Hindi news, हिंदी न्यूज़, Hindi Samachar, हिंदी समाचार, Latest Hindi News
न्यूज़
CJP Yogi Adityanath Jyotish Narendra Modi Rahul Gandhi

33 करोड़ देवी-देवताओं का निवास स्थान है ये गुफा, छुपा है दुनिया के खत्म होने का राज

भारत में अनेकों ऐसी गुफाएं मौजूद हैं, जो लोगों के लिए आज भी हैरानी का विषय बनी हुई हैं। इन्हीं में से एक है उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले में स्थित पाताल भुवनेश्वर गुफा, जिसका जिक्र पुराणों में भी किया गया है।

Posts by : Priyanka Maheshwari | Updated on: Wed, 15 Sep 2021 9:12:38

33 करोड़ देवी-देवताओं का निवास स्थान है ये गुफा, छुपा है दुनिया के खत्म होने का राज

भारत में अनेकों ऐसी गुफाएं मौजूद हैं, जो लोगों के लिए आज भी हैरानी का विषय बनी हुई हैं। इन्हीं में से एक है उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले में स्थित पाताल भुवनेश्वर गुफा, जिसका जिक्र पुराणों में भी किया गया है। पाताल भुवनेश्वर गुफा किसी आश्चर्य से कम नहीं है। यह गुफा प्रवेश द्वार से 160 मीटर लंबी और 90 फीट गहरी है। ऐसा माना जाता है कि इस गुफा के गर्भ में दुनिया के खत्म होने का राज भी छिपा हुआ है। ये मंदिर रहस्य और सुंदरता का बेजोड़ मेल है। आज हम आपको अपने इस लेख के चलते इस गुफा से जुडी कुछ दिलचस्प बातें बताने जा रहे है।
beliefs of patal bhuvaneshwar,features of paatal bhuvneshver temple,history of pataal bhuvaneshwer temple,pataal bhuvaneshwer temple history in hindi,patal bhuvaneshwar history,patal bhuvaneshwer temple gangolihat,values of pataal bhuvaneshwer,travel,travel guide पाताल भुवनेश्वर की खोज कैसे हुई

पुराणों के मुताबिक पाताल भुवनेश्वर के अलावा कोई ऐसा स्थान नहीं है, जहां एकसाथ चारों धाम के दर्शन होते हों। यह पवित्र व रहस्यमयी गुफा अपने आप में सदियों का इतिहास समेटे हुए है। मान्यता है कि इस गुफा में 33 करोड़ देवी-देवताओं ने अपना निवास स्थान बना रखा है। इस मंदिर के बारे में ऐसा कहा जाता है कि सूर्य वंश के राजा और त्रेता युग में अयोध्या पर शासन करने वाले राजा ऋतुपर्णा ने इस गुफा की खोज की थी, जिसके बाद उन्हें यहां नागों के राजा अधिशेष मिले थे। ऐसा कहा जाता है कि इंसानों द्वारा मंदिर की खोज करने वाले राजा ऋतुपर्णा पहले व्यक्ति थी। अधिशेष ऋतुपर्णा को गुफा के अंदर ले गए, जहां उन्हें देवी देवताओं के साथ-साथ भगवान शिव के दर्शन करने का भी सौभाग्य प्राप्त हुआ। ऐसा कहा जाता है कि फिर उसके बाद इस गुफा की चर्चा नहीं हुई और फिर द्वापर युग में पांडवों द्वारा इस गुफा को फिर से ढूंढ लिया गया। द्वापर युग में पांडवो ने यहा भगवान शिवजी के साथ चौपड़ खेला था। पौराणिक कथाओं के अनुसार कलियुग में मंदिर की खोज जगदगुरु आदि शंकराचार्य ने आठवीं शताब्दी में की थी, जहां उन्होंने यहां तांबे का शिवलिंग स्थापित किया था। आज के समय में पाताल भुवानेश्वर गुफा सलानियो के लिए आकर्षण का केंद्र है। देश विदेश से कई सैलानी यह गुफा के दर्शन करने के लिए आते रहते है। beliefs of patal bhuvaneshwar,features of paatal bhuvneshver temple,history of pataal bhuvaneshwer temple,pataal bhuvaneshwer temple history in hindi,patal bhuvaneshwar history,patal bhuvaneshwer temple gangolihat,values of pataal bhuvaneshwer,travel,travel guide पाताल भुवनेश्वर की मान्यता

