केंद्र सरकार में संभावित कैबिनेट विस्तार और फेरबदल को लेकर राजनीतिक हलकों में चर्चाएं तेज हो गई हैं। माना जा रहा है कि मंगलवार को मंत्रिपरिषद में बदलाव की घोषणा की जा सकती है, हालांकि सरकार की ओर से अभी तक इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। सूत्रों के मुताबिक, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विदेश दौरे से लौटने के बाद मंत्रिमंडल में बदलाव की प्रक्रिया आगे बढ़ सकती है। इस संभावित फेरबदल में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का नाम सबसे अधिक चर्चा में है। हालांकि अभी यह स्पष्ट नहीं है कि उन्हें मंत्रिमंडल में बरकरार रखा जाएगा, उनका विभाग बदला जाएगा या कोई अन्य फैसला लिया जाएगा।
इस बार संभावित फेरबदल को लेकर एक और अहम चर्चा यह है कि हाल के दिनों में विभिन्न दलों से अलग होकर राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) का समर्थन करने वाले कुछ नेताओं को भी मंत्रिपरिषद में जगह मिल सकती है। हाल ही में तृणमूल कांग्रेस, शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) और आम आदमी पार्टी से जुड़े कुछ सांसदों ने एनडीए को समर्थन दिया है। ऐसे में राजनीतिक समीकरणों को ध्यान में रखते हुए नए चेहरों को शामिल किए जाने की संभावना जताई जा रही है।
प्रधानमंत्री के कार्यक्रम के अनुसार तय हो सकती है समय-सीमा
सूत्रों के अनुसार, मंत्रिमंडल विस्तार की तारीख प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के व्यस्त विदेशी और घरेलू कार्यक्रमों को देखते हुए तय की जा सकती है। प्रधानमंत्री 27 से 29 जून तक सेशेल्स की तीन दिवसीय यात्रा पर हैं। इसके अलावा 6 से 11 जुलाई के बीच उनके इंडोनेशिया, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड के दौरे की भी संभावना जताई जा रही है।
इसी बीच जापान की प्रधानमंत्री साने ताकाइची का भी 1 से 3 जुलाई तक भारत दौरा प्रस्तावित है। वहीं संसद का मानसून सत्र 18 जुलाई से शुरू होकर अगस्त तक चलेगा। ऐसे में माना जा रहा है कि संसद सत्र से पहले मंत्रिमंडल में बदलाव कर सरकार नए सिरे से अपनी राजनीतिक और प्रशासनिक रणनीति को मजबूत करना चाहती है। गौरतलब है कि 2024 के लोकसभा चुनाव के बाद यह पहला संभावित कैबिनेट फेरबदल होगा।
किन नेताओं को मिल सकती है जिम्मेदारी?
अब तक सरकार की ओर से किसी भी नाम की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है, लेकिन राजनीतिक गलियारों में कई नामों की चर्चा जोरों पर है। संभावित नए चेहरों में भाजपा सांसद अरुण गोविल, शिवसेना सांसद श्रीकांत शिंदे, भारतीय रिजर्व बैंक के पूर्व गवर्नर शक्तिकांत दास, बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, संजय दीना पाटिल, वीडी शर्मा, तरुण चुघ और राघव चड्ढा के नाम चर्चा में बताए जा रहे हैं।
हालांकि यह केवल राजनीतिक अटकलें हैं और अंतिम फैसला प्रधानमंत्री तथा भाजपा नेतृत्व की सहमति के बाद ही सामने आएगा।
किन मंत्रियों के विभाग बदलने या बाहर होने की चर्चा?
सूत्रों के अनुसार, केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान, रवनीत सिंह बिट्टू और हरदीप सिंह पुरी के नाम संभावित बदलाव की सूची में बताए जा रहे हैं। हालांकि अभी तक सरकार की ओर से किसी भी मंत्री को हटाने या उनका विभाग बदलने संबंधी कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है।
इसके अलावा केंद्रीय मंत्री बीएल वर्मा का राज्यसभा कार्यकाल नवंबर में समाप्त होने वाला है, इसलिए उनके भविष्य को लेकर भी चर्चा चल रही है। राजनीतिक सूत्रों का यह भी दावा है कि करीब छह राज्य मंत्रियों की जिम्मेदारियों में बदलाव किया जा सकता है। वहीं मनोहर लाल खट्टर और निर्मला सीतारमण के मंत्रालयों में भी फेरबदल की संभावना जताई जा रही है।
राजनीतिक और सामाजिक संतुलन पर रहेगा फोकस
समाचार एजेंसी भाषा के सूत्रों के अनुसार, सरकार के शीर्ष स्तर पर यह विचार किया जा रहा है कि कुछ महत्वपूर्ण मंत्रालयों में नए चेहरों को मौका देकर प्रशासनिक गति को और मजबूत बनाया जाए। साथ ही आगामी राजनीतिक चुनौतियों को देखते हुए मंत्रिपरिषद में क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व, राज्यों की भागीदारी, सामाजिक और जातीय संतुलन के साथ-साथ सहयोगी दलों की अपेक्षाओं को भी ध्यान में रखा जा सकता है।
इसी वजह से माना जा रहा है कि संभावित कैबिनेट फेरबदल केवल मंत्रालयों के बंटवारे तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसके जरिए आगामी राजनीतिक रणनीति और गठबंधन के समीकरणों को भी साधने की कोशिश की जाएगी। अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि सरकार कब आधिकारिक तौर पर इस संबंध में घोषणा करती है और मंत्रिमंडल में किन नए चेहरों को जगह मिलती है।













