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संसद के विशेष सत्र में PM मोदी का संबोधन, सत्र छोटा लेकिन समय के हिसाब से बड़ा, यहां से विदाई एक भावुक पल

पीएम मोदी ने इस भवन में अपनी आखिरी स्पीच में कहा, 'देश 75 वर्षों की संसदीय यात्रा का एक बार फिर से संस्मरण कराने के लिए और नए सदन में जाने के लिए उन प्रेरक पलों को, इतिहास की अहम घड़ी को स्मरण करते हुए आगे बढ़ने का ये अवसर है। हम सब, इस ऐतिहासिक भवन से विदा ले रहे हैं।'

Posts by : Rajesh Bhagtani | Updated on: Mon, 18 Sep 2023 12:22:59

संसद के विशेष सत्र में PM मोदी का संबोधन, सत्र छोटा लेकिन समय के हिसाब से बड़ा, यहां से विदाई एक भावुक पल

नई दिल्ली। अमृतकाल को लेकर सरकार द्वारा आहूत किया गया संसद का पांच दिवसीय विशेष सत्र आज से शुरू हुआ । पुरानी संसद में सोमवार को संसद की कार्यवाही का आखिरी दिन है। मंगलवार यानी 19 सितंबर से संसद की कार्यवाही नए संसद भवन में होगी। पीएम मोदी ने इस भवन में अपनी आखिरी स्पीच में कहा, 'देश 75 वर्षों की संसदीय यात्रा का एक बार फिर से संस्मरण कराने के लिए और नए सदन में जाने के लिए उन प्रेरक पलों को, इतिहास की अहम घड़ी को स्मरण करते हुए आगे बढ़ने का ये अवसर है। हम सब, इस ऐतिहासिक भवन से विदा ले रहे हैं।'

उन्होंने कहा, 'आजादी के बाद इस भवन को संसद भवन के रूप में पहचान मिली। इस इमारत का निर्माण करने का फैसला विदेशी शासकों का था। हम गर्व से कह सकते हैं कि इस भवन के निर्माण में पसीना और परिश्रम मेरे देशवासियों का लगा था। पैसे भी मेरे देश के लोगों के लगे।'

केंद्र सरकार ने 18 से 22 सितंबर तक संसद का विशेष सत्र बुलाया है। स्पेशल सत्र में पांच बैठकें होंगी। इस दौरान चार बिल पेश किए जाएंगे। उधर विपक्षी पार्टियों ने सरकार से सवाल-जवाब करने के लिए 9 मुद्दों की लिस्ट तैयार की है। विपक्षी गठबंधन I.N.D.I.A से 24 पार्टियां इस सेशन में हिस्सा लेंगी।

संसद के विशेष सत्र में पुराने संसद भवन के भीतर संसद के विशेष में संबोधन देते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा देश की 75 वर्षों की संसदीय यात्रा इसका एक बार पुनः स्मरण करने के लिए और नए सदन में जाने से पहले उन प्रेरक पलों को, इतिहास की महत्वपूर्ण घड़ी को स्मरण करते हुए आगे बढ़ने का यह अवसर है। हम सब इस ऐतिहासिक भवन से विदा ले रहे हैं। आज़ादी के पहले यह सदन इंपीरियल लेजिस्लेटिव काउंसिल का स्थान हुआ करता था। आज़ादी के बाद इसे संसद भवन के रूप में पहचान मिली।

मोदी ने कहा यह सही है कि इस इमारत (पुराने संसद भवन) के निर्माण करने का निर्णय विदेश शासकों का था लेकिन यह बात हम न कभी भूल सकते हैं और हम गर्व से कह सकते हैं इस भवन के निर्माण में पसीना मेरे देशवासियों का लगा था, परिश्रम मेरे देशवासियों का लगा था और पैसे भी मेरे देश के लोगों के थे।