हिंदू धर्म में भगवान गणेशजी को प्रथम पूज्य माना गया है। गणेशजी के जन्म के बारे में कई कथाएं प्रचलित हैं। कहा जाता है कि एक बार भगवान शिव ने क्रोध में गणेशजी का सिर धड़ से अलग कर दिया था, बाद में माता पार्वतीजी के कहने पर भगवान गणेश को हाथी का मस्तक लगाया गया था, लेकिन जो मस्तक शरीर से अलग किया गया भगवान शिव ने पाताल भुवानेश्वर गुफा में रखा है। यहां मौजूद गणेश मूर्ती को आदिगणेश कहा जाता है। पाताल भुवनेश्वर की गुफा में भगवान गणेश कटे ‍‍शिलारूपी मूर्ति के ठीक ऊपर 108 पंखुड़ियों वाला शवाष्टक दल ब्रह्मकमल के रूप की एक चट्टान है। इससे ब्रह्मकमल से पानी भगवान गणेश के शिलारूपी मस्तक पर दिव्य बूंद टपकती है। मुख्य बूंद आदिगणेश के मुख में गिरती हुई दिखाई देती है। मान्यता है कि यह ब्रह्मकमल भगवान शिव ने ही यहां स्थापित किया था।

क्या है मंदिर की गुफा के अंदर

इस गुफा में चार खंबे हैं जो युगों - सतयुग, त्रेतायुग, द्वापरयुग तथा कलियुग को दर्शाते हैं। इनमें पहले तीन आकारों के खंबों में कोई परिवर्तन नहीं होता, लेकिन कलियुग का खंबा लंबाई में ज्यादा है। इस गुफा को लेकर एक और खास बात ये भी है कि यहां एक शिवलिंग है जो लगातार बढ़ रहा है, ऐसी मान्यता है कि जब ये शिवलिंग गुफा की छत को छू लेगा, तब दुनिया खत्म हो जाएगी। गुफा में एक साथ चार धामों के दर्शन भी किए जा सकते हैं। ऐसी मान्यता है कि गुफा में एक साथ केदारनाथ, बद्रीनाथ, अमरनाथ देखे जा सकते हैं। बद्रीनाथ में बद्री पंचायत की शिलारूप मूर्तियां हैं। जिनमें यम-कुबेर, वरुण, लक्ष्मी, गणेश तथा गरूड़ शामिल हैं। तक्षक नाग की आकृति भी गुफा में बनी चट्टान में नजर आती है। इस पंचायत के ऊपर बाबा अमरनाथ की गुफा है तथा पत्थर की बड़ी-बड़ी जटाएं फैली हुई हैं। इसी गुफा में कालभैरव की जीभ के दर्शन होते हैं। इसके बारे में मान्यता है कि मनुष्य कालभैरव के मुंह से गर्भ में प्रवेश कर पूंछ तक पहुंच जाए तो उसे मोक्ष की प्राप्ति हो जाती है। beliefs of patal bhuvaneshwar,features of paatal bhuvneshver temple,history of pataal bhuvaneshwer temple,pataal bhuvaneshwer temple history in hindi,patal bhuvaneshwar history,patal bhuvaneshwer temple gangolihat,values of pataal bhuvaneshwer,travel,travel guide इस मंदिर में जाने से पहले मेजर समीर कटवाल के मेमोरियल से होकर जाना पड़ता है। कुछ दूरी तक चलने के बाद ग्रिल गेट गेट आपको दिखेगा, जहां से पाताल भुवनेश्वर मंदिर की शुरुआत होती है। ये गुफा 90 फीट नीचे है, जहां बेहद ही पतले रास्ते से होकर इस मंदिर तक प्रवेश किया जाता है। जब आप थोड़ा आगे चलेंगे तो आपको यहां की चट्टानों की कलाकृति हाथी जैसी दिखाई देगी। फिर से आपको चट्टानों की कलाकृति देखने को मिलेगी जो नागों के राजा अधिशेष को दर्शाती हैं। ऐसा कहा जाता है कि अधिशेष ने अपने सिर पर दुनिया का भार संभाला हुआ है। पौराणिक कथाओं के आधार पर इस मंदिर में चार द्वार मौजूद हैं, जो रणद्वार, पापद्वार, धर्मद्वार और मोक्षद्वार के नाम से जाने जाते हैं। ऐसा कहा जाता है कि जब रावण की मृत्यु हुई थी तब पापद्वार बंद हो गया था। इसके बाद कुरुक्षेत्र के युद्ध के बाद रणद्वार को भी बंद कर दिया गया था। गुफ़ाओं के अन्दर बढ़ते हुए गुफ़ा की छत से गाय की एक थन की आकृति नजर आती है। यह आकृति कामधेनु गाय का स्तन है कहा जाता था की देवताओं के समय मे इस स्तन में से दुग्ध धारा बहती है। कलियुग में अब दूध के बदले इससे पानी टपक रहा है।

