दिल्ली के सर गंगाराम अस्पताल में दो बुजुर्ग महिलाओं की दुर्लभ बीमारियों का सफल इलाज किया गया है। इनमें से एक महिला रेक्टोवेजाइनल फिस्टुला से पीड़ित थी, जबकि दूसरी को एंटेरोवेजाइनल फिस्टुला हो गया था। एंटेरोवेजाइनल फिस्टुला के कारण आंत और प्राइवेट पार्ट के बीच असामान्य कनेक्शन बन गया था, जिससे मल योनि के रास्ते बाहर आ रहा था। दूसरी महिला की छोटी आंत और प्राइवेट पार्ट के बीच भी असामान्य संपर्क था।
इन बीमारियों के इलाज के लिए दोनों महिलाओं ने पहले कई सर्जरी कराई थीं, लेकिन कोई राहत नहीं मिली। अंततः सर गंगाराम अस्पताल के डॉक्टरों ने हार्ट सर्जरी में इस्तेमाल होने वाले कार्डियक ओक्लूडर फिस्टुला क्लोजर की मदद से सफल इलाज किया।
गैस्ट्रोएंटरोलॉजी विभाग के प्रमुख डॉ. अनिल अरोड़ा और डॉ. शिवम खरे ने एंडोस्कोपिक तकनीक का इस्तेमाल कर बिना बड़ी सर्जरी किए फिस्टुला को बंद कर दिया। इस नई तकनीक ने न केवल उपचार को सरल बनाया बल्कि अन्य जटिलताओं के जोखिम को भी कम किया। यह पद्धति उन मरीजों के लिए एक नई उम्मीद है, जिनके लिए पारंपरिक सर्जरी कारगर नहीं होती।
कार्डियक ओक्लूडर डिवाइस से सफल सर्जरी
डॉ. शिवम खरे ने बताया कि इस सर्जरी में कार्डियक ओक्लूडर डिवाइस का उपयोग किया गया, जिससे खतरा काफी कम हो गया और मरीजों की रिकवरी तेजी से हुई। वहीं, गैस्ट्रोएंटरोलॉजी विभाग के प्रमुख डॉ. अनिल अरोड़ा ने इसे मेडिकल साइंस में एक बड़ी उपलब्धि बताया। उन्होंने कहा कि भविष्य में इस तकनीक से ऐसे कई मरीजों को लाभ मिल सकता है, जिनके लिए पारंपरिक सर्जरी सफल नहीं होती।
सर्जरी के बाद दोनों महिलाएं तेजी से स्वस्थ हो रही हैं और उन्होंने राहत महसूस करते हुए अपनी खुशी जाहिर की। एंटेरोवेजाइनल फिस्टुला से पीड़ित महिला ने कहा कि अब मल त्याग पूरी तरह से सामान्य हो गया है और वह लंबे समय बाद बिना किसी परेशानी के अपना जीवन जी पा रही हैं। उन्होंने डॉक्टरों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि "अब मैं पूरी तरह से ठीक महसूस कर रही हूं और सामान्य जीवन जी सकती हूं।"
पीडियाट्रिक कार्डियोलॉजिस्ट की अहम भूमिका
डॉ. अनिल अरोड़ा ने बताया कि इस सर्जरी की सफलता में पीडियाट्रिक कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. नीरज अग्रवाल की भी महत्वपूर्ण भूमिका रही। उन्होंने हार्ट डिजीज के इलाज में इस्तेमाल होने वाले कार्डियक ओक्लूडर डिवाइस को इस सर्जरी के लिए अनुकूल बनाया, जिससे मरीजों का उपचार संभव हो पाया।