
जयपुर/नई दिल्ली: राजस्थान के झालावाड़ जिले के मनोहर थाना क्षेत्र में शुक्रवार को घटित दर्दनाक हादसे ने पूरे प्रदेश को हिला दिया है। एक सरकारी स्कूल की छत गिरने से सात मासूम बच्चों की जान चली गई और कई अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए। यह घटना केवल एक हादसा नहीं बल्कि सरकार की व्यवस्थागत विफलता और लापरवाही की मिसाल बन गई है। विपक्षी दलों, सामाजिक संगठनों और आमजन ने इस पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है।
डोटासरा का तीखा प्रहार:
राजस्थान कांग्रेस अध्यक्ष और पूर्व शिक्षा राज्यमंत्री गोविंद सिंह डोटासरा ने दिल्ली में इस हादसे को लेकर राज्य सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा, "यह केवल इत्तेफाक नहीं, बल्कि सरकार की आपराधिक लापरवाही के कारण हुआ कत्लेआम है।" उन्होंने बताया कि सरकार को बार-बार आगाह किया गया था कि राज्यभर में हजारों स्कूल भवन खस्ताहाल हैं, लेकिन इसके बावजूद समय पर मरम्मत या वैकल्पिक इंतजाम नहीं किए गए।
"बच्चों की सुरक्षा प्राथमिकता नहीं रही":
डोटासरा ने कहा कि भाजपा सरकार शिक्षा के बजट को बोझ मानती है। उन्होंने सवाल उठाया कि "जब मंत्रियों के बंगलों की मरम्मत के लिए तुरंत फंड जारी किया जा सकता है, तो स्कूलों की सुरक्षा के लिए क्यों नहीं?" उन्होंने चेताया कि यह वक्त राजनीति का नहीं है, बल्कि जिम्मेदारी उठाने का है। उन्होंने मांग की कि सरकार तुरंत सभी जर्जर स्कूलों की स्थिति की व्यापक समीक्षा करे और सुरक्षित वैकल्पिक इंतजाम सुनिश्चित करे।
पूर्व कार्यकाल की उपलब्धियों का जिक्र:
डोटासरा ने याद दिलाया कि जब वह शिक्षा मंत्री थे, तब शाला दर्पण पोर्टल के माध्यम से सभी स्कूलों की संरचनात्मक स्थिति का रिकॉर्ड तैयार करवाया गया था। उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में एक हजार करोड़ रुपये से ज्यादा की लागत से जर्जर स्कूलों की मरम्मत कराई गई थी। लेकिन वर्तमान भाजपा सरकार, उनके अनुसार, सिर्फ बयानबाजी तक सीमित रह गई है।
मुआवज़े और पुनर्निर्माण के लिए विशेष पैकेज की मांग:
डोटासरा ने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा से अपील की है कि वह इस गंभीर विषय पर संज्ञान लें और प्रदेशभर के जर्जर स्कूल भवनों के नवीनीकरण के लिए विशेष पैकेज की घोषणा करें। इसके साथ ही उन्होंने दिवंगत बच्चों के परिवारों के प्रति शोक संवेदना प्रकट की और घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना भी की।
विपक्ष के नेता टीकाराम जूली की संवेदना:
नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने भी इस दुखद घटना पर गहरी संवेदना व्यक्त की। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर पोस्ट करते हुए लिखा, "पीपलोदी, मनोहरथाना में सरकारी स्कूल भवन गिरने की घटना अत्यंत पीड़ादायक है। पांच बच्चों की मौत और 30 से अधिक बच्चों के घायल होने की खबर ने दिल दहला दिया है। मैं ईश्वर से दिवंगत आत्माओं की शांति और घायलों के शीघ्र स्वास्थ्य लाभ की प्रार्थना करता हूं।"
संयुक्त अभिभावक संघ ने मांगा शिक्षा मंत्री का इस्तीफा:
इसी बीच संयुक्त अभिभावक संघ ने इस घटना को शिक्षा विभाग और मंत्रालय की भारी नाकामी बताया है। संगठन के प्रवक्ता अभिषेक जैन बिट्टू ने दावा किया कि जनवरी में जब सरकारी हिंदी माध्यम स्कूलों को मर्ज किया गया था, तब स्वस्थ भवनों को हटाकर जर्जर भवनों को चालू रखा गया। उन्होंने कहा, "यह दुर्घटना नहीं, बल्कि एक सुनियोजित लापरवाही का परिणाम है।" उनकी मांग है कि शिक्षा मंत्री मदन दिलावर को नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए तत्काल इस्तीफा देना चाहिए।














