जयपुर स्थित राजस्थान यूनिवर्सिटी में मंगलवार (4 अगस्त) देर शाम भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सांसद कंगना रनौत के एक विवादित बयान के विरोध में छात्रों ने प्रदर्शन किया। विरोध के दौरान छात्र-छात्राओं ने विश्वविद्यालय परिसर में उनका पुतला जलाकर अपना आक्रोश जताया। प्रदर्शन के दौरान पुतले को परिसर में बने एक ट्री गार्ड के भीतर रखकर आग लगाई गई। इस घटनाक्रम के बाद अब एक नए विवाद की भी संभावना जताई जा रही है, क्योंकि कुछ लोगों ने ट्री गार्ड के भीतर पुतला जलाने के तरीके पर आपत्ति दर्ज कराई है।
हालांकि मौके की तस्वीरों और वीडियो में ट्री गार्ड के भीतर कोई पौधा दिखाई नहीं दे रहा है। बताया जा रहा है कि जिस स्थान पर पुतला जलाया गया, वहां ट्री गार्ड तो मौजूद था, लेकिन उसके अंदर कोई पौधा नहीं लगा हुआ था। इसके बावजूद इस पूरे घटनाक्रम को लेकर सोशल मीडिया और स्थानीय स्तर पर बहस शुरू हो गई है।
नारों के साथ जताया विरोध
प्रदर्शन के दौरान छात्रों ने कंगना रनौत के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। प्रदर्शनकारियों ने "बालिकाओं का ये अपमान नहीं सहेगा हिंदुस्तान" जैसे नारे लगाते हुए सांसद के बयान की कड़ी आलोचना की। छात्रों का कहना था कि सार्वजनिक जीवन में रहने वाले जनप्रतिनिधियों को अपने शब्दों का चयन बेहद जिम्मेदारी के साथ करना चाहिए।
प्रदर्शन में शामिल छात्र नेताओं ने कहा कि महिलाओं और बेटियों के सम्मान से जुड़े मामलों पर किसी भी प्रकार की आपत्तिजनक टिप्पणी स्वीकार नहीं की जा सकती। इसी मांग को लेकर छात्रों ने विश्वविद्यालय परिसर में विरोध प्रदर्शन आयोजित किया।
एफआईआर दर्ज करने की मांग दोहराई
छात्र नेता विनोद भूदोली ने बताया कि कंगना रनौत के बयान के विरोध में पहले ही गांधी नगर थाने में शिकायत दी जा चुकी है। उनका कहना है कि शिकायत में सांसद के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग की गई थी, लेकिन पुलिस ने मामला दर्ज करने के बजाय केवल शिकायत स्वीकार की है।
भूदोली ने कहा कि यदि किसी अन्य व्यक्ति द्वारा ऐसा बयान दिया जाता तो उसके खिलाफ तुरंत कानूनी कार्रवाई होती। उन्होंने सरकार और पुलिस प्रशासन से मांग की कि मामले में निष्पक्ष कार्रवाई करते हुए सांसद के खिलाफ विधिक प्रक्रिया के तहत एफआईआर दर्ज की जाए।
सार्वजनिक माफी की भी उठी मांग
प्रदर्शन के दौरान छात्र प्रतिनिधि किशन बैरवा ने कहा कि महिलाओं और बेटियों के सम्मान को ठेस पहुंचाने वाले बयान किसी भी लोकतांत्रिक समाज में स्वीकार नहीं किए जा सकते। उन्होंने कहा कि यदि किसी जनप्रतिनिधि की टिप्पणी से समाज के एक बड़े वर्ग की भावनाएं आहत हुई हैं तो उन्हें सार्वजनिक रूप से माफी मांगनी चाहिए।
वहीं छात्र प्रतिनिधि विकास बिदुड़ी ने भी कंगना रनौत की टिप्पणी की आलोचना करते हुए कहा कि इस तरह की भाषा किसी सांसद के पद की गरिमा के अनुरूप नहीं मानी जा सकती। उन्होंने कहा कि जनप्रतिनिधियों से मर्यादित और जिम्मेदार व्यवहार की अपेक्षा की जाती है तथा सार्वजनिक मंचों पर दिए जाने वाले बयानों में भी उसी गरिमा का पालन होना चाहिए।
फिलहाल इस पूरे मामले को लेकर विश्वविद्यालय परिसर में हुई घटना और छात्रों की ओर से उठाई गई मांगों पर राजनीतिक प्रतिक्रियाओं का इंतजार किया जा रहा है। वहीं पुतला दहन को लेकर उठे नए विवाद पर भी आने वाले दिनों में बहस और तेज होने की संभावना जताई जा रही है।














