न्यूज़
Budget 2026 Yogi Adityanath Tejashwi Yadav Donald Trump Narendra Modi Rahul Gandhi

चातुर्मास में क्यों ज़रूरी है त्याग और संयम? जानिए कौन-कौन सी चीज़ों से करनी चाहिए दूरी

हिंदू धर्म में वर्ष के चार पवित्र और संयमशील महीनों का विशेष महत्व होता है, जिन्हें चातुर्मास कहा जाता है। यह अवधि आषाढ़ शुक्ल पक्ष की एकादशी, जिसे देवशयनी एकादशी कहा जाता है, से शुरू होती है और कार्तिक शुक्ल एकादशी तक चलती है। इस काल में भगवान विष्णु योगनिद्रा में चले जाते हैं और चार महीने बाद प्रबोधिनी एकादशी के दिन जागते हैं।

Posts by : Rajesh Bhagtani | Updated on: Fri, 20 June 2025 2:41:39

चातुर्मास में क्यों ज़रूरी है त्याग और संयम? जानिए कौन-कौन सी चीज़ों से करनी चाहिए दूरी

हिंदू धर्म में वर्ष के चार पवित्र और संयमशील महीनों का विशेष महत्व होता है, जिन्हें चातुर्मास कहा जाता है। यह अवधि आषाढ़ शुक्ल पक्ष की एकादशी, जिसे देवशयनी एकादशी कहा जाता है, से शुरू होती है और कार्तिक शुक्ल एकादशी तक चलती है। इस काल में भगवान विष्णु योगनिद्रा में चले जाते हैं और चार महीने बाद प्रबोधिनी एकादशी के दिन जागते हैं। धार्मिक दृष्टि से यह समय आध्यात्मिक साधना, आत्मशुद्धि और नियम-संयम का प्रतीक है। इस अवधि में कई धार्मिक और सामाजिक रीति-नीतियों पर रोक लगाई जाती है। आइए जानते हैं कि चातुर्मास के दौरान किन चीज़ों का त्याग करने की परंपरा है और उसके पीछे का धार्मिक व आध्यात्मिक अर्थ क्या है।

चातुर्मास में शुभ कार्यों पर विराम

चातुर्मास की अवधि को धार्मिक रूप से तप, व्रत, ध्यान और त्याग का समय माना जाता है। इस दौरान विवाह, मुंडन, गृह प्रवेश, मंदिर प्राण प्रतिष्ठा जैसे सभी शुभ कार्यों को वर्जित माना गया है। इसका कारण यह है कि यह समय देवताओं के विश्राम का काल माना जाता है और ऐसे में वे किसी प्रकार के धार्मिक अनुष्ठानों में सक्रिय नहीं रहते।

आहार में संयम और विशेष त्याग

चातुर्मास में शरीर और मन को शुद्ध रखने के लिए खानपान में विशेष सावधानी बरती जाती है। आयुर्वेद के अनुसार, वर्षा ऋतु के दौरान पाचन तंत्र कमजोर हो जाता है और संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है, इसलिए कुछ विशेष खाद्य पदार्थों से दूरी बनाने की परंपरा रही है:

1. उड़द और चना का त्याग

इन दालों को भारी और वातकारक माना जाता है, जो पाचन को प्रभावित कर सकते हैं। चातुर्मास में इन्हें वर्जित माना गया है।

2. गुड़ का त्याग


यह माना जाता है कि चार महीनों तक गुड़ से परहेज करने से जीवन में मधुरता आती है और मन संयमित रहता है। धार्मिक दृष्टि से यह एक आत्मनियंत्रण का अभ्यास भी है।

3. तेल और तैलीय खाद्य पदार्थ

तेल को शरीर में आलस्य और अतिरिक्त गर्मी बढ़ाने वाला माना गया है। धार्मिक मान्यता यह भी कहती है कि तेल के त्याग से संतान सुख और लंबी आयु का आशीर्वाद मिलता है।