यहाँ से विदाई एक भावुक पल

प्रधानमंत्री ने कहा इस सदन से विदाई लेना एक बेहद भावुक पल है, परिवार भी अगर पुराना घर छोड़कर नए घर जाता है तो बहुत सारी यादें उसे कुछ पल के लिए झकझोर देती है और हम यह सदन को छोड़कर जा रहे हैं तो हमारा मन मस्तिष्क भी उन भावनाओं से भरा हुआ है और अनेक यादों से भरा हुआ है। उत्सव-उमंग, खट्टे-मीठे पल, नोक-झोंक इन यादों के साथ जुड़ा है।

G-20 की सफलता 140 करोड़ की सफलता

संसद के विशेष सत्र को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा आज आपने एक स्वर से G-20 की सफलता की सराहना की है... मैं आपका आभार व्यक्त करता हूं। G-20 की सफलता देश के 140 करोड़ नागरिकों की सफलता है। यह भारत की सफलता है, किसी व्यक्ति या पार्टी की नहीं... यह हम सभी के लिए जश्न मनाने का विषय है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा इस 75 वर्ष की हमारी यात्रा ने अनेक लोकतांत्रिक परंपराओं और प्रक्रियाओं का उत्तम से उत्तम सृजन किया है और इस सदन में रहे प्रत्येक व्यक्ति ने सक्रियता से योगदान भी दिया है और साक्षी भाव से उसे देखा भी है। हम भले नए भवन में जाएंगे लेकिन पुराना भवन यानि यह भवन भी आने वाली पीढ़ियों को हमेशा प्रेरणा देता रहेगा।

सत्र छोटा है समय के हिसाब से बहुत बड़ा है

संसद के विशेष सत्र की शुरुआत से पहले पीएम नरेंद्र मोदी ने कहा संसद का यह सत्र छोटा है लेकिन समय के हिसाब से बहुत बड़ा है. यह ऐतिहासिक फैसलों का सत्र है. इस सत्र की एक खासियत यह है कि 75 साल की यात्रा एक से शुरू हो रही है नई मंजिल...अब नई जगह से सफर को आगे बढ़ाते हुए...हमें 2047 तक देश को विकसित देश बनाना है। इसके लिए आने वाले समय के सभी फैसले नए संसद भवन में लिए जाएंगे।

पीएम नरेंद्र मोदी ने कहा, 'चंद्रमा मिशन की सफलता--चंद्रयान-3 ने हमारा तिरंगा फहरा दिया है, शिव शक्ति प्वाइंट प्रेरणा का नया केंद्र बन गया है, तिरंगा प्वाइंट हमें गर्व से भर रहा है.' जब ऐसी कोई उपलब्धि हासिल होती है तो दुनिया उसे आधुनिकता, विज्ञान और तकनीक से जोड़कर देखती है। जब ये क्षमता दुनिया के सामने आती है तो कई अवसर और संभावनाएं भारत के दरवाजे पर दस्तक देती हैं।"

PM मोदी ने कहा जी-20 में भारत इस बात के लिए हमेशा गर्व करेगा कि हम ग्लोबल साउथ की आवाज बनें। अफ्रीकन यूनियन को स्थायी सदस्यता और जी-20 में सर्वसम्मति से डिक्लेरेशन ये सारी बातें भारत के उज्ज्वल भविष्य के संकेत दे रही हैं।
मैं पहली बार जब संसद आया

पहली बार एक सांसद के रूप में इस भवन में मैंने प्रवेश किया तो सहज रूप से मैंने संसद भवन की चौखट पर अपना शीश झुका दिया। इस लोकतंत्र के मंदिर को श्रद्धाभाव से नमन करते हुए मैंने पैर रखा था। वह पल मेरे लिए भावनाओं से भरा हुआ था। मैं कल्पना नहीं कर सकता, लेकिन भारत के लोकतंत्र की ताकत है, कि रेलवे प्लेटफॉर्म पर गुजारा करने वाला एक बच्चा पार्लियामेंट पहुंचता है। मैंने कभी कल्पना भी नहीं की थी कि देश मुझे इतना सम्मान देगा।'

