
राजस्थान के टोंक जिले के दौरे पर पहुंचे राज्य वित्त आयोग के अध्यक्ष अरुण चतुर्वेदी ने बुधवार को मीडिया से बातचीत के दौरान छात्रसंघ चुनावों और राजनीतिक बयानबाज़ी को लेकर तीखी टिप्पणी की। उन्होंने पूर्व उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट पर सीधा निशाना साधते हुए कहा कि यदि वे आज छात्रसंघ चुनावों की बहाली की मांग कर रहे हैं, तो उन्हें यह भी याद रखना चाहिए कि आखिर इन चुनावों पर रोक किसकी सरकार ने लगाई थी।
चतुर्वेदी ने कहा, "सचिन पायलट उसी सरकार का हिस्सा रहे हैं, जिसने छात्रसंघ चुनावों पर ताले जड़े थे। अब जबकि भाजपा की सरकार सत्ता में है, तो हम परिस्थितियों का मूल्यांकन कर रहे हैं और उसी के अनुसार निर्णय लेंगे।"
डोटासरा पर पलटवार — "तब कौन सी पर्ची चल रही थी?"
गोविंद सिंह डोटासरा द्वारा भाजपा सरकार को 'पर्ची सरकार' कहे जाने पर चतुर्वेदी ने करारा जवाब देते हुए याद दिलाया कि जब एक मुख्यमंत्री ने अपने ही डिप्टी सीएम को 'निकम्मा और नकारा' करार दिया था, तब कौन सी पर्ची चल रही थी?
चतुर्वेदी ने व्यंग्यात्मक लहज़े में कहा, "डोटासरा को पहले यह बताना चाहिए कि जब उनके ही नेतृत्व में उनके उपमुख्यमंत्री की छवि सार्वजनिक रूप से धूमिल की गई, तो वो कौन सा नेतृत्व था जो ऐसी पर्चियों पर चल रहा था?"
भारत अब अपने नियमों पर — अमेरिका पर भी टिप्पणी
मौजूदा अंतरराष्ट्रीय व्यापार माहौल पर बोलते हुए चतुर्वेदी ने अमेरिका द्वारा भारत पर लगाए गए टैरिफ पर केंद्र सरकार की नीति को दोहराया। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के रुख का समर्थन करते हुए कहा:
"प्रधानमंत्री पहले भी कह चुके हैं — भारत अब किसी के दबाव में नहीं, बल्कि अपनी शर्तों पर चलेगा। आम जनता के हितों के साथ कोई समझौता नहीं किया जाएगा।"
वित्त आयोग की भूमिका पर जोर — “गांवों तक पहुंचेगा विकास”
राज्य वित्त आयोग की जिम्मेदारी के संदर्भ में चतुर्वेदी ने कहा कि अब एक नई टीम का गठन किया जा रहा है, जिसका प्रमुख उद्देश्य होगा कि पंचायतों और शहरी निकायों को केंद्र से प्राप्त फंड का सटीक क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाए।
उन्होंने कहा: "हमारा फोकस यह है कि योजनाएं सिर्फ कागज़ों पर न रहें, बल्कि धरातल तक पहुंचें। गांव-गांव तक विकास की रोशनी पहुंचे, यह हमारी प्राथमिकता है।"
उपराष्ट्रपति चुनाव पर प्रतिक्रिया — "निर्णय होगा केंद्रीय नेतृत्व का"
जब उनसे उपराष्ट्रपति चुनाव को लेकर सवाल किया गया, तो चतुर्वेदी ने स्पष्ट शब्दों में इसे केंद्र सरकार का विषय बताते हुए कहा: "जब केंद्र में एनडीए की सरकार है, तो उपराष्ट्रपति भी स्वाभाविक रूप से एनडीए से ही होंगे। इस पर अंतिम निर्णय प्रधानमंत्री और पार्टी नेतृत्व द्वारा ही लिया जाएगा।"