4. दूध और दही

दूध और उससे बने उत्पादों से भी दूरी बनाना शुभ माना गया है। इसके पीछे यह मान्यता है कि दही पित्त को बढ़ाता है और दूध संक्रमण की आशंका को जन्म देता है। धार्मिक दृष्टि से, इसका त्याग करने वाले को गोलोक जैसे दिव्य लोक की प्राप्ति का उल्लेख शास्त्रों में मिलता है।

5. पलाश के पत्तों पर भोजन

ऐसी मान्यता है कि चातुर्मास में पलाश के पत्तों पर भोजन करने से पवित्रता बनी रहती है और साधक को विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है। साथ ही यह आयुर्वेदिक दृष्टि से भी सुरक्षित होता है।

वस्त्र और आचरण में परिवर्तन

चातुर्मास में न केवल भोजन, बल्कि पहनावे और व्यवहार में भी संयम की सलाह दी जाती है।

काले वस्त्रों का परहेज: काले रंग को तमोगुण का प्रतीक माना गया है, इसलिए चातुर्मास में इसके उपयोग से बचा जाता है।

जमीन पर सोना: भगवान विष्णु के योगनिद्रा में जाने के साथ ही उनके भक्त भी सादगी अपनाते हैं और भूमि पर शयन करना तप का हिस्सा माना जाता है।

धार्मिक अभ्यास और फल

पौराणिक ग्रंथों में उल्लेख है कि चातुर्मास में फलाहार पर रहने वाला व्यक्ति न केवल स्वास्थ्य लाभ प्राप्त करता है, बल्कि वह 88 हजार ब्राह्मणों को भोजन कराने के बराबर पुण्य भी अर्जित करता है। इस दौरान जप, ध्यान, गीता-पाठ, विष्णु सहस्त्रनाम और व्रत-उपवास जैसे धार्मिक कार्यों से मन को एकाग्रता प्राप्त होती है और जीवन में स्थायित्व आता है।

चातुर्मास केवल परंपरा नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि और अनुशासन का एक व्यावहारिक और आध्यात्मिक कार्यक्रम है। यह काल शरीर, मन और आत्मा को संयमित करने का अवसर प्रदान करता है। त्याग और तप के माध्यम से व्यक्ति न केवल धार्मिक पुण्य अर्जित करता है, बल्कि स्वास्थ्य और मन की शुद्धता के मार्ग पर भी अग्रसर होता है।

नोट: इस लेख में दी गई जानकारियां धार्मिक ग्रंथों, मान्यताओं और परंपराओं पर आधारित हैं। इन्हें अपनाने से पहले व्यक्तिगत स्वास्थ्य या परिस्थिति को ध्यान में रखते हुए किसी योग्य आचार्य या विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य करें।

राज्य
View More

Shorts see more

सावधान! रसोई में इस्तेमाल हो रहा तेल बन सकता है ब्रेस्ट कैंसर की वजह

सावधान! रसोई में इस्तेमाल हो रहा तेल बन सकता है ब्रेस्ट कैंसर की वजह

  • किचन का आम तेल भी बन सकता है ब्रेस्ट कैंसर की वजह
  • Linoleic Acid बढ़ा सकता है खतरनाक Triple-Negative Breast Cancer
  • सरसों का तेल, नारियल तेल या देसी घी हो सकते हैं सुरक्षित विकल्प
read more

