न्यूज़
CJP Yogi Adityanath Jyotish Narendra Modi Rahul Gandhi

बेगूसराय में टूटी टांग पर प्लास्टर की जगह बांधा गत्ते का टुकड़ा, वीडियो वायरल होते ही मचा हड़कंप; जांच के आदेश

बेगूसराय के सरकारी अस्पताल में फ्रैक्चर मरीज के पैर पर प्लास्टर की जगह गत्ते का स्प्लिंट लगाने का वीडियो वायरल हुआ। प्रशासन ने मामले की जांच के आदेश दिए हैं।

Posts by : Jhanvi Gupta | Updated on: Sat, 08 Aug 2026 8:43:43

बेगूसराय में टूटी टांग पर प्लास्टर की जगह बांधा गत्ते का टुकड़ा, वीडियो वायरल होते ही मचा हड़कंप; जांच के आदेश

बिहार की सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था एक बार फिर सवालों के घेरे में है। बेगूसराय के एक सरकारी अस्पताल से सामने आए मामले ने चिकित्सा व्यवस्था और अस्पताल में उपलब्ध सुविधाओं को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सड़क हादसे में पैर की हड्डी टूटने के बाद एक मरीज के घायल पैर पर प्लास्टर लगाने के बजाय कार्टन या गत्ते का सहारा देकर उसे बांध दिया गया। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आने के बाद तेजी से वायरल हो गया।

वीडियो के वायरल होते ही स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के बीच हलचल बढ़ गई। मामले को गंभीरता से लेते हुए प्रशासन ने पूरे घटनाक्रम की जांच शुरू करने के निर्देश दिए हैं। हालांकि, स्वास्थ्य अधिकारियों का कहना है कि शुरुआती उपचार के दौरान फ्रैक्चर वाले हिस्से को स्थिर रखने के लिए अस्थायी स्प्लिंट का इस्तेमाल किया जा सकता है। अब जांच के जरिए यह पता लगाया जा रहा है कि मरीज को किस परिस्थिति में गत्ते का स्प्लिंट लगाया गया और अस्पताल में उस समय जरूरी चिकित्सा सामग्री उपलब्ध थी या नहीं।

15 जुलाई की रात हुई थी घटना

एक वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारी ने शुक्रवार को बताया कि बिहार सरकार ने बेगूसराय जिले में सड़क हादसे में घायल हुए एक व्यक्ति के शुरुआती उपचार से जुड़े मामले की जांच शुरू कर दी है। घटना 15 जुलाई की रात की बताई जा रही है। हालांकि, उस समय यह मामला सार्वजनिक तौर पर सामने नहीं आया था। बाद में सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हुआ, जिसमें मरीज के टूटे हुए पैर को सहारा देने के लिए कार्टन को स्प्लिंट की तरह बांधा गया दिखाई दे रहा था।

अधिकारियों के अनुसार, नवकोठी थाना क्षेत्र के महेश्वरा गांव निवासी कृष्ण कुमार 15 जुलाई की रात सड़क दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल हो गए थे। हादसे में उनके पैर में फ्रैक्चर हुआ था। दुर्घटना के बाद उन्हें इलाज के लिए मंझौल अनुमंडलीय अस्पताल ले जाया गया। यहां प्राथमिक उपचार के दौरान उनके घायल पैर को स्थिर रखने के लिए कार्टन का इस्तेमाल किया गया।

बेगूसराय के सिविल सर्जन अशोक कुमार ने इस मामले पर कहा कि इसे सीधे तौर पर मेडिकल लापरवाही कहना उचित नहीं होगा, क्योंकि आपात स्थिति में चोटिल अंग को स्थिर रखने के लिए अस्थायी उपाय किए जा सकते हैं। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि प्रशासन ने जांच शुरू कर दी है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि उस समय अस्पताल में किन परिस्थितियों में यह प्रक्रिया अपनाई गई थी।

मजिस्ट्रेट ने भी दिए जांच के निर्देश

अधिकारियों के मुताबिक, मंझौल अनुमंडलीय अस्पताल में मरीज के फ्रैक्चर वाले पैर को स्थिर करने के बाद उसे बेहतर इलाज के लिए बेगूसराय सदर अस्पताल रेफर कर दिया गया था। वहां कृष्ण कुमार का आगे उपचार किया गया और बताया गया कि उनका इलाज सफल रहा। इसके बाद मरीज को अस्पताल से छुट्टी भी दे दी गई।

