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धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर विपक्ष की प्रतिक्रियाएं तेज, नेताओं ने बताया लोकतंत्र और छात्रों के संघर्ष की जीत

केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के शनिवार को दिए गए इस्तीफे के बाद राजनीतिक हलकों में प्रतिक्रियाओं का दौर तेज हो गया है। विपक्षी दलों के नेताओं ने इस फैसले का स्वागत करते हुए इसे लोकतांत्रिक दबाव और छात्रों के लंबे संघर्ष का परिणाम बताया।

Posts by : Jhanvi Gupta | Updated on: Sat, 25 Jul 2026 4:04:12

धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर विपक्ष की प्रतिक्रियाएं तेज, नेताओं ने बताया लोकतंत्र और छात्रों के संघर्ष की जीत

नई दिल्ली। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के शनिवार को दिए गए इस्तीफे के बाद राजनीतिक हलकों में प्रतिक्रियाओं का दौर तेज हो गया है। विपक्षी दलों के नेताओं ने इस फैसले का स्वागत करते हुए इसे लोकतांत्रिक दबाव और छात्रों के लंबे संघर्ष का परिणाम बताया। विभिन्न नेताओं ने कहा कि युवाओं की एकजुटता और लगातार हुए विरोध प्रदर्शनों ने सरकार को अपना रुख बदलने के लिए मजबूर किया है।

मनोज झा बोले- युनई दिल्ली। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के शनिवार को दिए गए इस्तीफे के बाद राजनीतिक हलकों में प्रतिक्रियाओं का दौर तेज हो गया है। विपक्षी दलों के नेताओं ने इस फैसले का स्वागत करते हुए इसे लोकतांत्रिक दबाव और छात्रों के लंबे संघर्ष का परिणाम बताया। विभिन्न नेताओं ने कहा कि युवाओं की एकजुटता और लगातार हुए विरोध प्रदर्शनों ने सरकार को अपना रुख बदलने के लिए मजबूर किया है।

मनोज झा बोले- युवाओं के संघर्ष ने सरकार को झुकाया

राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के सांसद मनोज झा ने एक वीडियो साझा करते हुए कहा कि देश के युवाओं के अटूट संकल्प और आंदोलन की ताकत के कारण धर्मेंद्र प्रधान को आखिरकार अपने पद से इस्तीफा देना पड़ा। उन्होंने कहा कि छात्रों ने लोकतंत्र में जवाबदेही की भावना को दोबारा स्थापित करने का काम किया है। मनोज झा के अनुसार अब ऐसी व्यवस्था विकसित की जानी चाहिए, जहां जवाबदेही सर्वोच्च प्राथमिकता हो। उन्होंने कहा कि देश के प्रति प्रेम और बेहतर भविष्य की उम्मीद ने लोगों को अलग-अलग शहरों में लगातार प्रदर्शन करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने आंदोलन में शामिल सभी लोगों के साहस और समर्पण को सलाम भी किया।वाओं के संघर्ष ने सरकार को झुकाया

राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के सांसद मनोज झा ने एक वीडियो साझा करते हुए कहा कि देश के युवाओं के अटूट संकल्प और आंदोलन की ताकत के कारण धर्मेंद्र प्रधान को आखिरकार अपने पद से इस्तीफा देना पड़ा। उन्होंने कहा कि छात्रों ने लोकतंत्र में जवाबदेही की भावना को दोबारा स्थापित करने का काम किया है। मनोज झा के अनुसार अब ऐसी व्यवस्था विकसित की जानी चाहिए, जहां जवाबदेही सर्वोच्च प्राथमिकता हो। उन्होंने कहा कि देश के प्रति प्रेम और बेहतर भविष्य की उम्मीद ने लोगों को अलग-अलग शहरों में लगातार प्रदर्शन करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने आंदोलन में शामिल सभी लोगों के साहस और समर्पण को सलाम भी किया।

अरविंद केजरीवाल ने बताया लोकतंत्र की बड़ी जीत

आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर प्रतिक्रिया देते हुए धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर पूरे देश को बधाई दी। उन्होंने इसे लोकतंत्र की बड़ी जीत बताया। एक वीडियो संदेश साझा करते हुए केजरीवाल ने कहा कि जनता का लंबा संघर्ष आखिरकार सफल हुआ और सरकार को झुकना पड़ा। उन्होंने कहा कि लोगों के बीच यह धारणा बन रही थी कि सरकार उनकी आवाज नहीं सुनती, लेकिन इस आंदोलन ने साबित कर दिया कि शांतिपूर्ण जनदबाव बदलाव ला सकता है। उन्होंने उम्मीद जताई कि अब सरकार नीट परीक्षा प्रणाली में जरूरी सुधार करेगी ताकि भविष्य में किसी भी छात्र को ऐसी परिस्थितियों का सामना न करना पड़े और आत्महत्या जैसे कदम उठाने की नौबत न आए।

