नई दिल्ली। नीट परीक्षा विवाद और छात्रों के लगातार विरोध-प्रदर्शनों के बीच केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने इस घटनाक्रम को देश के युवाओं के संघर्ष और लोकतांत्रिक ताकत की जीत बताया। प्रियंका गांधी ने कहा कि यह संदेश साफ है कि जनता की आवाज को लंबे समय तक दबाया नहीं जा सकता और सरकार को आखिरकार लोगों की भावनाओं का सम्मान करना ही पड़ता है।
कहा- देश के लोगों ने अपनी ताकत का अहसास कराया
प्रियंका गांधी ने अपनी प्रतिक्रिया में कहा कि इस घटनाक्रम से उन्हें कई कारणों से खुशी है, लेकिन सबसे बड़ी बात यह है कि देश के लोगों ने उन शक्तियों से अपना अधिकार वापस लेने की शुरुआत कर दी है, जिन्होंने संविधान की मूल भावना को कमजोर करने और नागरिकों की आवाज को दबाने का प्रयास किया। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र की असली ताकत जनता के पास होती है और जब लोग एकजुट होकर अपनी बात रखते हैं तो सत्ता को उनकी बात सुननी ही पड़ती है।
#WATCH | Wayanad | On the resignation of Union Education Minister Dharmendra Pradhan, Congress MP Priyanka Gandhi Vadra says, "I'm very, very happy for many reasons, but the main reason is that I believe today, is the day the people of our country have started claiming their… pic.twitter.com/AJxYmNJ7mx
— ANI (@ANI) July 25, 2026
छात्रों के आंदोलन की सराहना, बताया लोकतंत्र की मिसाल
कांग्रेस सांसद ने छात्रों के आंदोलन की सराहना करते हुए कहा कि यह भारत के युवाओं की ऐतिहासिक जीत है। उन्होंने कहा कि आंदोलन के दौरान छात्रों ने शांतिपूर्ण और गांधीवादी तरीके से अपनी मांगों को रखा। उनके मुताबिक प्रदर्शन के दौरान छात्रों पर पैलेट गन का इस्तेमाल किया गया, आंसू गैस के गोले छोड़े गए और लाठीचार्ज भी हुआ। इसके बावजूद युवाओं ने अपना हौसला नहीं खोया और पीछे हटने के बजाय अपने आंदोलन को जारी रखा। प्रियंका गांधी ने कहा कि अंततः सरकार को ही छात्रों की इच्छा और जनभावना के आगे झुकना पड़ा।
'जनता की इच्छा सर्वोपरि है'
प्रियंका गांधी ने कहा कि यह घटनाक्रम केवल एक मंत्री के इस्तीफे तक सीमित नहीं है, बल्कि लोकतंत्र की मूल भावना को मजबूत करने वाला संदेश भी है। उन्होंने कहा कि यह देश के हर शासक के लिए सबक है कि लोकतंत्र में जनता की इच्छा सर्वोपरि होती है। किसी भी सरकार या सत्ता के लिए लोगों की आवाज को नजरअंदाज करना संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि कोई भी तानाशाही सोच या ताकत भारतीय लोकतंत्र में जनता की सामूहिक इच्छा को पराजित नहीं कर सकती और छात्रों ने अपने संघर्ष से इसे साबित कर दिया है।
पीएम आवास के बाहर विपक्ष का प्रदर्शन बना चर्चा का केंद्र
इससे पहले मंगलवार, 21 जुलाई को दिल्ली में छात्रों के समर्थन और परीक्षा प्रणाली में कथित अनियमितताओं के विरोध में विपक्षी दलों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आधिकारिक आवास, 7 लोक कल्याण मार्ग, के बाहर प्रदर्शन किया था। कांग्रेस नेता राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा के नेतृत्व में कई विपक्षी नेता धरने पर बैठे। इस विरोध प्रदर्शन में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव समेत कई वरिष्ठ नेताओं ने भाग लिया। नेताओं ने कहा कि उनका आंदोलन उन छात्रों के समर्थन में है, जो परीक्षा प्रणाली में गड़बड़ियों से प्रभावित हुए हैं।
करीब तीन घंटे तक चला सियासी गतिरोध
प्रधानमंत्री आवास के आसपास कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच करीब तीन घंटे तक राजनीतिक गतिरोध बना रहा। सरकार और विपक्ष के बीच सहमति नहीं बन पाने के बाद दिल्ली पुलिस ने कार्रवाई करते हुए प्रदर्शनकारी नेताओं को हिरासत में ले लिया और धरना समाप्त कराया। इस घटनाक्रम के बाद पूरे देश में शिक्षा व्यवस्था, परीक्षा प्रणाली और छात्रों के अधिकारों को लेकर राजनीतिक बहस और तेज हो गई।













