
भारतीय क्रिकेट के दिग्गज सचिन तेंदुलकर ने इंग्लैंड के खिलाफ हाल ही में समाप्त हुई टेस्ट सीरीज़ पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए तेज गेंदबाज़ जसप्रीत बुमराह की जमकर तारीफ की है। उन्होंने कहा कि भारत की उन दो टेस्ट जीतों को जसप्रीत बुमराह की अनुपस्थिति से जोड़कर देखना महज एक संयोग है, क्योंकि बुमराह आज भी टीम इंडिया के सबसे असाधारण और अविश्वसनीय गेंदबाज़ हैं।
बुमराह ने इंग्लैंड के खिलाफ पांच टेस्ट की सीरीज़ में तीन मैच खेले, जबकि दो मैच वर्कलोड मैनेजमेंट के कारण नहीं खेले। संयोग से भारत ने वही दोनों मैच जीते जिनमें बुमराह नहीं थे – बर्मिंघम और द ओवल में। लेकिन तेंदुलकर का मानना है कि यह जीतें बुमराह के बिना टीम की मजबूती का संकेत जरूर हैं, मगर यह सोच लेना कि भारत को बुमराह की ज़रूरत नहीं रही, एक भूल होगी।
“बुमराह अब भी बेस्ट” – तेंदुलकर का विश्लेषण
रेडिट पर अपने वीडियो एनालिसिस में तेंदुलकर ने कहा, "बुमराह ने पहले टेस्ट में पांच विकेट लेकर शानदार शुरुआत की। वह दूसरा टेस्ट नहीं खेले, लेकिन तीसरे और चौथे टेस्ट में उनका प्रदर्शन बेहतरीन रहा। तीन टेस्ट में उन्होंने कुल 14 विकेट लिए।" उन्होंने आगे कहा, "मुझे पता है लोग चर्चा कर रहे हैं कि हम वही टेस्ट जीते जिनमें बुमराह नहीं खेले। लेकिन मैं इसे महज संयोग मानता हूं। वह आज भी किसी भी गेंदबाज़ से बेहतर हैं।"
बुमराह की अनुपस्थिति में मोहम्मद सिराज ने टीम के लिए सबसे अधिक ओवर फेंके और 23 विकेट झटके। इसके बावजूद, करियर आंकड़ों के लिहाज से बुमराह कहीं आगे हैं – 48 टेस्ट में 219 विकेट बनाम सिराज के 41 टेस्ट में 123 विकेट।
पांचवें टेस्ट में बुमराह को न खिलाने के फैसले पर भी सवाल उठे, लेकिन टीम मैनेजमेंट ने स्पष्ट किया कि वे बुमराह को लेकर कोई जोखिम नहीं उठाना चाहते थे। तेंदुलकर ने इस फैसले का समर्थन किया और कहा कि एक खिलाड़ी की लंबी उम्र और फिटनेस को ध्यान में रखते हुए यह फैसला तर्कसंगत है।
जडेजा और वाशिंगटन के शतक पूरी तरह जायज़, वाशिंगटन सुंदर की तारीफ में बोले सचिन
तेंदुलकर ने ऑलराउंडर वाशिंगटन सुंदर को भी सराहा, जिन्होंने दूसरे टेस्ट में बेन स्टोक्स का अहम विकेट लिया और आखिरी टेस्ट में 53 रनों की तेजतर्रार पारी खेली। उन्होंने कहा, “जब टीम को रन रोकने की ज़रूरत थी, सुंदर टिके रहे। जब तेजी से रन बनाने की ज़रूरत थी, उन्होंने वो भी किया। वेल डन, वाशी!”
मैनचेस्टर टेस्ट के दौरान बेन स्टोक्स द्वारा मैच ड्रॉ करने के प्रस्ताव पर भारत के इनकार पर भी सचिन ने भारतीय टीम का समर्थन किया। उन्होंने कहा, “जडेजा और सुंदर को अपने शतक बनाने का पूरा हक है। ड्रॉ संभावित परिणाम था, लेकिन बल्लेबाज क्यों नहीं खेलें? इंग्लैंड को आराम क्यों मिलना चाहिए? भारतीय टीम का रुख पूरी तरह सही था।”
तेंदुलकर के अनुसार बुमराह भारतीय गेंदबाजी आक्रमण की रीढ़ हैं और उनका न खेलना किसी रणनीति का हिस्सा हो सकता है, लेकिन उन्हें नजरअंदाज करना क्रिकेट की समझदारी नहीं होगी। भारत की जीत बेशक टीम प्रयास थी, लेकिन बुमराह की मौजूदगी टीम को और ज्यादा खतरनाक बनाती है।