इस गुफा के अन्दर आपको मुड़ी गर्दन वाला गौड़(हंस) एक कुण्ड के ऊपर बैठा दिखाई देता है। यह माना जाता है कि शिवजी ने इस कुण्ड को अपने नागों के पानी पीने के लिये बनाया था। इसकी देखरेख गरुड़ के हाथ में थी लेकिन जब गरुड़ ने ही इस कुण्ड से पानी पीने की कोशिश की तो शिवजी ने गुस्से में उसकी गरदन मोड़ दी। beliefs of patal bhuvaneshwar,features of paatal bhuvneshver temple,history of pataal bhuvaneshwer temple,pataal bhuvaneshwer temple history in hindi,patal bhuvaneshwar history,patal bhuvaneshwer temple gangolihat,values of pataal bhuvaneshwer,travel,travel guide पाताल भुवनेश्वर जाने का उतम समय

अगर आप रोमांच और धार्मिक प्रेमी हैं, तो अच्छा होगा आप इस मंदिर के दर्शन एक सही समय में करें। उत्तराखंड में इस रहस्यमयी गुफा की यात्रा करने के लिए मानसून का समय बिल्कुल भी सही नहीं है, आप यहां मार्च से जून के बीच दर्शन करने के लिए जा सकते हैं। अगर आपको ठंड में घूमना बेहद पसंद है तो ठंड में आप अक्टूबर से फरवरी के महीने में भी जा सकते हैं।

कैसे पहुंचें पाताल भुवनेश्वर


आप आसानी से इस जगह पर पहुंच सकते है। यह नई दिल्ली, लखनऊ और कोलकाता जैसे प्रमुख शहरों से अच्छी तरह से जुड़ा हुआ है। रेलवे स्टेशन या हवाई अड्डे से टैक्सी और बसें आसानी से उपलब्ध हैं।

रेलवे द्वारा

निकटतम रेलवे स्टेशन टनकपुर रेलवे स्टेशन है, जो पाताल भुवनेश्वर से 154km दूर है।

हवाई जहाज से

टनकपुर में बसें और टैक्सियाँ उपलब्ध हैं। निकटतम हवाई अड्डा पंतनगर हवाई अड्डा है, जो पाताल भुवनेश्वर से 224km दूर है।

राज्य
View More

Shorts see more

सावधान! एक गलत तरबूज बन सकता है कैंसर की वजह, खरीदते वक्त ध्यान रखें ये बातें

सावधान! एक गलत तरबूज बन सकता है कैंसर की वजह, खरीदते वक्त ध्यान रखें ये बातें

  • तरबूज में हानिकारक केमिकल मिलाए जा रहे हैं
  • तरबूज से कैसे हो सकता है कैंसर?
  • कैसे करें सही तरबूज की पहचान?
read more

