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परिसीमन पर विजय थलपति की बैठक से विपक्ष ने बनाई दूरी, 37 सांसदों ने किया बहिष्कार

परिसीमन पर विजय थलपति की सर्वदलीय बैठक से DMK और AIADMK समेत 37 सांसदों ने दूरी बनाई। जानें बैठक का पूरा मामला, विपक्ष के बहिष्कार और परिसीमन बिल 2026 से जुड़ी अहम बातें।

Posts by : Jhanvi Gupta | Updated on: Sat, 08 Aug 2026 4:58:09

परिसीमन पर विजय थलपति की बैठक से विपक्ष ने बनाई दूरी, 37 सांसदों ने किया बहिष्कार

चेन्नई। तमिलनाडु की सियासत में शनिवार को परिसीमन के मुद्दे पर बुलाई गई एक अहम बैठक को लेकर राजनीतिक टकराव देखने को मिला। राज्य के मुख्यमंत्री विजय थलपति ने परिसीमन को लेकर तमिलनाडु का साझा पक्ष तैयार करने के उद्देश्य से लोकसभा और राज्यसभा सांसदों की सर्वदलीय बैठक बुलाई थी, लेकिन विपक्षी दलों के बड़े हिस्से ने इसमें शामिल होने से इनकार कर दिया।

बैठक में राज्य के कुल 57 सांसदों को आमंत्रित किया गया था, लेकिन इनमें से 37 सांसदों ने बैठक से दूरी बनाने का फैसला किया है। विपक्षी दल DMK और AIADMK समेत कई राजनीतिक दलों के सांसदों के बैठक में शामिल नहीं होने के कारण मुख्यमंत्री की इस पहल को बड़ा झटका माना जा रहा है। बैठक शनिवार दोपहर 3 बजे चेन्नई के कलैवानर अरंगम में आयोजित की जानी है।

57 में से सिर्फ 20 सांसदों के पहुंचने की संभावना

बैठक को लेकर सामने आए सांसदों के रुख से संकेत मिल रहा है कि मुख्यमंत्री विजय थलपति की ओर से बुलाई गई इस सर्वदलीय बैठक को व्यापक राजनीतिक समर्थन नहीं मिल पाया है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार कुल 57 सांसदों में से 20 सांसदों के ही बैठक में शामिल होने की संभावना है, जबकि 37 सांसदों ने इससे दूर रहने का फैसला किया है।

बैठक में शामिल होने वाले 20 सांसदों में कांग्रेस के 12 सांसद बताए जा रहे हैं। इसके अलावा VCK के 2, CPI के 2, CPI(M) के 2, MDMK का 1 और IUML का 1 सांसद बैठक में हिस्सा ले सकता है।

वहीं, बैठक का बहिष्कार करने वाले सांसदों में सबसे बड़ी संख्या DMK की है। पार्टी के सभी 30 सांसदों ने मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में होने वाली इस बैठक में शामिल नहीं होने का फैसला किया है। इसके अतिरिक्त AIADMK के 4 सांसदों तथा PMK, MNM और DMDK के एक-एक सांसद के भी बैठक से बाहर रहने की जानकारी सामने आई है।

इस तरह कुल 37 सांसदों के बैठक से दूर रहने के फैसले ने मुख्यमंत्री की पहल को लेकर राजनीतिक बहस को और तेज कर दिया है। खास तौर पर DMK के सामूहिक बहिष्कार ने इस बैठक के राजनीतिक महत्व को और बढ़ा दिया है।

DMK ने बैठक को बताया 'अनावश्यक'

बैठक के बहिष्कार को लेकर DMK सांसद कनिमोझी ने मुख्यमंत्री विजय थलपति पर निशाना साधा। उन्होंने इस बैठक को 'अनावश्यक' बताते हुए कहा कि इसके पीछे वास्तविक मुद्दे से लोगों का ध्यान हटाने की कोशिश की जा रही है।

कनिमोझी के मुताबिक, फिलहाल केंद्र सरकार की ओर से संसद के मौजूदा सत्र में परिसीमन से जुड़ा कोई बिल पेश किए जाने की आधिकारिक जानकारी नहीं दी गई है। इसके अलावा संशोधित ड्राफ्ट बिल भी उपलब्ध नहीं है। ऐसे में उनके अनुसार इस बैठक में चर्चा के लिए कोई ठोस नया दस्तावेज या प्रस्ताव मौजूद नहीं है।

DMK की ओर से यह भी कहा गया कि पार्टी का मौजूदा फोकस मेकेदातू और कावेरी से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर है। पार्टी सूत्रों ने स्पष्ट किया कि जब सरकार मेकेदातू मुद्दे को लेकर सर्वदलीय बैठक बुलाएगी, तब DMK उस चर्चा में शामिल होने पर विचार करेगी।

सरकारी सूत्रों के मुताबिक, तमिलनाडु के मुख्य सचिव एम. साई कुमार की ओर से 6 और 7 अगस्त को सांसदों को अलग-अलग निमंत्रण भेजे गए थे। इसके बावजूद DMK ने बैठक में शामिल नहीं होने का निर्णय लिया और अपने रुख पर कायम रहने की बात कही।

कांग्रेस ने DMK के फैसले पर साधा निशाना

जहां DMK समेत कई दलों ने बैठक से दूरी बनाई, वहीं कांग्रेस ने मुख्यमंत्री विजय थलपति की पहल का समर्थन किया है। कांग्रेस सांसद मणिकम टैगोर ने बैठक में शामिल होने के फैसले को तमिलनाडु के हितों से जोड़ते हुए विपक्षी दलों पर परोक्ष निशाना साधा।