दिलचस्प बात यह है कि घटना के काफी समय बाद इस मामले का वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आया। वीडियो में मरीज के पैर पर गत्ते का टुकड़ा बंधा हुआ दिखाई दे रहा था। वीडियो वायरल होने के बाद प्रशासन ने मामले का संज्ञान लिया और जांच शुरू करने का फैसला किया।

बेगूसराय के जिला मजिस्ट्रेट श्रीकांत शास्त्री ने भी मामले को गंभीरता से लेते हुए मंझौल के सब-डिविजनल ऑफिसर को पूरे घटनाक्रम की जांच करने का निर्देश दिया है। जांच में यह देखा जाएगा कि मरीज को प्राथमिक उपचार के दौरान कौन-कौन सी सुविधाएं उपलब्ध कराई गईं, अस्पताल में आवश्यक उपकरण मौजूद थे या नहीं और गत्ते का इस्तेमाल किन परिस्थितियों में किया गया।

फ्रैक्चर में अस्थायी स्प्लिंट का इस्तेमाल क्यों किया जाता है?

चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार, फ्रैक्चर के मामलों में शुरुआती उपचार का एक महत्वपूर्ण उद्देश्य घायल अंग को ज्यादा हिलने-डुलने से रोकना होता है। ऐसा करने से हड्डी के खिसकने या चोट बढ़ने की आशंका को कम किया जा सकता है। इसके लिए अस्पतालों में आमतौर पर स्प्लिंट का इस्तेमाल किया जाता है।

अस्पताल के इंचार्ज अभिनव प्रियदर्शी ने बताया कि यदि किसी आपात स्थिति में स्टैंडर्ड फ्रैक्चर स्प्लिंट तत्काल उपलब्ध नहीं हो, तो कार्डबोर्ड, लकड़ी या किसी अन्य कठोर और उपयुक्त वस्तु का इस्तेमाल अस्थायी स्प्लिंट के तौर पर किया जा सकता है। उनका कहना है कि यह प्राथमिक चिकित्सा का हिस्सा हो सकता है, खासकर तब जब मरीज को आगे के इलाज के लिए दूसरे अस्पताल में ले जाना हो।

उन्होंने बताया कि अस्थायी स्प्लिंट का उद्देश्य टूटी हुई हड्डी को अपनी जगह पर स्थिर रखना होता है, ताकि मरीज को अस्पताल ले जाते समय चोट और गंभीर न हो। इससे अनावश्यक मूवमेंट कम करने और दर्द को नियंत्रित रखने में भी मदद मिल सकती है। हालांकि, इसके बाद मरीज को उचित चिकित्सकीय जांच और फ्रैक्चर के अनुसार जरूरी उपचार मिलना बेहद महत्वपूर्ण होता है।

अस्पताल में विशेषज्ञ और जरूरी संसाधनों की कमी


मामले को लेकर अस्पताल के मैनेजर गौरी शंकर ने भी अस्पताल की सुविधाओं और संसाधनों से जुड़ी स्थिति पर जानकारी दी। उन्होंने बताया कि अस्पताल में ऑर्थोपेडिक विशेषज्ञों की संख्या सीमित है। इसके अलावा कुछ जरूरी चिकित्सा सामग्री, जिनमें फ्रैक्चर स्प्लिंट भी शामिल हैं, पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध नहीं हैं।

उन्होंने कहा कि सीमित संसाधनों के बावजूद अस्पताल में आने वाले मरीजों को उपलब्ध सुविधाओं के आधार पर सुरक्षित और प्रभावी प्राथमिक उपचार देने की कोशिश की जाती है। हालांकि, सोशल मीडिया पर वीडियो सामने आने के बाद अब प्रशासनिक जांच के जरिए यह स्पष्ट करने की कोशिश की जा रही है कि इस मामले में किसी स्तर पर लापरवाही हुई थी या फिर मरीज को तत्काल चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराने के लिए अस्थायी व्यवस्था का इस्तेमाल किया गया था।

फिलहाल जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि पूरे मामले में अस्पताल के कर्मचारियों की भूमिका क्या थी और गत्ते का इस्तेमाल चिकित्सा प्रक्रिया के तहत किया गया या अस्पताल में जरूरी संसाधनों की कमी के कारण ऐसा करना पड़ा। प्रशासन की जांच रिपोर्ट के बाद ही आगे की कार्रवाई को लेकर तस्वीर साफ होगी।

राज्य
View More

Shorts see more

UPI PIN कैसे बदलें? जानें आसान तरीका और कब करना चाहिए PIN रीसेट

UPI PIN कैसे बदलें? जानें आसान तरीका और कब करना चाहिए PIN रीसेट

  • UPI से पैसे भेजना आसान है, इसलिए इसकी सुरक्षा के लिए PIN का ध्यान रखना जरूरी है।
  • समय-समय पर UPI PIN बदलने से ऑनलाइन फ्रॉड का खतरा कम होता है।
  • PIN भूलने पर डेबिट कार्ड और OTP से आसानी से रीसेट किया जा सकता है।
read more