हर वर्ग का प्रतिनिधि विविधताओं से भरा

हमारे यहां संसद भवन के गेट पर लिखा है, जनता के लिए दरवाजे खोलिए और देखिए कि कैसे वो अपने अधिकारों को प्राप्त करते हैं। हम सब और हमारे पहले जो रहे वो इसके साक्षी रहे हैं और हैं। वक्त के साथ संसद की संरचना भी बदलती गई। समाज के हर वर्ग का प्रतिनिधि विविधताओं से भरा हुआ। इस भवन में नजर आता है। समाज के सभी तबके के लोगों का यहां योगदान रहा है।'

अब तक 7500 से अधिक प्रतिनिधि दोनों सदनों में आ चुके

'शुरुआत में महिला सदस्यों की संख्या कम थी, धीरे धीरे उनकी संख्या बढ़ी। प्रारंभ से अब तक 7500 से अधिक प्रतिनिधि दोनों सदनों में आ चुके हैं। इस कालखंड में करीब 600 महिला सांसद आईं। इंद्रजीत गुप्ता जी 43 साल तक इस सदन के साक्षी रहे। शफीकुर रहमान 93 साल की उम्र में सदन आ रहे हैं।'

संसद पर आतंकी हमला, हमारी जीवात्मा पर हमला था


लोकतंत्र के सदन में आतंकी हमला हुआ था। पूरे विश्व में यह हमला इमारत पर नहीं बल्कि हमारी जीवात्मा पर हमला हुआ था। ये देश उस घटना को कभी नहीं भूल सकता। आतंकियों से लड़ते हुए जिन सुरक्षाकर्मियों ने हमारी रक्षा की। उन्हें कभी नहीं भूला जा सकता।
कई पत्रकार मित्रों ने जिंदगी पर रिपोर्टिंग की

जब आज हम इस सदन को छोड़ रहे हैं तब उन पत्रकार मित्रों को भी याद करना चाहता हूं जो संसद की रिपोर्टिंग करते रहे। कुछ तो ऐसे रहे जिन्होंने पूरी जिदंगी संसद को रिपोर्ट किया है। पहले यह तकनीक उपलब्ध नहीं थी, तब वही लोग थे। उनका सामर्थ्य था कि वे अंदर की खबर पहुंचाते थे और अंदर के अंदर की भी (खबर) पहुंचाते थे।

आपको बता दें कि, सरकार द्वारा पहले बताए गए एजेंडे के मुताबिक 75 वर्षों की यात्रा पर चर्चा के साथ-साथ इस पांच दिवसीय सत्र में मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्त (नियुक्ति, सेवा की शर्तें और कार्यालय की अवधि) विधेयक 2023, डाकघर विधेयक 2023, अधिवक्ता (संशोधन) विधेयक 2023 और प्रेस और आवधिक पंजीकरण विधेयक 2023 को भी चर्चा के बाद पारित करवाया जाएगा।

हालांकि रविवार को सर्वदलीय बैठक के बाद केंद्रीय मंत्री प्रल्हाद जोशी ने बताया कि संसद के विशेष सत्र के लिए पहले से पेंडिंग कुछ बिल को मिलाकर कुल 8 बिल लिस्टेड हैं। बताया जा रहा है कि,18 से 22 सितंबर के दौरान पांच दिन तक चलने वाले संसद के इस विशेष सत्र के आखिरी तीन दिनों यानी 20,21 और 22 सितंबर के बीच ही सरकार सदन में इन विधेयकों को चर्चा के लिए पेश कर पारित करवाने का प्रयास करेगी।

पहले दिन यानी आज संसद की बैठक पुराने संसद भवन में होगी। मंगलवार, 19 सितंबर, को पुराने संसद भवन में फोटो सेशन होगा, फिर सुबह 11 बजे सेंट्रल हॉल में एक समारोह होगा। उसके बाद नई संसद में प्रवेश किया जाएगा। 19 सितंबर को नए संसद भवन में संसद सत्र की बैठक होगी और 20 सितंबर से नियमित संसदीय काम-काज शुरू होगा।

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