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स्वतंत्रता दिवस विशेष : जाने राष्ट्रीय ध्वज के विकास से जुड़े ऐतिहासिक पड़ावों के बारे में...

हम आपको हमारे राष्ट्रीय ध्वज के विकास में ऐतिहासिक पड़ावों के बारे में बताने जा रहे हैं।

Posts by : Ankur Mundra | Updated on: Wed, 15 Aug 2018 2:07:41

स्वतंत्रता दिवस विशेष :  जाने राष्ट्रीय ध्वज के विकास से जुड़े ऐतिहासिक पड़ावों के बारे में...

हर स्वतंत्र देश का अपना एक राष्ट्रीय ध्वज होता हैं, जो उस देश की शान होता हैं। भारत का भी अपना राष्ट्रीय ध्वज हैं जिसे तिरंगे के नाम से जाना जाता हैं। तिरंगे का भी अपना रोचक इतिहास है। राष्ट्रीय ध्वज के इतिहास में उसके कई स्वरुप आए हैं और अपने आरंभ से यह कई परिवर्तनों से गुजरा। कई दौर से गुजरने के बाद तिरंगे को हमारे देश के राष्ट्रीय ध्वज के रूप में सम्मान मिला। आज हम आपको हमारे राष्ट्रीय ध्वज के विकास में ऐतिहासिक पड़ावों के बारे में बताने जा रहे हैं।

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* प्रथम राष्ट्रीय ध्वज

7 अगस्त 1906 को पारसी बागान चौक (ग्रीन पार्क) कलकत्ता में फहराया गया था जिसे अब कोलकाता कहते हैं। इस ध्वज को लाल, पीले और हरे रंग की क्षैतिज पट्टियों से बनाया गया था।

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* द्वितीय ध्वज

इसको पेरिस में मैडम कामा और 1907 में उनके साथ निर्वासित किए गए कुछ क्रांतिकारियों द्वारा फहराया गया था (कुछ के अनुसार 1905 में)। यह भी पहले ध्वज के समान था सिवाय इसके कि इसमें सबसे ऊपरी की पट्टी पर केवल एक कमल था किंतु सात तारे सप्तऋषि को दर्शाते हैं। यह ध्वज बर्लिन में हुए समाजवादी सम्मेलन में भी प्रदर्शित किया गया था।

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* तृतीय ध्वज

यह 1917 में आया जब हमारे राजनैतिक संघर्ष ने एक निश्चित मोड लिया। डॉ। एनी बीसेंट और लोकमान्य तिलक ने घरेलू शासन आंदोलन के दौरान इसे फहराया। इस ध्वज में 5 लाल और 4 हरी क्षैतिज पट्टियां एक के बाद एक और सप्तऋषि के अभिविन्यास में इस पर बने सात सितारे थे। बांयी और ऊपरी किनारे पर (खंभे की ओर) यूनियन जैक था। एक कोने में सफेद अर्धचंद्र और सितारा भी था।

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* चतुर्थ ध्वज

अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के सत्र के दौरान जो 1921 में बेजवाड़ा (अब विजयवाड़ा) में किया गया यहां आंध्र प्रदेश के एक युवक ने एक झंडा बनाया और गांधी जी को दिया। यह दो रंगों का बना था। लाल और हरा रंग जो दो प्रमुख समुदायों अर्थात हिन्दू और मुस्लिम का प्रतिनिधित्व करता है। गांधी जी ने सुझाव दिया कि भारत के शेष समुदाय का प्रतिनिधित्व करने के लिए इसमें एक सफेद पट्टी और राष्ट्र की प्रगति का संकेत देने के लिए एक चलता हुआ चरखा होना चाहिए।

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* पंचम ध्वज

वर्ष 1931 ध्वज के इतिहास में एक यादगार वर्ष है। तिरंगे ध्वज को हमारे राष्ट्रीय ध्वज के रूप में अपनाने के लिए एक प्रस्ताव पारित किया गया । यह ध्वज जो वर्तमान स्वरूप का पूर्वज है, केसरिया, सफेद और मध्य में गांधी जी के चलते हुए चरखे के साथ था। तथापि यह स्पष्ट रूप से बताया गया इसका कोई साम्प्रदायिक महत्व नहीं था और इसकी व्याख्या इस प्रकार की जानी थी।

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* अंतिम स्वरुप

22 जुलाई 1947 को संविधान सभा ने इसे मुक्त भारतीय राष्ट्रीय ध्वज के रूप में अपनाया। स्वतंत्रता मिलने के बाद इसके रंग और उनका महत्व बना रहा। केवल ध्वज में चलते हुए चरखे के स्थान पर सम्राट अशोक के धर्म चक्र को दिखाया गया। इस प्रकार कांग्रेस पार्टी का तिरंगा ध्वज अंतत: स्वतंत्र भारत का तिरंगा ध्वज बना।

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