ताजा खबरें
View More

PM मोदी ने एकतानगर में ₹400 करोड़ से ज्यादा की परियोजनाओं का किया उद्घाटन, IRCTC होटल समेत कई सुविधाएं शुरू
PM मोदी ने एकतानगर में ₹400 करोड़ से ज्यादा की परियोजनाओं का किया उद्घाटन, IRCTC होटल समेत कई सुविधाएं शुरू
विपक्ष की एकजुटता में कहां पड़ रही दरार? 1 नवंबर की रैली में शामिल नहीं होंगी ये पार्टियां
विपक्ष की एकजुटता में कहां पड़ रही दरार? 1 नवंबर की रैली में शामिल नहीं होंगी ये पार्टियां
कॉकरोच जनता पार्टी की दिवाली पार्टी में जुटेंगे विपक्षी नेता, दीपके और रांका की मौजूदगी पर भी नजर
कॉकरोच जनता पार्टी की दिवाली पार्टी में जुटेंगे विपक्षी नेता, दीपके और रांका की मौजूदगी पर भी नजर
‘कल मिलते हैं, साथ चलते हैं’, राहुल गांधी ने साझा किया रैली का रूट मैप
‘कल मिलते हैं, साथ चलते हैं’, राहुल गांधी ने साझा किया रैली का रूट मैप
‘CEC को जाना ही होगा, SIR पर रोक लगानी होगी’, नेहा बोरा ने रामलीला मैदान रैली से पहले किया बड़ा ऐलान
‘CEC को जाना ही होगा, SIR पर रोक लगानी होगी’, नेहा बोरा ने रामलीला मैदान रैली से पहले किया बड़ा ऐलान
दिल्ली : मंगोलपुरी में जूता फैक्ट्री में भीषण आग, 4 मजदूरों की मौत, 2 गंभीर
दिल्ली : मंगोलपुरी में जूता फैक्ट्री में भीषण आग, 4 मजदूरों की मौत, 2 गंभीर
सोना ₹12,300 और चांदी ₹48,000 सस्ती, अक्टूबर में Gold-Silver की कीमतों में बड़ी गिरावट
सोना ₹12,300 और चांदी ₹48,000 सस्ती, अक्टूबर में Gold-Silver की कीमतों में बड़ी गिरावट
स्टैच्यू ऑफ यूनिटी घूमने का बना रहे हैं प्लान? जान लें टिकट का चार्ज, समय और पहुंचने का आसान रास्ता
स्टैच्यू ऑफ यूनिटी घूमने का बना रहे हैं प्लान? जान लें टिकट का चार्ज, समय और पहुंचने का आसान रास्ता
शरीर में विटामिन D की कमी होने पर दिख सकते हैं ये लक्षण, समय रहते ऐसे करें पहचान
शरीर में विटामिन D की कमी होने पर दिख सकते हैं ये लक्षण, समय रहते ऐसे करें पहचान
इतिहास, समुद्र और एडवेंचर का संगम है इजरायल, घूमने के लिए ये 7 जगहें हैं खास
इतिहास, समुद्र और एडवेंचर का संगम है इजरायल, घूमने के लिए ये 7 जगहें हैं खास
हफ्ते में दो बार मछली खाने की सलाह क्यों देते हैं विशेषज्ञ? जानें कौन-सी मछली है बेहतर
हफ्ते में दो बार मछली खाने की सलाह क्यों देते हैं विशेषज्ञ? जानें कौन-सी मछली है बेहतर
अकेले सफर का है शौक तो इन बातों को न करें नजरअंदाज, सुरक्षित रहेगी आपकी यात्रा
अकेले सफर का है शौक तो इन बातों को न करें नजरअंदाज, सुरक्षित रहेगी आपकी यात्रा
खाते वक्त बार-बार दांतों के बीच आ रही है जीभ? शरीर में इन कमियों का हो सकता है संकेत
खाते वक्त बार-बार दांतों के बीच आ रही है जीभ? शरीर में इन कमियों का हो सकता है संकेत
कभी नीली तो कभी फिरोजी नजर आती है पैंगोंग झील, जानें इस खूबसूरत जगह की खासियत
कभी नीली तो कभी फिरोजी नजर आती है पैंगोंग झील, जानें इस खूबसूरत जगह की खासियत