हरपाल सिंह चीमा ने छात्रों की एकजुटता को सराहा

पंजाब सरकार में मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने कहा कि देश के युवाओं ने शिक्षा व्यवस्था में लगातार सामने आ रही अनियमितताओं के खिलाफ एक व्यापक आंदोलन खड़ा किया। उन्होंने आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी के शासनकाल में बार-बार पेपर लीक और परीक्षा संबंधी गड़बड़ियों ने छात्रों के भविष्य को संकट में डाल दिया। उन्होंने कहा कि देशभर के विद्यार्थियों ने एकजुट होकर अपनी आवाज बुलंद की, शांतिपूर्ण प्रदर्शन किए और आखिरकार सरकार को निर्णय लेने के लिए मजबूर कर दिया।

हरपाल सिंह चीमा ने आगे कहा कि आंदोलन को कमजोर करने के लिए कई प्रयास किए गए, लेकिन देश के युवा अपने उद्देश्य से पीछे नहीं हटे। उनके अनुसार अंततः सरकार को झुकना पड़ा और धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफा दे दिया। उन्होंने इसे देश के छात्रों और आने वाली पीढ़ियों के हित में लिया गया एक महत्वपूर्ण फैसला बताते हुए कहा कि यह संघर्ष करने वाले विद्यार्थियों की बड़ी जीत है।

कांग्रेस नेता हुसैन दलवई ने फैसले का किया स्वागत

कांग्रेस नेता हुसैन दलवई ने भी इस घटनाक्रम का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि यह एक सकारात्मक फैसला है और इससे यह स्पष्ट होता है कि लोकतंत्र में जनता का दबाव कितना प्रभावी हो सकता है। उनके मुताबिक इस पूरे आंदोलन ने शिक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दों को राष्ट्रीय बहस का हिस्सा बना दिया। उन्होंने कहा कि किसी भी जनप्रतिनिधि और सरकार के लिए जरूरी है कि वह जनता की भावनाओं को समझे और समय रहते उनकी बात सुने।

कुणाल घोष ने उठाए फैसले में देरी पर सवाल

तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के विधायक कुणाल घोष ने कहा कि यह फैसला काफी पहले लिया जाना चाहिए था। उन्होंने सवाल उठाया कि जब पूरे देश में लगातार इस्तीफे की मांग हो रही थी तो सरकार ने इतना लंबा इंतजार क्यों किया। उनके अनुसार भाजपा लगातार धर्मेंद्र प्रधान का बचाव करती रही, जबकि जनता की मांग काफी पहले से स्पष्ट थी।

मौलाना साजिद रशीदी ने सरकार से पूछे तीखे सवाल

ऑल इंडिया इमाम एसोसिएशन के अध्यक्ष मौलाना साजिद रशीदी ने कहा कि यह स्थिति कई सवाल खड़े करती है। उन्होंने कहा कि आंदोलन के दौरान बड़ी संख्या में छात्र घायल हुए, कई गंभीर घटनाएं सामने आईं और प्रदर्शनकारियों पर बल प्रयोग भी किया गया। उनका कहना था कि यदि यह फैसला 15 से 20 दिन पहले ले लिया जाता तो हालात इतने गंभीर नहीं होते। उन्होंने याद दिलाया कि धर्मेंद्र प्रधान स्वयं कांग्रेस शासनकाल में पेपर लीक के मुद्दे पर आंदोलन का हिस्सा रहे थे और उस समय उन्होंने छात्रों के पक्ष में आवाज उठाई थी। ऐसे में उन्हें छात्रों की भावनाओं और उनकी पीड़ा को बेहतर तरीके से समझना चाहिए था।

आंदोलन के भविष्य को लेकर भी जताई आशंका


साजिद रशीदी ने आगे कहा कि अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या देश की नई पीढ़ी इस फैसले को स्वीकार कर आगे बढ़ेगी या आंदोलन की नई दिशा तय करेगी। उन्होंने कहा कि सरकार ने खुद अपने सामने कठिन परिस्थितियां पैदा कर ली हैं। उनका मानना है कि यदि युवा इस फैसले से संतुष्ट नहीं हुए तो विपक्षी दल इस आंदोलन को आगे भी जारी रख सकते हैं। उन्होंने कहा कि सरकार के इस कदम से विपक्ष का मनोबल भी बढ़ेगा और आने वाले दिनों में राजनीतिक मांगें और तेज हो सकती हैं।

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