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अमेरिका ने भारत को लौटाईं 650 से ज्यादा ऐतिहासिक धरोहरें, गणेश और बुद्ध प्रतिमाएं बनीं आकर्षण का केंद्र

भारत को अमेरिका से 657 प्राचीन कलाकृतियां वापस मिलीं, जिनमें गणेश और बुद्ध की दुर्लभ प्रतिमाएं शामिल हैं। जानें इन ऐतिहासिक धरोहरों की तस्करी, बरामदगी और वापसी की पूरी कहानी।

Posts by : Jhanvi Gupta | Updated on: Thu, 30 Apr 2026 12:35:52

अमेरिका ने भारत को लौटाईं 650 से ज्यादा ऐतिहासिक धरोहरें, गणेश और बुद्ध प्रतिमाएं बनीं आकर्षण का केंद्र

संयुक्त राज्य अमेरिका ने भारत को उसकी सांस्कृतिक विरासत से जुड़ी 657 प्राचीन कलाकृतियां वापस सौंपी हैं, जिनकी अनुमानित कीमत लगभग 1.4 करोड़ अमेरिकी डॉलर बताई जा रही है। इन वस्तुओं में कई दुर्लभ मूर्तियां और ऐतिहासिक धरोहरें शामिल हैं, जिनमें भगवान गणेश और बुद्ध की अनमोल प्रतिमाएं भी विशेष रूप से ध्यान आकर्षित कर रही हैं। अमेरिकी अधिकारियों ने यह भी स्पष्ट किया है कि अवैध रूप से देश से बाहर गई भारत की सांस्कृतिक संपदा को वापस लाने के लिए अभी लंबा कार्य बाकी है।

यह औपचारिक हस्तांतरण मंगलवार को न्यूयॉर्क के मैनहट्टन में आयोजित एक विशेष कार्यक्रम के दौरान किया गया, जहां जिला अटॉर्नी एल्विन ब्रैग ने इन सभी वस्तुओं की वापसी की घोषणा की। यह पूरी कार्रवाई कई वर्षों तक चली गहन जांच का परिणाम है, जिसमें अंतरराष्ट्रीय तस्करी नेटवर्क की भूमिका सामने आई। इस नेटवर्क में कुख्यात तस्कर सुभाष कपूर और दोषी पाए गए नैन्सी वीनर से जुड़े गिरोह भी शामिल रहे हैं। कार्यक्रम के दौरान भारतीय वाणिज्य दूतावास की उप-दूत राजलक्ष्मी कदम भी मौजूद रहीं।

मैनहट्टन जिला अटॉर्नी का बयान, तस्करी नेटवर्क को बताया व्यापक


मैनहट्टन के जिला अटॉर्नी एल्विन ब्रैग ने इस अवसर पर कहा कि भारत की सांस्कृतिक विरासत को निशाना बनाने वाला तस्करी नेटवर्क बेहद संगठित और विस्तृत है। उन्होंने कहा कि 600 से अधिक वस्तुओं की वापसी इस बात का प्रमाण है कि यह अवैध कारोबार कितना गहरा है। ब्रैग ने यह भी कहा कि भारत की चुराई गई धरोहर को वापस दिलाने के लिए अभी और व्यापक प्रयासों की आवश्यकता है। उन्होंने अपनी टीम के लगातार प्रयासों की भी सराहना की।

भारतीय महावाणिज्य दूत ने जताया आभार

न्यूयॉर्क में भारत के महावाणिज्य दूत बिनय प्रधान ने अमेरिकी एजेंसियों के सहयोग की प्रशंसा की। उन्होंने मैनहट्टन जिला अटॉर्नी कार्यालय, अमेरिकी गृह सुरक्षा विभाग और अन्य कानून प्रवर्तन एजेंसियों की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया। उनके अनुसार, इन एजेंसियों की सतर्कता और समन्वित प्रयासों के कारण ही भारत की ऐतिहासिक धरोहरों की बरामदगी संभव हो सकी और उन्हें वापस देश लाया जा सका।

‘अवलोकितेश्वर’ प्रतिमा की रोचक यात्रा

वापस की गई वस्तुओं में सबसे खास कांस्य प्रतिमा ‘अवलोकितेश्वर’ मानी जा रही है, जिसकी अनुमानित कीमत लगभग 20 लाख अमेरिकी डॉलर है। यह प्रतिमा शेरों से सजे सिंहासन पर कमलासन मुद्रा में विराजमान है और अपने ऐतिहासिक महत्व के लिए प्रसिद्ध है।