ताजा खबरें
View More

‘देश का हर जवान मेरे परिवार का हिस्सा’, बस्तर में सैनिकों के बीच भावुक हुए पीएम मोदी
‘देश का हर जवान मेरे परिवार का हिस्सा’, बस्तर में सैनिकों के बीच भावुक हुए पीएम मोदी
दिवाली पर सिर्फ 'हैप्पी दिवाली' नहीं, इन खास संदेशों से अपनों तक पहुंचाएं खुशियों की रोशनी
दिवाली पर सिर्फ 'हैप्पी दिवाली' नहीं, इन खास संदेशों से अपनों तक पहुंचाएं खुशियों की रोशनी
जापान में 5.7 तीव्रता का भूकंप, 22 लोग घायल
जापान में 5.7 तीव्रता का भूकंप, 22 लोग घायल
विभाजन के दर्द से BJP के निर्माण तक, आडवाणी के जीवन के अनछुए पहलुओं को PM मोदी ने किया याद
विभाजन के दर्द से BJP के निर्माण तक, आडवाणी के जीवन के अनछुए पहलुओं को PM मोदी ने किया याद
Google Pixel 11 Pro और Pixel 11 Pro XL पर 29,000 रुपये तक की छूट, जानें ऑफर के बाद कितनी रह गई कीमत
Google Pixel 11 Pro और Pixel 11 Pro XL पर 29,000 रुपये तक की छूट, जानें ऑफर के बाद कितनी रह गई कीमत
झारखंड के खूंटी में भीषण सड़क हादसा, बेकाबू 18 चक्का ट्रक ने 7 लोगों को कुचला
झारखंड के खूंटी में भीषण सड़क हादसा, बेकाबू 18 चक्का ट्रक ने 7 लोगों को कुचला
दिवाली 2026: मां लक्ष्मी की कृपा पाने के लिए करें इस विशेष स्तुति का पाठ, घर में आएगी सुख-समृद्धि
दिवाली 2026: मां लक्ष्मी की कृपा पाने के लिए करें इस विशेष स्तुति का पाठ, घर में आएगी सुख-समृद्धि
सिनेमाघरों से ‘रामायण’ के सीन लीक करना पड़ेगा भारी, मेकर्स ने साफ कहा- तुरंत हटाएं वीडियो
सिनेमाघरों से ‘रामायण’ के सीन लीक करना पड़ेगा भारी, मेकर्स ने साफ कहा- तुरंत हटाएं वीडियो
'हनुमान अंश' की OTT रिलीज डेट कंफर्म, 27 नवंबर से Sony LIV पर देख सकेंगे फिल्म
'हनुमान अंश' की OTT रिलीज डेट कंफर्म, 27 नवंबर से Sony LIV पर देख सकेंगे फिल्म
सलमान खान ने बुजुर्गों को दिया खास तोहफा, सिर्फ 11 रुपये में देख सकेंगे 'मातृभूमि'
सलमान खान ने बुजुर्गों को दिया खास तोहफा, सिर्फ 11 रुपये में देख सकेंगे 'मातृभूमि'
8 नवंबर 2026 राशिफल: दिवाली के दिन इन राशियों के लिए बन रहे हैं तरक्की के योग, जानें किसे बरतनी होगी सावधानी
8 नवंबर 2026 राशिफल: दिवाली के दिन इन राशियों के लिए बन रहे हैं तरक्की के योग, जानें किसे बरतनी होगी सावधानी
सफाई के बाद भी घर में दिखते हैं मकड़ी के जाले? इन आसान उपायों से मिलेगी राहत
सफाई के बाद भी घर में दिखते हैं मकड़ी के जाले? इन आसान उपायों से मिलेगी राहत
7 नवंबर को तुला राशि में प्रवेश करेंगे चंद्रमा, मेष-कर्क समेत इन 4 राशियों के लिए शुभ संकेत
7 नवंबर को तुला राशि में प्रवेश करेंगे चंद्रमा, मेष-कर्क समेत इन 4 राशियों के लिए शुभ संकेत
बिना चीनी के घर पर बनाएं मिष्टी दोई, स्वाद और क्रीमी टेक्सचर के लिए अपनाएं ये तरीका
बिना चीनी के घर पर बनाएं मिष्टी दोई, स्वाद और क्रीमी टेक्सचर के लिए अपनाएं ये तरीका