
आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में हमारी सेहत के प्रति छोटी-छोटी चेतावनियाँ भी बेहद महत्वपूर्ण होती हैं। आमतौर पर हम सोचते हैं कि दिल की धड़कन तेज होना केवल दौड़ने, तेज चलने या भारी काम करने पर ही होता है, जो कि एक सामान्य प्रक्रिया है। लेकिन अगर बिना किसी शारीरिक मेहनत के, आराम से बैठे रहने पर भी बार-बार दिल की धड़कन बढ़ती रहती है, तो इसे अनदेखा करना खतरनाक हो सकता है। यह आपके शरीर में किसी अंदरूनी समस्या या मानसिक तनाव का संकेत हो सकता है। ऐसे लक्षण अक्सर दिल और मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी गंभीर परेशानियों की तरफ इशारा करते हैं। चलिए, जानते हैं कि बिना कोई शारीरिक गतिविधि किए बैठे-बैठे दिल की धड़कन बढ़ने का क्या मतलब हो सकता है।
बैठे-बैठे दिल की धड़कन बढ़ना किस बीमारी का संकेत हो सकता है?
यदि आप आराम की स्थिति में बैठे-बैठे अचानक दिल की धड़कन तेज महसूस कर रहे हैं, साथ ही सीने में बेचैनी, सांस फूलना या कमजोरी जैसे लक्षण भी हैं, तो यह सामान्य थकान या तनाव नहीं, बल्कि एरिथमिया जैसी गंभीर बीमारी हो सकती है। एरिथमिया एक ऐसी स्थिति है जिसमें दिल की धड़कन असामान्य हो जाती है — कभी बहुत तेज, कभी धीमी या अनियमित। यह समस्या दिल के इलेक्ट्रिकल सिस्टम में गड़बड़ी के कारण होती है, जिससे दिल सही तरीके से खून पंप नहीं कर पाता।
कौन-कौन सी वजहें हैं बैठे-बैठे दिल की धड़कन तेज होने की?
अधिक तनाव या चिंता – मानसिक दबाव, एंग्जायटी या पैनिक अटैक हमारे शरीर पर कई तरह से असर डाल सकते हैं, जिनमें दिल की धड़कन तेज होना एक आम लक्षण है। जब हम तनाव में होते हैं, तो हमारे शरीर में एड्रेनालाईन और कोर्टिसोल जैसे स्ट्रेस हार्मोन रिलीज़ होते हैं, जो हार्ट रेट को बढ़ा देते हैं। यह प्रतिक्रिया शरीर की “फाइट या फ्लाइट” स्थिति को दर्शाती है, लेकिन अगर यह स्थिति लंबे समय तक बनी रहती है, तो इससे हृदय पर दबाव बढ़ सकता है और हार्ट अतालता (एरिथमिया) जैसी समस्याएं हो सकती हैं। लगातार तनाव और चिंता से नींद की समस्या, थकान और मानसिक अस्थिरता भी हो सकती है, जो दिल की स्वास्थ्य समस्याओं को और बढ़ावा देती हैं। इसलिए, मानसिक स्वास्थ्य का ध्यान रखना और जरूरत पड़ने पर प्रोफेशनल मदद लेना बहुत जरूरी होता है।
कैफीन, शराब और धूम्रपान – ये तीनों चीजें दिल की धड़कन को असामान्य रूप से बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। कैफीन, जो चाय, कॉफी, चॉकलेट और एनर्जी ड्रिंक्स में पाया जाता है, हमारे नर्वस सिस्टम को उत्तेजित करता है और इससे हार्ट रेट तेज हो सकता है। ज्यादा कैफीन का सेवन अनियमित दिल की धड़कन (पैलपिटेशन) और एरिथमिया का कारण बन सकता है। शराब का अत्यधिक सेवन न केवल दिल की मांसपेशियों को नुकसान पहुंचाता है, बल्कि इससे ब्लड प्रेशर भी बढ़ता है, जिससे दिल पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है। धूम्रपान में मौजूद निकोटीन दिल की धड़कन को तेज करता है और रक्त वाहिकाओं को सिकोड़ देता है, जिससे रक्त प्रवाह बाधित होता है और हृदय रोगों का खतरा बढ़ जाता है। इन आदतों को नियंत्रित करना और सीमित मात्रा में सेवन करना दिल की सेहत के लिए अत्यंत आवश्यक है।
दवाओं के साइड इफेक्ट्स – कुछ दवाइयां दिल की धड़कन को प्रभावित कर सकती हैं और हार्ट रेट को असामान्य बना सकती हैं। उदाहरण के लिए, कुछ अस्थमा, थाइरॉयड, डिप्रेशन, उच्च रक्तचाप और सर्दी-जुकाम की दवाइयों में ऐसे तत्व होते हैं जो दिल की गति को बढ़ा या कम कर सकते हैं। इन दवाओं के सेवन से पैलपिटेशन, तेज या अनियमित दिल की धड़कन जैसी समस्याएं हो सकती हैं। इसलिए, अगर आप किसी दवा के सेवन के दौरान दिल की धड़कन में बदलाव महसूस करें तो तुरंत डॉक्टर से परामर्श करना जरूरी है ताकि आवश्यकतानुसार दवा की मात्रा या प्रकार में बदलाव किया जा सके।