शिलालेखों के अनुसार, इस प्रतिमा का निर्माण द्रोणादित्य नामक शिल्पकार ने किया था, जो वर्तमान छत्तीसगढ़ के रायपुर क्षेत्र के पास स्थित सीपुर गांव का निवासी था। इतिहास के अनुसार, यह प्रतिमा 1939 में लक्ष्मण मंदिर क्षेत्र के पास मिले कांस्य खजाने का हिस्सा थी। बाद में 1952 तक इसे रायपुर के महंत घासीदास स्मारक संग्रहालय में सुरक्षित रखा गया था।

हालांकि, इसके बाद यह प्रतिमा संग्रहालय से चोरी हो गई और अवैध तस्करी के जरिए 1982 तक अमेरिका पहुंच गई। वर्षों तक यह न्यूयॉर्क के एक निजी संग्रह का हिस्सा बनी रही। वर्ष 2014 में यह वहीं संरक्षित थी, जब तक कि 2025 में मैनहट्टन जिला अटॉर्नी कार्यालय ने जांच के दौरान इसे ट्रेस कर जब्त नहीं कर लिया। अब लंबे प्रयासों के बाद यह अनमोल धरोहर आखिरकार भारत को वापस मिल गई है।

गणेश और बुद्ध की प्रतिमाओं का बारे में जानें


एक अन्य महत्वपूर्ण वस्तु है नृत्य मुद्रा में ‘गणेश’ की बलुआ पत्थर की प्रतिमा। इसे सुभाष कपूर के सहयोगी रंजीत कंवर ने वर्ष 2000 में मध्य प्रदेश के एक मंदिर से लूट लिया था। इसके बाद दोषी तस्कर वामन घिया ने इसे न्यूयॉर्क स्थित गैलरी मालिक डोरिस वीनर को बेच दिया था। यह प्रतिमा 2012 में नीलामी के दौरान एक निजी संग्रहकर्ता द्वारा खरीदी गई थी, जिसने इस वर्ष की शुरुआत में इसे मैनहट्टन जिला अटॉर्नी कार्यालय को स्वेच्छा से सौंप दिया था। इनमें शामिल एक अन्य कलाकृति लाल बलुआ पत्थर से बनी ‘बुद्ध’ की प्रतिमा है। इसमें बुद्ध अपना दाहिना हाथ अभय मुद्रा में उठाए खड़े हैं। इस प्रतिमा के घुटनों के नीचे पैर टूटे हुए हैं तथा सिर के पीछे का आभामंडल भी आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त है। करीब 75 लाख डॉलर मूल्य वाली इस प्रतिमा को तस्करी कर अमेरिका लाया गया था। बाद में ‘एंटीक्विटीज ट्रैफिकिंग यूनिट’ ने इसे जब्त कर लिया था।

तस्कर सुभाष कपूर के बारे में जानें


गौरतलब है कि मैनहट्टन जिला अटॉर्नी कार्यालय ने वर्ष 2012 में सुभाष कपूर के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया था। नवंबर 2019 में कपूर और उसके सात सह-आरोपियों पर चोरी की प्राचीन वस्तुओं की तस्करी की साजिश रचने का आरोप लगाया गया था। कपूर का भारत से प्रत्यर्पण अभी लंबित है। भारत में वर्ष 2022 में उसे तस्करी की गतिविधियों के लिए दोषी ठहराया जा चुका है। उसके पांच सह-आरोपियों को मैनहट्टन जिला अटॉर्नी कार्यालय पहले ही दोषी ठहरा चुका है।

क्या कहते हैं आंकड़े?

जानकारी के मुताबिक ‘एंटीक्विटीज ट्रैफिकिंग यूनिट’ अब तक 6,200 से अधिक सांस्कृतिक धरोहरों को बरामद कर चुकी है, जिनकी कुल अनुमानित कीमत 48.5 करोड़ अमेरिकी डॉलर से अधिक है। इनमें दुर्लभ पुस्तकें, कलाकृतियां और अन्य प्राचीन वस्तुएं शामिल हैं। इनमें से 5,900 से अधिक वस्तुएं अब तक दुनिया के 36 विभिन्न देशों को लौटाई जा चुकी हैं।

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