राजस्थान में पिछले दो महीनों के दौरान सरकारी अस्पतालों में प्रसव के बाद 18 महिलाओं की मौत का मामला लगातार तूल पकड़ता जा रहा है। इस गंभीर मुद्दे पर जहां सरकार से जवाबदेही और संवेदनशीलता की अपेक्षा की जा रही थी, वहीं प्रदेश के चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर का एक वीडियो सामने आने के बाद नया विवाद खड़ा हो गया है। वायरल वीडियो में मंत्री मीडिया के सवालों के बीच हंसते हुए नजर आते हैं और जाते-जाते कहते हैं, "अब मिलेंगे ब्रेक के बाद।" उनके इस व्यवहार को लेकर विपक्ष के साथ-साथ सोशल मीडिया पर भी तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।
घटना का वीडियो सामने आने के बाद लोगों ने सवाल उठाए हैं कि जब कई परिवार अपने प्रियजनों को खोने के दर्द से गुजर रहे हैं, ऐसे समय में सरकार के जिम्मेदार मंत्री का यह रवैया कितना उचित है। वीडियो वायरल होने के बाद यह मामला राजनीतिक और सामाजिक दोनों स्तरों पर चर्चा का विषय बन गया है।
पत्रकारों के सवालों के बीच मंत्री की टिप्पणी बनी विवाद की वजह
यह पूरा घटनाक्रम उस समय का बताया जा रहा है जब बीकानेर के पीबीएम अस्पताल में प्रसूताओं की मौत के मामलों को लेकर पत्रकार स्वास्थ्य मंत्री से लगातार सवाल पूछ रहे थे। आरोप लगाए जा रहे हैं कि अस्पतालों में संक्रमित दवाओं के इस्तेमाल, संक्रमण और स्वास्थ्य सेवाओं की खामियों के कारण कई महिलाओं की जान गई, जबकि कुछ मरीजों की किडनी तक प्रभावित होने की जानकारी सामने आई है।
इन्हीं सवालों के बीच मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर ने अपने पास बैठे अस्पताल के प्रिंसिपल की ओर देखते हुए मुस्कुराकर कहा, "प्रिंसिपल साहब कहां हैं, बताइए कैसी हालत में आई थीं? पैदल चलती, नाचती आई थीं या बीमार?" यह टिप्पणी कैमरे में रिकॉर्ड हो गई और देखते ही देखते सोशल मीडिया पर वायरल होने लगी।
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— राजस्थानी ट्वीट (@8PMnoCM) July 14, 2026
इसके बाद जब पत्रकारों ने जांच, जिम्मेदारी और मौतों के कारणों को लेकर आगे सवाल पूछने चाहे, तो मंत्री अपनी सीट से उठे, कैमरे की ओर हाथ हिलाया और हंसते हुए कहा, "अब मिलेंगे ब्रेक के बाद।" यही बयान अब पूरे विवाद का केंद्र बन गया है।
सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रिया, विपक्ष ने साधा निशाना
वीडियो वायरल होने के बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर लोगों ने स्वास्थ्य मंत्री के व्यवहार की जमकर आलोचना की। कई यूजर्स ने इसे पीड़ित परिवारों के दर्द के प्रति असंवेदनशील रवैया बताया, जबकि विपक्षी दलों ने भी सरकार को घेरते हुए इसे प्रशासनिक जवाबदेही से बचने की कोशिश करार दिया।
आलोचकों का कहना है कि जब राज्य के अलग-अलग सरकारी अस्पतालों में लगातार प्रसूताओं की मौत की घटनाएं सामने आ रही हैं, तब सरकार को पारदर्शी जांच और ठोस कार्रवाई करनी चाहिए थी। इसके बजाय मंत्री की सार्वजनिक प्रतिक्रिया ने लोगों के बीच और अधिक नाराजगी पैदा कर दी है।
सरकार ने लापरवाही से किया इनकार, मरीजों की स्थिति को बताया कारण
मामले को लेकर सरकार का कहना है कि इन मौतों के पीछे किसी प्रकार की चिकित्सकीय लापरवाही नहीं पाई गई है। स्वास्थ्य विभाग का तर्क है कि कई बार निजी अस्पताल गंभीर स्थिति में मरीजों को सरकारी अस्पतालों में रेफर कर देते हैं, जिससे उपचार के बावजूद उन्हें बचाना संभव नहीं हो पाता।
हालांकि पीड़ित परिवारों का आरोप इससे बिल्कुल अलग है। उनका कहना है कि अस्पतालों में घटिया गुणवत्ता की दवाएं, संक्रमण की समस्या और ऑपरेशन थिएटर की खराब व्यवस्थाएं इन मौतों की बड़ी वजह हैं। उनका आरोप है कि इन गंभीर सवालों का जवाब देने के बजाय सरकार जिम्मेदारी से बचने का प्रयास कर रही है।
जांच समितियां बनीं, लेकिन रिपोर्ट अब तक नहीं आई सामने
बीकानेर, कोटा और जोधपुर सहित विभिन्न सरकारी अस्पतालों में हुई इन मौतों के बाद जांच के लिए अलग-अलग समितियों का गठन किया गया था। हालांकि अब तक किसी भी समिति की अंतिम रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं की गई है, जिससे पूरे मामले को लेकर सवाल लगातार बने हुए हैं।
इस बीच दवाओं की गुणवत्ता को लेकर भी चिंता जताई जा चुकी है। विभिन्न स्तरों पर स्वास्थ्य व्यवस्थाओं की समीक्षा की मांग उठ रही है। ऐसे माहौल में स्वास्थ्य मंत्री का कैमरे के सामने हंसते हुए "ब्रेक के बाद मिलेंगे" कहना विवाद का सबसे बड़ा कारण बन गया है। अब यह मामला केवल अस्पतालों की व्यवस्था तक सीमित नहीं रह गया, बल्कि सरकार की संवेदनशीलता और जवाबदेही पर भी गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।