मणिकम टैगोर ने कहा कि जो लोग अपनी राजनीति को तमिलनाडु के हितों से अधिक महत्व देते हैं, वे बैठक में नहीं आने का फैसला कर सकते हैं। लेकिन जो लोग राज्य को राजनीति से ऊपर रखते हैं, वे मुख्यमंत्री की ओर से बुलाई गई सर्वदलीय बैठक में शामिल होंगे।

उन्होंने कहा कि यह मामला किसी एक राजनीतिक दल के फायदे या नुकसान का विषय नहीं है, बल्कि तमिलनाडु के अधिकारों, हितों और भविष्य से जुड़ा हुआ सवाल है। कांग्रेस सांसद ने कहा कि राज्य की जनता यह देख रही है कि महत्वपूर्ण समय पर कौन तमिलनाडु के साथ खड़ा होता है और कौन राजनीतिक कारणों से पीछे हटता है।

कांग्रेस फिलहाल तमिलनाडु में सत्तारूढ़ तमिलगा वेत्री कषगम यानी TVK की सहयोगी पार्टी है। ऐसे में कांग्रेस सांसद का बैठक के समर्थन में खुलकर सामने आना राज्य की मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों में भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

परिसीमन को लेकर मुख्यमंत्री ने क्यों बुलाई बैठक?

मुख्यमंत्री विजय थलपति की ओर से बुलाई गई इस बैठक का मुख्य उद्देश्य परिसीमन प्रक्रिया को लेकर तमिलनाडु के सभी राजनीतिक दलों और सांसदों के बीच एक साझा रुख तैयार करना बताया गया है।

दक्षिण भारतीय राज्यों में परिसीमन को लेकर लंबे समय से चिंता जताई जाती रही है। आशंका है कि अगर लोकसभा सीटों के पुनर्निर्धारण का आधार जनसंख्या के आंकड़ों को बनाया जाता है, तो अपेक्षाकृत कम जनसंख्या वृद्धि वाले दक्षिण भारतीय राज्यों की संसदीय हिस्सेदारी प्रभावित हो सकती है।

इसी चिंता को ध्यान में रखते हुए मुख्यमंत्री ने सांसदों को एक मंच पर लाकर इस मुद्दे पर राज्य की सामूहिक रणनीति तय करने की कोशिश की है। बैठक में परिसीमन से जुड़े संभावित प्रभावों, राज्य के राजनीतिक प्रतिनिधित्व और भविष्य की रणनीति पर चर्चा किए जाने की उम्मीद है।

लोकसभा और राज्यसभा सांसदों की यह बैठक शनिवार दोपहर 3 बजे चेन्नई स्थित कलैवानर अरंगम में आयोजित की जानी है। हालांकि, बड़ी संख्या में सांसदों के बहिष्कार के कारण बैठक में व्यापक राजनीतिक सहमति बनना चुनौतीपूर्ण हो सकता है।

क्या है परिसीमन बिल 2026?

परिसीमन बिल 2026 को 16 अप्रैल 2026 को लोकसभा में पेश किया गया था। प्रस्तावित कानून का उद्देश्य देश में लोकसभा और विधानसभा निर्वाचन क्षेत्रों का नए सिरे से सीमांकन करना था। इसके साथ ही लोकसभा में सीटों की संख्या बढ़ाकर 850 करने और महिला आरक्षण को लागू करने का प्रस्ताव भी इसमें शामिल था।

हालांकि, यह विधेयक संसद से पारित नहीं हो सका। इसे पारित कराने के लिए सदन में मौजूद और मतदान करने वाले सदस्यों के बीच जरूरी दो-तिहाई विशेष बहुमत हासिल नहीं हो पाया था।

परिसीमन की प्रक्रिया को लेकर दक्षिण भारतीय राज्यों में विशेष चिंता का कारण संसद में उनके प्रतिनिधित्व पर संभावित असर है। तमिलनाडु समेत कई दक्षिणी राज्यों का तर्क रहा है कि जिन राज्यों ने जनसंख्या नियंत्रण और सामाजिक विकास के क्षेत्र में बेहतर प्रदर्शन किया है, उन्हें इसका राजनीतिक नुकसान नहीं उठाना चाहिए।

इसी पृष्ठभूमि में तमिलनाडु सरकार द्वारा बुलाई गई सर्वदलीय बैठक को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हालांकि, DMK और AIADMK जैसे प्रमुख दलों के सांसदों की अनुपस्थिति ने बैठक के उद्देश्य और राजनीतिक प्रभाव को लेकर नई बहस शुरू कर दी है।

अब निगाहें इस बात पर रहेंगी कि बैठक में शामिल होने वाले 20 सांसद परिसीमन को लेकर किस तरह का साझा रुख अपनाते हैं और क्या मुख्यमंत्री विजय थलपति तमिलनाडु के लिए कोई व्यापक राजनीतिक रणनीति तैयार करने में सफल हो पाते हैं। दूसरी ओर, विपक्षी दलों के बहिष्कार से यह भी स्पष्ट हो गया है कि परिसीमन का मुद्दा आने वाले दिनों में तमिलनाडु की राजनीति में एक बड़े राजनीतिक विवाद का रूप ले सकता है।

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