![1 जुलाई 2024 से देश में खत्म होगा Indian Penal Code [IPC], लागू होंगे 3 नए भारतीय संविधान BNS, BNSS और BSA 1 जुलाई 2024 से देश में खत्म होगा Indian Penal Code [IPC], लागू होंगे 3 नए भारतीय संविधान BNS, BNSS और BSA](https://www.lifeberrys.com/img/article/bns-1719465336-lb.jpg)
नई दिल्ली। देश में 30 जून की रात 12 बजने के साथ ही अंग्रेजों की ओर से बनाए गए कानून खत्म हो जाएंगे। 1 जुलाई शुरू होते ही इनकी जगह बने 3 नए आपराधिक कानून लागू हो जाएंगे। IPC खत्म हो जाएगी। तीन नए कानून भारतीय न्याय संहिता (BNS) 2023, भारतीय साक्ष्य अधिनियम (BSA) 2023 और भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) 2023 लागू हो जाएंगे।
नए आपराधिक कानूनों में जांच, ट्रायल और अदालती कार्यवाहियों में तकनीक के इस्तेमाल पर खासा जोर दिया गया है। NCRB ने मौजूदा क्राइम एंड क्रिमनल ट्रेकिंग नेटवर्क एंड सिस्टम (CCTNS) एप्लिकेशन में 23 फंक्शनल मॉडिफिकेशन किए हैं। ताकि नए सिस्टम में भी आसानी से कंप्यूटर से FIR दर्ज होने समेत CCTNS संबंधित अन्य तमाम कार्य करने में कोई प्रॉब्लम ना आए।
केंद्रीय गृह मंत्रालय ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के मार्गदर्शन में गृह मंत्रालय ने 25 दिसंबर, 2023 को तीनों नए आपराधिक कानूनों की अधिसूचना के तुरंत बाद पुलिसकर्मियों, अभियोजकों, जेल और न्यायिक अधिकारियों समेत फॉरेंसिक कर्मियों को जागरूक करने के लिए बड़े स्तर पर काम करना भी शुरू कर दिया था। इसके अलावा NCRB ने नए कानूनों को लागू करने में राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की मदद के लिए 36 सपोर्ट टीम और कॉल सेंटर भी बनाए हैं। IPC खत्म हो जाएगी।
राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र (NIC) ने भी नए कानूनों के तहत क्राइम स्पॉट, अदालती सुनवाई और इलेक्ट्रॉनिक तरीके से अदालती समन की तामील की वीडियोग्राफी और फोटोग्राफी की सुविधा के लिए न्यायश्रूति, ई-साक्ष्य, और ई-समन नाम से तीन नए ऐप भी बनाए हैं। BPR एंड डी ने इन कानूनों के बारे में तमाम पहलू समझाने के लिए 250 वेबिनार और सेमीनार आयोजित की। UGC ने शिक्षकों और छात्रों को भी इनसे अवगत कराने के लिए 1200 यूनिवर्सिटी और 40 हजार कॉलेजों और अखिल भारतीय तकनीकी परिषद ने करीब नौ हजार संस्थानों को इनके बारे में जागरूक किया। इनमें 40 हजार 317 अधिकारियों और कर्मचारियों को ट्रेनिंग दी गई। ब्यूरो के मार्गदर्शन में राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों ने 5,84,174 कर्मचारियों को ट्रेंड किया।














