जयपुर: राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अशोक गहलोत ने पेपर लीक के मुद्दे को लेकर भारतीय जनता पार्टी पर जोरदार निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि पेपर लीक केवल राजस्थान ही नहीं, बल्कि पूरे देश के युवाओं के भविष्य से जुड़ा गंभीर संकट बन चुका है। गहलोत का दावा है कि उनकी सरकार ने इस समस्या से सख्ती से निपटते हुए ऐसे कदम उठाए, जिनसे पेपर लीक पर काफी हद तक रोक लगाने में सफलता मिली।
उन्होंने आरोप लगाया कि बीजेपी के शासनकाल में पेपर लीक की घटनाएं लगातार होती रहीं, लेकिन उन मामलों में न तो प्रभावी कार्रवाई की गई और न ही दोषियों के खिलाफ ऐसा संदेश दिया गया, जिससे इस तरह के अपराधों पर अंकुश लग पाता।
'बीजेपी के कार्यकाल में 12 बार लीक हुए पेपर'
अशोक गहलोत ने कहा कि वर्ष 2013 से 2018 के बीच राजस्थान में बीजेपी सरकार के दौरान 12 भर्ती परीक्षाओं के प्रश्नपत्र लीक हुए थे। उनका आरोप है कि उस समय सरकार ने मामलों को गंभीरता से नहीं लिया और दोषियों के खिलाफ अपेक्षित सख्त कार्रवाई नहीं की गई।
उन्होंने कहा कि जब अपराधियों पर समय रहते कठोर कार्रवाई नहीं होती, तो ऐसे गिरोह और अधिक सक्रिय एवं बेखौफ हो जाते हैं। उनके अनुसार, यही वजह रही कि पेपर लीक माफिया लगातार अपना नेटवर्क बढ़ाने में सफल रहा।
'हमने लागू किया देश का सबसे सख्त कानून'
पूर्व मुख्यमंत्री ने दावा किया कि कांग्रेस सरकार ने सत्ता में रहते हुए पेपर लीक के हर मामले की गहराई से जांच कराई और दोषियों को कानून के दायरे में लाने का काम किया। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार ने राजस्थान में पेपर लीक रोकने के लिए देश का सबसे कड़ा कानून लागू किया था।
गहलोत के मुताबिक, इस कानून में दोषियों के लिए आजीवन कारावास, ₹10 करोड़ तक के जुर्माने और अवैध संपत्ति जब्त करने जैसे कठोर प्रावधान शामिल किए गए थे। उनका कहना था कि सरकार का उद्देश्य केवल कार्रवाई करना नहीं, बल्कि भविष्य में इस तरह के अपराधों पर पूरी तरह रोक लगाना था।
'बड़े अधिकारियों तक पहुंची कार्रवाई'
अशोक गहलोत ने कहा कि उनकी सरकार ने कार्रवाई केवल छोटे स्तर तक सीमित नहीं रखी। उन्होंने दावा किया कि पेपर लीक मामलों में राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC) के एक सदस्य तक को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया।
इसके साथ ही पेपर लीक गिरोह से जुड़े लोगों की कथित अवैध संपत्तियों पर बुलडोजर चलाकर उन्हें ध्वस्त किया गया। गहलोत के अनुसार, सरकार की इसी सख्त नीति के कारण पेपर लीक माफिया पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित किया जा सका।
'युवाओं की आवाज सुनी, बल प्रयोग नहीं किया'
पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि जब उनकी सरकार के दौरान युवा सड़कों पर उतरकर पेपर लीक के खिलाफ आवाज उठा रहे थे, तब सरकार ने उनकी बात को गंभीरता से सुना और समाधान निकालने की दिशा में काम किया।
उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस सरकार ने छात्रों के साथ संवाद का रास्ता अपनाया, जबकि बीजेपी सरकारों की तरह प्रदर्शन कर रहे युवाओं पर लाठीचार्ज या पैलेट गन जैसे उपायों का सहारा नहीं लिया गया।
गौरतलब है कि अशोक गहलोत का यह बयान ऐसे समय सामने आया है, जब देशभर में प्रतियोगी परीक्षाओं की पारदर्शिता, भर्ती प्रक्रियाओं और NEET पेपर लीक जैसे मामलों को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। ऐसे में पेपर लीक का मुद्दा एक बार फिर राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का प्रमुख विषय बना हुआ है।














