हाल ही में महाकुंभ मेले के दौरान चर्चा में आए "IIT बाबा" अभय सिंह को जयपुर में गांजा (मारिजुआना) रखने के आरोप में हिरासत में लिया गया। उनके खिलाफ नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस (NDPS) एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया है। जयपुर पुलिस कमिश्नर के बयान के मुताबिक, IIT बाबा को जमानत राशि भरने के बाद रिहा कर दिया गया क्योंकि उनके पास से बरामद गांजे की मात्रा अधिक नहीं थी।
भांग और गांजे को लेकर क्या कहता है कानून?
भारत में नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस एक्ट 1985 (NDPS एक्ट) लागू है, जो नशीले पदार्थों के उत्पादन, बिक्री, खरीद और उपयोग को नियंत्रित करता है। इस कानून के तहत, धारा 2(iii)(B) में कैनबिस (भांग) को परिभाषित किया गया है, जिसमें भांग के पौधे के फूल और फल वाले हिस्से शामिल होते हैं (बीज और पत्तियों को छोड़कर जब वे फूलों के साथ न हों)।
धारा 20 के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति भांग की खेती, उत्पादन, कब्जा, बिक्री, खरीद, परिवहन या उपयोग करता है, तो उसे सजा हो सकती है।
गांजा और भांग दिमाग पर कैसे असर डालते हैं?
गांजे या भांग का सेवन करने से सीधा दिमाग पर प्रभाव पड़ता है। यह मस्तिष्क की कार्यप्रणाली को प्रभावित करता है, जिससे सोचने-समझने की क्षमता कमजोर हो जाती है। इसका असर व्यक्ति की एकाग्रता, निर्णय लेने की क्षमता और याददाश्त पर भी पड़ता है।
गांजे में मौजूद THC (Tetrahydrocannabinol) नामक रसायन दिमाग में मौजूद न्यूरोट्रांसमीटर को प्रभावित करता है, जिससे व्यक्ति को असामान्य तरीके से खुशी, उत्तेजना, भ्रम या डर महसूस हो सकता है। कुछ लोगों को अचानक घबराहट, बेचैनी और हल्के मतिभ्रम (hallucination) का अनुभव हो सकता है।
भांग या गांजे के अधिक सेवन से दिमाग का संतुलन बिगड़ सकता है, जिससे व्यक्ति का व्यवहार अनियंत्रित हो सकता है। कुछ मामलों में लोग अचानक क्रोधित हो जाते हैं, मानसिक अवसाद (depression) में चले जाते हैं या फिर चीजों को ठीक से समझने में असमर्थ हो जाते हैं।
लंबे समय तक इसके सेवन से मस्तिष्क की संरचना और कार्यप्रणाली में बदलाव आ सकता है, जिससे याददाश्त कमजोर हो सकती है, मानसिक क्षमता घट सकती है और व्यक्ति को गहरी मानसिक समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है।
इसके अलावा, अगर कोई व्यक्ति युवा अवस्था में गांजे या भांग का सेवन शुरू करता है, तो उसके दिमाग के विकास पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। वैज्ञानिक शोध बताते हैं कि इससे दिमाग की कार्यक्षमता में गिरावट आती है, और लगातार सेवन से मानसिक विकारों (psychiatric disorders) का खतरा बढ़ जाता है।
ज्यादा मात्रा में भांग खाने के गंभीर नुकसान
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, अगर कोई व्यक्ति भांग या गांजे का अधिक मात्रा में सेवन करता है, तो इसका शरीर और दिमाग पर गहरा नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। यह न केवल मानसिक संतुलन को बिगाड़ सकता है बल्कि शारीरिक बीमारियों को भी जन्म दे सकता है।
हार्ट अटैक और ब्लड प्रेशर की समस्या
भांग या गांजे का अधिक सेवन हृदय गति को असामान्य रूप से तेज कर सकता है, जिससे व्यक्ति को ऐसा महसूस हो सकता है कि उसे हार्ट अटैक आ रहा है। इसके अलावा, यह ब्लड प्रेशर को अचानक बढ़ा या घटा सकता है, जिससे चक्कर आना, घबराहट, बेहोशी और स्ट्रोक का खतरा बढ़ जाता है।
नींद से जुड़ी समस्याएं
भांग का अधिक सेवन नींद की गुणवत्ता को प्रभावित करता है। शुरुआत में व्यक्ति को अधिक नींद आने लगती है, लेकिन धीरे-धीरे यह अनिद्रा (insomnia) जैसी समस्याओं को जन्म दे सकता है। नींद की कमी से तनाव (stress), चिड़चिड़ापन और ध्यान केंद्रित करने में कठिनाई हो सकती है।
पाचन तंत्र पर असर
भांग का ज्यादा सेवन पाचन तंत्र को कमजोर कर सकता है। इससे भूख में कमी, अपच, पेट दर्द और उल्टी जैसी समस्याएं हो सकती हैं। कई बार भांग के अधिक सेवन से व्यक्ति को खाने-पीने की इच्छा नहीं होती, जिससे शरीर में पोषण की कमी हो सकती है।
गर्भावस्था और महिलाओं पर प्रभाव
महिलाओं के लिए भांग का अधिक सेवन विशेष रूप से खतरनाक हो सकता है। गर्भवती महिलाओं के लिए यह और भी अधिक नुकसानदेह हो सकता है, क्योंकि यह गर्भस्थ शिशु के विकास में बाधा डाल सकता है और जन्म संबंधी जटिलताओं का कारण बन सकता है।
फेफड़ों और श्वसन प्रणाली पर प्रभाव
अगर भांग को धूम्रपान के रूप में लिया जाए तो यह फेफड़ों को नुकसान पहुंचा सकता है। लंबे समय तक इसका सेवन सांस की बीमारियां, क्रॉनिक ब्रोंकाइटिस (chronic bronchitis) और फेफड़ों में जलन जैसी समस्याएं पैदा कर सकता है।
लत (Addiction) और सामाजिक समस्याएं
भांग या गांजे का नियमित और अधिक सेवन करने से व्यक्ति को इसकी लत (addiction) लग सकती है। इससे वह सामाजिक, पारिवारिक और पेशेवर जीवन में पीछे हटने लगता है। अधिक नशा करने वाले लोग डिप्रेशन, गुस्सा और आत्मविश्वास की कमी जैसी मानसिक परेशानियों का शिकार हो सकते हैं।