ताजा खबरें
View More

IND vs PAK: टीम इंडिया के इन 5 खिलाड़ियों ने तोड़ा पाकिस्तान का आत्मविश्वास, बने जीत के नायक
IND vs PAK: टीम इंडिया के इन 5 खिलाड़ियों ने तोड़ा पाकिस्तान का आत्मविश्वास, बने जीत के नायक
IND vs PAK: ईशान किशन ने बनाया ऐसा रिकॉर्ड जो धोनी-पंत भी नहीं बना पाए, बने पहले भारतीय विकेटकीपर
IND vs PAK: ईशान किशन ने बनाया ऐसा रिकॉर्ड जो धोनी-पंत भी नहीं बना पाए, बने पहले भारतीय विकेटकीपर
पाकिस्तान के खिलाफ बेटे की तूफानी पारी देख भावुक हुए ईशान किशन के पिता, बोले– 'मेहनत का कोई शॉर्टकट नहीं होता'
पाकिस्तान के खिलाफ बेटे की तूफानी पारी देख भावुक हुए ईशान किशन के पिता, बोले– 'मेहनत का कोई शॉर्टकट नहीं होता'
IND vs PAK: T20 वर्ल्ड कप में भारत से मिली करारी हार के बाद भड़के पाकिस्तानी फैंस, बोले– ‘शाहीन शाह अफरीदी को…’
IND vs PAK: T20 वर्ल्ड कप में भारत से मिली करारी हार के बाद भड़के पाकिस्तानी फैंस, बोले– ‘शाहीन शाह अफरीदी को…’
‘सांसद बनने की योग्यता नहीं, फिर भी नेता प्रतिपक्ष’, केशव प्रसाद मौर्य का राहुल गांधी पर तीखा प्रहार
‘सांसद बनने की योग्यता नहीं, फिर भी नेता प्रतिपक्ष’, केशव प्रसाद मौर्य का राहुल गांधी पर तीखा प्रहार
बेजान और डल स्किन के लिए रामबाण है मुल्तानी मिट्टी, जानें सही तरीके से कैसे करें इस्तेमाल
बेजान और डल स्किन के लिए रामबाण है मुल्तानी मिट्टी, जानें सही तरीके से कैसे करें इस्तेमाल
जिद्दी ब्लैक हेड्स हटाने का नया जुगाड़, अंडा और टिशू पेपर से मिनटों में पाएं साफ स्किन, देखें वीडियो
जिद्दी ब्लैक हेड्स हटाने का नया जुगाड़, अंडा और टिशू पेपर से मिनटों में पाएं साफ स्किन, देखें वीडियो
₹19,000 की भारी कटौती के साथ मिल रहा है OnePlus का प्रीमियम फोन, Amazon पर सीमित समय के लिए शानदार ऑफर
₹19,000 की भारी कटौती के साथ मिल रहा है OnePlus का प्रीमियम फोन, Amazon पर सीमित समय के लिए शानदार ऑफर
केदारनाथ मंदिर के कपाट 22 अप्रैल को खुलेंगे, ऊखीमठ स्थित ओंकारेश्वर मंदिर में हुई औपचारिक घोषणा
केदारनाथ मंदिर के कपाट 22 अप्रैल को खुलेंगे, ऊखीमठ स्थित ओंकारेश्वर मंदिर में हुई औपचारिक घोषणा
बिहार की सियासत में नई सरगर्मी, AIMIM के मंच पर दिखे आईपी गुप्ता, क्या महागठबंधन से दूरी के संकेत?
बिहार की सियासत में नई सरगर्मी, AIMIM के मंच पर दिखे आईपी गुप्ता, क्या महागठबंधन से दूरी के संकेत?
सिर्फ सेहत नहीं, स्किन के लिए भी कमाल है अमरूद, जानें घर पर कैसे तैयार करें असरदार फेस पैक
सिर्फ सेहत नहीं, स्किन के लिए भी कमाल है अमरूद, जानें घर पर कैसे तैयार करें असरदार फेस पैक
बसपा और कांग्रेस के बाद सपा में शामिल हुए नसीमुद्दीन सिद्दीकी, अखिलेश यादव बोले- इससे PDA को मिलेगी मजबूती
बसपा और कांग्रेस के बाद सपा में शामिल हुए नसीमुद्दीन सिद्दीकी, अखिलेश यादव बोले- इससे PDA को मिलेगी मजबूती
Post Office RD स्कीम में हर महीने ₹3500 निवेश करें तो 5 साल बाद कितना मिलेगा? जानें पूरी गणना
Post Office RD स्कीम में हर महीने ₹3500 निवेश करें तो 5 साल बाद कितना मिलेगा? जानें पूरी गणना
शहद की तासीर और सेवन का सही तरीका, जान लीजिए सेहत के लिए कितना फायदेमंद है हनी?
शहद की तासीर और सेवन का सही तरीका, जान लीजिए सेहत के लिए कितना फायदेमंद है हनी?