
भारत और अमेरिका के बीच अंतरिम व्यापार समझौते को लेकर बड़ी तस्वीर साफ हो गई है। दोनों देशों ने एक ऐसा फ्रेमवर्क पेश किया है, जिसके तहत भारतीय उत्पादों पर अमेरिका द्वारा लगाए जाने वाले टैरिफ को 50 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत किया गया है। हालांकि, इस रियायत के साथ-साथ भारत ने अपने कृषि और डेयरी सेक्टर की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है।
संयुक्त बयान में साफ किया गया है कि भारत ने अपने कृषि बाजार की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं किया है। जिन कृषि और डेयरी उत्पादों को देश संवेदनशील मानता है, उन पर किसी भी तरह की ड्यूटी में छूट नहीं दी गई है। यह अंतरिम समझौता भले ही व्यापारिक दृष्टि से कई फायदे लेकर आए, लेकिन जरूरी खाद्य और कृषि उत्पादों पर भारत का रुख यह बताता है कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ से कोई समझौता नहीं होगा।
पीयूष गोयल का स्पष्ट संदेश
केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने सोशल मीडिया के जरिए इस समझौते पर भारत का पक्ष रखा। उन्होंने कहा, “यह करार संवेदनशील कृषि और डेयरी उत्पादों को पूरी तरह सुरक्षित रखकर किसानों के हितों और ग्रामीण आजीविका की रक्षा करने की भारत की मजबूत प्रतिबद्धता को दर्शाता है।”
गोयल के अनुसार, इस सूची में मक्का, गेहूं, चावल, सोयाबीन, पोल्ट्री, दूध, पनीर, इथेनॉल (ईंधन), तंबाकू, कुछ सब्जियां और मांस जैसे उत्पाद शामिल हैं, जिन्हें किसी भी तरह की छूट से बाहर रखा गया है।
कृषि क्षेत्र में अमेरिका की ‘नो एंट्री’
सरल शब्दों में कहें तो भारतीय किसानों के लिए राहत की खबर है। गेहूं-चावल उगाने वाले किसानों से लेकर दूध-पनीर जैसे डेयरी उत्पाद बनाने वालों को अमेरिकी आयात से किसी तरह का खतरा नहीं होगा। न तो अनाज और न ही दुग्ध उत्पादों के आयात को मंजूरी दी गई है। यहां तक कि केला और कई अन्य फलों के मामले में भी भारत ने दरवाजे बंद रखे हैं।
हालांकि, कुछ चुनिंदा क्षेत्रों में आयात बढ़ने की संभावना जरूर है। पशुचारा, अमेरिकी शराब, सोयाबीन तेल और कुछ अन्य फलों के आयात में तेजी आ सकती है, क्योंकि इनसे जुड़ी बाधाओं को सरकार धीरे-धीरे कम करने की तैयारी में है।
ये खाद्य स्रोत पूरी तरह सुरक्षित
अनाज और मोटे अनाज: चौलाई, रागी, गेहूं, हरका, बाजरा, सांवा, मक्का, चावल, जौ, ज्वार (सोरघम), कुट्टू बाजरा (मोती बाजरा), कंगनी (फॉक्सटेल बाजरा), जई, बिना पॉलिश वाले अनाज, मैदा (परिष्कृत आटा) और विभिन्न प्रकार के आटे (गेहूं, मक्का, चावल, बाजरा आदि)।
डेयरी उत्पाद: दूध (तरल, पाउडर, कैसिइन), पनीर (मोजेरेला, ब्लू-वेन्ड, कसा हुआ या पाउडर), क्रीम, मक्खन, तेल मक्खन और घी, दही, छाछ और मट्ठा आधारित उत्पाद।
सब्जियां और दालें: फ्रोजन सब्जियां, आलू, मटर, बीन्स, अन्य दालें, छिलके वाली या बिना छिलके वाली सब्जियां, मिश्रित फ्रोजन सब्जियां, अस्थायी रूप से संरक्षित सब्जियां, खीरा और अचार वाला खीरा, मशरूम (एगेरिकस किस्म), और मिश्रित संरक्षित सब्जियां।
कुल मिलाकर, यह समझौता जहां अंतरराष्ट्रीय व्यापार को गति देता है, वहीं भारत ने यह साफ कर दिया है कि किसानों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था के हित किसी भी हाल में दांव पर नहीं लगाए जाएंगे।













