीड़े लग सकते हैं जो सेहत के लिए खतरनाक हो सकते हैं। घर लाने के बाद तरबूज को खाने से पहले 30 मिनट के लिए ठंडे पानी में भिगोकर रखें, इससे बाहरी रसायनों का प्रभाव कुछ हद तक कम हो सकता है। तरबूज काटते समय उसमें झाग आना या किसी प्रकार की केमिकल जैसी गंध आना भी चेतावनी का संकेत है।

तरबूज खरीदते समय उसके रंग, गंध और बनावट के साथ-साथ उस पर थपथपाकर सुनाई देने वाली आवाज पर भी ध्यान दें – पका और ताजगी से भरा तरबूज हमेशा खोखली (hollow) ध्वनि देता है। थोड़ी सी सतर्कता और समझदारी अपनाकर आप न केवल स्वादिष्ट बल्कि सुरक्षित फल का आनंद ले सकते हैं।

नोट: इस लेख में शामिल कुछ जानकारियाँ विभिन्न मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित हैं। किसी भी सुझाव या उपाय को अपनाने से पहले कृपया संबंधित विशेषज्ञ से सलाह अवश्य लें।

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