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प्रदूषण स्तर बढ़ा, दिल्ली, रायपुर, इंदौर के साथ राजस्थान के भरतपुर में भी हुई सांस लेने में मुश्किल

सीपीसीबी ने सबसे प्रदूषित हवा वाले शहरों की सूची जारी की है। इसमें पहले नंबर पर ग्रेटर नोएडा है। यहां वायु गुणवत्ता सूचकांक 354 दर्ज किया गया।

Posts by : Rajesh Bhagtani | Updated on: Tue, 24 Oct 2023 2:51:42

प्रदूषण स्तर बढ़ा, दिल्ली, रायपुर, इंदौर के साथ राजस्थान के भरतपुर में भी हुई सांस लेने में मुश्किल

नई दिल्ली। सर्दी से पहले दिल्ली-एनसीआर समेत देश के कई शहरों में हवा में बढ़ते प्रदूषण ने चिंता बढ़ा दी है। दिल्ली, फरीदाबाद, गुरुग्राम, नोएडा और मुंबई में सांस लेना मुश्किल होने लगा है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के आंकड़ों के मुताबिक सोमवार को दिल्ली का वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 313 के गंभीर स्तर पर पहुंच गया। नोएडा-ग्रेटर नोएडा समेत एनसीआर के ज्यादातर इलाके रेड जोन में हैं। सर्दी के मौसम में दिल्ली-एनसीआर की हवा और जहरीली हो जाती है। जैसे-जैसे सर्दी बढ़ेगी, प्रदूषण का स्तर बढ़ता जाएगा। यानी अगले तीन महीने इस इलाके के लिए भारी साबित हो सकते हैं।

ग्रेटर नोएडा में वायु गुणवत्ता सबसे ज्यादा खराब

सीपीसीबी ने सबसे प्रदूषित हवा वाले शहरों की सूची जारी की है। इसमें पहले नंबर पर ग्रेटर नोएडा है। यहां वायु गुणवत्ता सूचकांक 354 दर्ज किया गया। उत्तर प्रदेश के फरीदाबाद में यह 322, हरियाणा के बहादुरगढ़ में 284, मानेसर में 280, राजस्थान के भरतपुर और भिवाड़ी में 261 दर्ज किया गया।

पूर्वानुमान के मुताबिक दिल्ली में हवा की रफ्तार कम होने के कारण आने वाले चार-पांच दिन में एक्यूआई 300 के पार (बहुत खराब श्रेणी) रह सकता है। विशेषज्ञों के मुताबिक दिल्ली की हवा को कई फैक्टर जहरीला बना रहे हैं। इनमें पराली का धुआं, ट्रैफिक, कंस्ट्रक्शन, हवाओं की दिशा और गति शामिल है। नवंबर साल का सबसे प्रदूषित महीना होता है। प्रदूषण की हालत और गंभीर हो सकती है। सीपीसीबी के अधिकारियों के मुताबिक आने वाले दिनों में एक्यूआइ 400 के पार पहुंच सकता है। अगर ऐसा हुआ तो लोगों को सांस लेने में दिक्कत महसूस होगी। सांस से जुड़ी बीमारियों से जूझ रहे लोगों की समस्याएं बढ़ जाएंगी।

आतिशबाजी से और गहराएगी समस्या

विशेषज्ञों के मुताबिक पहले दशहरा और बाद में दीपावली पर होने वाली आतिशबाजी के कारण हवा की गुणवत्ता और खराब होने की आशंका है। आतिशबाजी से हवा में धूल के कण और कार्बन मोनो-ऑक्साइड का स्तर कई गुना बढ़ जाएगा।

एक्यूआई का बढ़ना स्वास्थ्य पर पड़ रहा भारी

एक्यूआई जैसे-जैसे ऊपर चढ़ता है, सांस लेने में दिक्कत बढऩे लगती है। इसके 150 तक रहने पर बीमार लोगों को ही परेशानी होती है। इससे ऊपर जाने पर स्वस्थ लोगों की भी परेशानी बढऩे लगती है। एक्यूआइ के 200 का स्तर पार करने पर सबके लिए हेल्थ रिस्क बढ़ जाती है। इसके 300 से ज्यादा होने पर सांस लेना खतरनाक हो जाता है।

दिल्ली में ग्रैप का दूसरा चरण लागू

वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) की उपसमिति ने दिल्ली में ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (ग्रैप) के दूसरे चरण की 11 सूत्री कार्ययोजना लागू कर दी है। दिल्ली के पर्यावरण मंत्री गोपाल राय ने ग्रैप के दूसरे चरण के क्रियान्वयन पर चर्चा के लिए सोमवार को बैठक बुलाई। उन्होंने कहा, मौसम हमारे हाथ में नहीं है, लेकिन बिगड़ते हालात को नियंत्रित करने की जरूरत है, ताकि लोगों के स्वास्थ्य पर प्रदूषण का कम से कम असर पड़े।

अल नीनो का असर 2024 के शुरूआत तक बना रहेगा

संयुक्त राष्ट्र के ताजा पूर्वानुमान के मुताबिक अल नीनो का असर 2024 के शुरुआती छह महीने तक जारी रह सकता है। इससे विभिन्न देशों में कृषि और मछली पालन पर असर पड़ेगा। अल नीनो जलवायवीय परिघटना है, जो उष्णकटिबंधीय प्रशांत महासागर में अनियमित रूप से घटित होती है। इसका भारत समेत दुनियाभर के मौसम पर असर पड़ता है। अल नीनो के कारण ही भारत में इस बार अगस्त में 34 फीसदी कम बारिश हुई। वैश्विक मौसम एजेंसियों पहले अनुमान जता चुकी हैं कि अल नीनो 2023-24 की सर्दियों तक मजबूती से बना रहेगा।

सोमवार को कहां कितना रहा एक्यूआई

ग्रेटर नोएडा 354, फरीदाबाद 322, दिल्ली 313, मुजफ्फरनगर 299, बहादुरगढ़ 284, मानेसर 280, कैथल 269, भरतपुर 26, भिवाड़ी 261, मुंबई 176, पटना 153, पुणे 146, इंदौर 144, अहमदाबाद 127, जयपुर 122, रायपुर 119, चेन्नई 102

क्या है एक्यूआई का पैमाना


0-50 अच्छा, 51-100 संतोषजनक, 101-200 मध्यम, 201-300 खराब, 301-400 बहुत खराब, 401-500 खतरनाक होता है।

बचाव के उपाय

—पर्सनल वाहनों की जगह पब्लिक ट्रांसपोर्ट को प्राथमिकता।

—कम भीड़ वाले रास्तों का चुनाव करें।

—पर्सनल वाहन के एयर फिल्टर को मेंटेन रखें।

—डस्ट फैलाने वाली कंस्ट्रक्शन गतिविधियों पर जनवरी तक रोक जरूरी।

—खुले में कचरा और बॉयो ईंधन न जलाएं।

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