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जालंधर: 3 सदियों की गवाह 132 वर्षीय बसंत कौर नहीं रही

बेटा सरदारा सिंह और बहू कुलवंत कौर कहती हैं कि उनकी खुशकिस्मती थी कि उन्हें सेवा का मौका मिला। उम्र के इस पड़ाव में भी उनसे कभी कोई परेशानी नहीं हुई।

Posts by : Priyanka Maheshwari | Updated on: Thu, 26 Aug 2021 11:10:07

जालंधर: 3 सदियों की गवाह 132 वर्षीय बसंत कौर नहीं रही

जालंधर में लोहियां खास के साबूवाल में रहने वाली 124 साल की महिला बसंत कौर का बुधवार को निधन हो गया। लंबी उम्र होने पर बसंत कौर कहती थीं कि मेरे भाई-बहनों और पति का निधन हो गया है। शायद ऊपरवाला मुझे भूल गया है, जो अभी तक जिंदा हूं। मेरी उम्र तो अब कब की पूरी हो चुकी है। परिवार के लोग बसंत कौर उम्र 132 साल बताते हैं, लेकिन एक जनवरी 1995 में बने वोटर कार्ड के हिसाब से उनकी आयु रिकॉर्ड में कम दर्ज है। सरकारी रिकॉर्ड में एक जनवरी 1995 को बसंत कौर की उम्र 98 साल दर्ज है। इस लिहाज से उन्होंने 3 सदियां देखीं। 19वीं सदी में जन्म हुआ और 20वीं सदी में शादी हुई। 21वीं सदी में अब वो दुनिया से रुखसत हो गईं। परिवार के लोग कहते हैं कि असल उम्र से वह पंजाब ही नहीं बल्कि देश की सबसे उम्रदराज महिला थीं।

बेटा सरदारा सिंह और बहू कुलवंत कौर कहती हैं कि उनकी खुशकिस्मती थी कि उन्हें सेवा का मौका मिला। उम्र के इस पड़ाव में भी उनसे कभी कोई परेशानी नहीं हुई। परिवार के लोग कहते हैं कि बसंत कौर मीठा खाने की शौकीन थी। उन्हें शुगर व ब्लड प्रेशर (BP) जैसी कोई बीमारी भी नहीं थी।

उन्होंने बताया कि उनकी घर में मौजूदगी अक्सर हमें हिम्मत का अहसास कराती थी। बुधवार को उन्होंने खाना खाया। फिर 15 मिनट बाद पानी पीया और प्राण त्याग दिए। परिवार में उनके 12 पोते और 13 पोतियां हैं। उनसे आगे 5 परपोते और 3 परपोतियां हैं। इनके भी बच्चे हो चुके हैं।

उनके 72 साल के बेटे सरदारा सिंह बताते हैं कि मां बसंत कौर को कोई बीमारी नहीं थी। वह इंजेक्शन से बहुत डरती थीं। कभी हल्का बुखार हुआ तो गोली खा लेती। कभी उन्हें डॉक्टर के पास ले जाने की जरूरत नहीं पड़ी। कोरोना काल में हमें डर था कि मां को कहीं ये बीमारी न पकड़ ले लेकिन वे पूरी तरह स्वस्थ रहीं। इतना जरूर था कि अब वो देख नहीं पाती थी और एक कान से सुनना बंद हो गया था। दूसरे कान से वो ऊंची आवाज में सुनती थीं। वो अक्सर लोगों को आजादी से पहले के भारत की बातें सुनाती रहती थीं।

ब्रिटिश राज में जन्मीं बसंत कौर 1947 में भारत-पाकिस्तान बंटवारे की भी गवाह थी। वह बताती थीं कि किस तरह उनके पड़ोसी मुस्लिम परिवार अपना घर छोड़ पाकिस्तान गए थे। वह कहती थीं कि 4 बच्चों को लेकर मैं मायके चली गई थीं। पीछे पति ज्वाला सिंह ने मुस्लिम भाइयों को पाकिस्तान जाने में पूरी मदद की थी।

पति का 105 साल की उम्र हुआ था निधन

बसंत कौर के पति ज्वाला सिंह का भी 1995 में 105 साल की उम्र में निधन हुआ था। उनके 6 बेटे और 3 बेटियां थीं। इनमें 5 बच्चों का निधन हो चुका है। 7 साल पहले उनके बड़े बेटे का 95 साल की उम्र में निधन हुआ था। उनके पोते के पोता भी 28 साल का है और अमेरिका में रहता है। बसंत कौर परिवार में 5वीं पीढ़ी के साथ रह रही थीं। उनके 5 भाई और 4 बहनों में भी अब कोई जीवित नहीं है। बसंत कौर की देखभाल करने वाली बहू कुलवंत कौर बताती हैं कि बसंत कौर अक्सर कहती थीं कि हर कोई लंबी और स्वस्थ जिंदगी जीना चाहता है, मैं भी चाहती थी। मैंने 5 बच्चे खो दिए और 8 भाई-बहन भी अब नहीं रहे। पति भी छोड़ गए। ये कहकर वो अक्सर रो पड़ती थीं। फिर कहती कि ऐसा लगता है कि ऊपरवाला मुझे भूल गया या फिर उसके पास मेरे लिए कोई जगह नहीं है।

सब्जी से हो गई थी नफरत, दही के साथ खाती थीं रोटी

बसंत कौर मीठा खूब खाती थीं। महीने में 4 दिन बिस्कुट खाना उनकी आदत में शुमार था। बेसन की मिठाई, बादाना और चाय के साथ वह गुड़ भी खूब खाती थीं। मीठा उनके बिस्तर के पास ही पड़ा रहता था। खास बात यह थी कि उम्र के इस पड़ाव में उन्हें सब्जी से तो नफरत हो गई थी। वे सिर्फ दही में रोटी खाती थीं। दिन में कभी 4 बार उन्हें भूख लगती थी।

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