दिल की मांसपेशियों में समस्या या हार्ट डिजीज – पहले से मौजूद दिल की कोई भी बीमारी जैसे कोरोनरी आर्टरी डिजीज, कार्डियोमायोपैथी, हार्ट फेलियर या वाल्व संबंधी रोग दिल की सामान्य धड़कन को प्रभावित कर सकते हैं। दिल की मांसपेशियों में कमजोरी या नुकसान की वजह से दिल सही तरीके से खून पंप नहीं कर पाता, जिससे दिल की धड़कन तेज, धीमी या अनियमित हो सकती है। ऐसे मरीजों को हार्ट रेट में असामान्यता नजर आने पर तुरंत चिकित्सकीय सहायता लेना चाहिए क्योंकि यह गंभीर हृदय संबंधी जटिलताओं की तरफ संकेत हो सकता है। नियमित जांच और उचित इलाज से इन समस्याओं को नियंत्रित किया जा सकता है।
डिहाइड्रेशन – जब शरीर में पानी की कमी हो जाती है, तो खून का प्रवाह धीमा हो जाता है और रक्त का घनत्व बढ़ जाता है। इससे दिल को खून को पूरे शरीर में पंप करने के लिए अधिक मेहनत करनी पड़ती है, जिससे दिल की धड़कन तेज हो जाती है। इसके अलावा, डिहाइड्रेशन से ब्लड प्रेशर भी अस्थिर हो सकता है, जिससे चक्कर आना, कमजोरी और थकान जैसी समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं। इसलिए, पर्याप्त मात्रा में पानी पीना और शरीर को हाइड्रेटेड रखना दिल की सेहत के लिए बेहद जरूरी है।
इलेक्ट्रोलाइट असंतुलन – शरीर में पोटैशियम, मैग्नीशियम, सोडियम और कैल्शियम जैसे मिनरल्स का संतुलन दिल के इलेक्ट्रिकल सिस्टम के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण होता है। अगर इन मिनरल्स में कमी या अधिकता हो जाती है, तो दिल की धड़कन असामान्य हो सकती है, जिससे एरिथमिया जैसे हृदय रोग हो सकते हैं। खासकर पोटैशियम और मैग्नीशियम की कमी मांसपेशियों और नसों के कार्य में बाधा डालती है, जिससे दिल की धड़कन अनियमित हो सकती है। इसलिए संतुलित आहार लेना और आवश्यकतानुसार सप्लीमेंट्स लेना जरूरी होता है, खासकर उन लोगों के लिए जिन्हें हार्ट प्रॉब्लम का जोखिम हो।
हाइपरथायरायडिज्म – थायराइड ग्रंथि जब अत्यधिक हार्मोन उत्पादन करती है, तो शरीर का मेटाबॉलिज्म काफी तेज हो जाता है। इस स्थिति में बिना किसी शारीरिक गतिविधि के भी दिल की धड़कन तेज हो सकती है, क्योंकि हार्मोन की अधिकता दिल की गति को बढ़ा देती है। इसके साथ ही कमजोरी, बेचैनी, वजन घटना, और अनिद्रा जैसे लक्षण भी देखे जा सकते हैं। यदि समय पर उपचार न किया जाए तो यह हृदय रोगों का कारण बन सकता है।
लो ब्लड शुगर – जब शरीर में ग्लूकोज का स्तर बहुत कम हो जाता है, तो यह हाइपोग्लाइसीमिया कहलाता है। ऐसी स्थिति में व्यक्ति को घबराहट, कमजोरी, पसीना आना, चक्कर आना और दिल की धड़कन तेज होना जैसे लक्षण महसूस हो सकते हैं। यह स्थिति खासकर डायबिटीज के मरीजों में आम होती है, जब वे अपनी दवाइयों या भोजन में अनियमितता रखते हैं। लो ब्लड शुगर को तुरंत नियंत्रित करना जरूरी होता है, वरना इससे गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं।
दिल की बीमारियां – उच्च रक्तचाप (हाइपरटेंशन) और कोरोनरी आर्टरी डिजीज जैसी हृदय संबंधी समस्याएं भी बिना किसी शारीरिक प्रयास के दिल की धड़कन तेज कर सकती हैं। ये बीमारियां दिल की मांसपेशियों को प्रभावित करती हैं और रक्त प्रवाह में बाधा डालती हैं, जिससे हार्ट रेट अनियमित या तेज हो सकता है। ऐसे लक्षणों को कभी भी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए, क्योंकि ये दिल के दौरे या स्ट्रोक जैसी गंभीर घटनाओं का संकेत हो सकते हैं। समय पर चिकित्सीय जांच और इलाज से इनसे बचा जा सकता है।
डिस्क्लेमर: इस लेख में दी गई जानकारी मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है। किसी भी सुझाव को अपनाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लेना जरूरी है।














