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धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद पीएम मोदी की पहली पोस्ट, भगवान बुद्ध के संदेश का किया उल्लेख

धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद पीएम मोदी ने पहली पोस्ट में सारनाथ के यूनेस्को विश्व धरोहर बनने पर खुशी जताई और भगवान बुद्ध के ज्ञान, करुणा व शांति के संदेश का उल्लेख किया।

Posts by : Priyanka Maheshwari | Updated on: Sat, 25 Jul 2026 10:07:51

धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद पीएम मोदी की पहली पोस्ट, भगवान बुद्ध के संदेश का किया उल्लेख

ई दिल्ली। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पहली सार्वजनिक प्रतिक्रिया सोशल मीडिया मंच एक्स पर सामने आई। हालांकि उन्होंने अपने संदेश में इस्तीफे या मौजूदा राजनीतिक घटनाक्रम का कोई उल्लेख नहीं किया। इसके बजाय प्रधानमंत्री ने उत्तर प्रदेश के ऐतिहासिक बौद्ध तीर्थस्थल सारनाथ को यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल किए जाने पर खुशी जताई। उन्होंने यूनेस्को (संयुक्त राष्ट्र शैक्षिक, वैज्ञानिक एवं सांस्कृतिक संगठन) की ओर से साझा किए गए एक पोस्ट को रीपोस्ट करते हुए इसे पूरे देश के लिए गर्व का क्षण बताया।

प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संदेश में लिखा, "हर भारतीय के लिए यह अत्यंत गौरव का अवसर है। उत्तर प्रदेश स्थित सारनाथ को यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल किए जाने से बेहद प्रसन्नता हुई है। सारनाथ का भगवान बुद्ध से गहरा संबंध है, जिनके ज्ञान, करुणा और सद्भाव का संदेश आज भी पूरी दुनिया को प्रेरित करता है। यह सम्मान भारत की समृद्ध सभ्यतागत और आध्यात्मिक विरासत का वैश्विक स्तर पर सम्मान है। साथ ही, इससे दुनिया भर के अधिक लोग सारनाथ आएंगे और भगवान बुद्ध के आदर्शों से प्रेरणा लेने का अवसर प्राप्त करेंगे।"

भारत की 45वीं यूनेस्को विश्व धरोहर बना सारनाथ

सारनाथ को यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल किए जाने के साथ भारत को अपनी 45वीं विश्व धरोहर मिली है। वहीं उत्तर प्रदेश के लिए यह चौथा विश्व धरोहर स्थल बन गया है। लगभग 28 वर्षों के लंबे इंतजार के बाद भगवान बुद्ध की प्रथम धर्मदेशना स्थली को यह अंतरराष्ट्रीय सम्मान प्राप्त हुआ है। यह घोषणा शनिवार को दक्षिण कोरिया के बुसान में आयोजित यूनेस्को की विश्व धरोहर समिति के 48वें सत्र के दौरान की गई।

इस उपलब्धि के साथ सारनाथ को विश्व के प्रमुख बौद्ध तीर्थस्थलों में एक नई वैश्विक पहचान मिली है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस निर्णय से उत्तर प्रदेश के बौद्ध सर्किट को अंतरराष्ट्रीय पर्यटन, सांस्कृतिक संरक्षण और धार्मिक विरासत के क्षेत्र में नई मजबूती मिलेगी। इससे विदेशों से आने वाले पर्यटकों और बौद्ध श्रद्धालुओं की संख्या में भी उल्लेखनीय वृद्धि होने की संभावना जताई जा रही है।

सारनाथ को पहली बार 3 जुलाई 1998 को यूनेस्को की संभावित विश्व धरोहर सूची (Tentative List) में शामिल किया गया था। करीब 28 वर्षों बाद अब इसे आधिकारिक रूप से विश्व धरोहर का दर्जा मिला है। इससे पहले उत्तर प्रदेश में केवल ताजमहल, आगरा किला और फतेहपुर सीकरी को ही यूनेस्को विश्व धरोहर का दर्जा प्राप्त था। अब सारनाथ के जुड़ने से राज्य की विश्व धरोहर पहचान पूर्वांचल क्षेत्र तक भी विस्तारित हो गई है।

विश्व धरोहर सूची में किन स्थलों को मिली जगह?


यूनेस्को द्वारा मान्यता प्राप्त इस विश्व धरोहर संपत्ति में चौखंडी स्तूप और सारनाथ के पुरातात्विक अवशेष शामिल किए गए हैं। ये दोनों ऐतिहासिक स्थल एक-दूसरे से लगभग 626 मीटर की दूरी पर स्थित हैं। चौखंडी स्तूप उस ऐतिहासिक घटना की स्मृति का प्रतीक माना जाता है, जब भगवान बुद्ध की अपने पांच प्रथम शिष्यों से मुलाकात हुई थी।

वहीं सारनाथ के पुरातात्विक परिसर में धामेक स्तूप, धर्मराजिका स्तूप, प्राचीन बौद्ध विहारों के अवशेष और सम्राट अशोक द्वारा स्थापित प्रसिद्ध अशोक स्तंभ जैसे कई महत्वपूर्ण स्मारक मौजूद हैं। ये सभी स्मारक मिलकर सारनाथ के उस ऐतिहासिक विकास को दर्शाते हैं, जिसने इसे विश्व के सबसे महत्वपूर्ण बौद्ध आस्था, शिक्षा और ज्ञान केंद्रों में शामिल किया।

यहीं भगवान बुद्ध ने दिया था पहला उपदेश


सारनाथ को बौद्ध धर्म का अत्यंत पवित्र तीर्थस्थल माना जाता है। यही वह ऐतिहासिक स्थान है, जहां भगवान गौतम बुद्ध ने बोधगया में ज्ञान प्राप्त करने के बाद अपना पहला उपदेश देकर धर्मचक्र प्रवर्तन की शुरुआत की थी। प्राचीन बौद्ध ग्रंथों में इस स्थल का उल्लेख ऋषिपत्तन नाम से मिलता है।

इसी स्थान पर भगवान बुद्ध ने अपने पहले पांच शिष्यों को धर्म का उपदेश दिया था और करुणा, अहिंसा, शांति तथा मध्यम मार्ग का संदेश पूरी मानवता तक पहुंचाया। लगभग 2600 वर्षों से सारनाथ बौद्ध धर्म की आस्था, अध्ययन और तीर्थ परंपरा का प्रमुख केंद्र बना हुआ है। आज भी यहां स्थित प्राचीन स्तूप, मठ, विहार, स्थापत्य कला और ऐतिहासिक अवशेष भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत तथा बौद्ध सभ्यता के गौरवशाली इतिहास की जीवंत पहचान माने जाते हैं।

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