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राजस्थान: बीकानेर के सरकारी अस्पताल में प्रसूताओं की बिगड़ी तबीयत से हड़कंप, डिलीवरी के बाद 5 महिलाओं की किडनी फेल

बीकानेर के पीबीएम अस्पताल में डिलीवरी के बाद 5 प्रसूताओं की तबीयत गंभीर होने से हड़कंप मच गया। किडनी फेल होने के मामलों के बाद सरकार ने जांच के आदेश दिए हैं, जबकि स्वास्थ्य मंत्री ने पूरे घटनाक्रम की उच्चस्तरीय समीक्षा की है।

Posts by : Jhanvi Gupta | Updated on: Wed, 10 Jun 2026 8:59:28

राजस्थान: बीकानेर के सरकारी अस्पताल में प्रसूताओं की बिगड़ी तबीयत से हड़कंप, डिलीवरी के बाद 5 महिलाओं की किडनी फेल

राजस्थान के सरकारी अस्पतालों में प्रसूताओं की सुरक्षा और स्वास्थ्य व्यवस्थाओं को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। कोटा मेडिकल कॉलेज अस्पताल में सिजेरियन डिलीवरी के बाद महिलाओं की मौत के मामले की गूंज अभी थमी भी नहीं थी कि अब बीकानेर के पीबीएम अस्पताल से चिंताजनक खबर सामने आई है। यहां डिलीवरी के बाद पांच प्रसूताओं की तबीयत अचानक बिगड़ गई और जांच में उनकी किडनी प्रभावित होने की बात सामने आई। मामले के सामने आते ही स्वास्थ्य विभाग में हलचल मच गई और राज्य सरकार ने पूरे घटनाक्रम को गंभीरता से लेते हुए उच्चस्तरीय समीक्षा शुरू कर दी है।

मंगलवार को स्वास्थ्य भवन में चिकित्सा मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर की अध्यक्षता में एक अहम बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों और स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने भाग लिया। बैठक के दौरान मंत्री ने बीकानेर के पीबीएम अस्पताल में प्रसूताओं की बिगड़ती हालत से जुड़े सभी पहलुओं की विस्तृत जानकारी अधिकारियों से ली और अब तक की जांच की प्रगति पर चर्चा की।

कोटा और बीकानेर के मामलों को अलग-अलग बताया

ndtv राजस्थान की खबर के अनुसार. बैठक के बाद मीडिया से बातचीत करते हुए चिकित्सा मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर ने स्पष्ट किया कि बीकानेर की घटना को कोटा मेडिकल कॉलेज अस्पताल के मामले से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि दोनों घटनाओं की परिस्थितियां और कारण अलग-अलग हैं, इसलिए इनकी जांच भी स्वतंत्र रूप से की जा रही है।

मंत्री ने बताया कि बीकानेर में सामने आए सभी मामले एक ही समय के नहीं हैं। इसके अलावा प्रभावित महिलाओं में केवल सिजेरियन डिलीवरी वाले मरीज ही शामिल नहीं हैं, बल्कि सामान्य प्रसव कराने वाली महिलाएं भी इस समस्या से प्रभावित हुई हैं। ऐसे में किसी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले सभी चिकित्सकीय तथ्यों का गहन अध्ययन जरूरी है।

उन्होंने कहा कि पूरे मामले की विस्तृत रिपोर्ट मांगी गई है और जांच के आदेश पहले ही जारी किए जा चुके हैं। उम्मीद है कि जांच रिपोर्ट मिलने के बाद स्थिति अधिक स्पष्ट हो पाएगी और यह समझा जा सकेगा कि प्रसूताओं की तबीयत बिगड़ने के पीछे वास्तविक कारण क्या थे।

अस्पतालों की निगरानी व्यवस्था पर भी उठे सवाल

चिकित्सा मंत्री ने स्वीकार किया कि अस्पतालों में संक्रमण नियंत्रण और व्यवस्थागत निगरानी को लेकर अभी भी सुधार की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में जिस स्तर की सुदृढ़ व्यवस्था विकसित होनी चाहिए थी, वह पूरी तरह स्थापित नहीं हो सकी है।

सरकार अब अस्पतालों की निगरानी के लिए थर्ड पार्टी एजेंसियों की सेवाएं लेने पर विचार कर रही है। प्रस्ताव के अनुसार तीन से चार स्वतंत्र कंपनियों को अस्पतालों की नियमित मॉनिटरिंग की जिम्मेदारी सौंपी जा सकती है। ये एजेंसियां समय-समय पर निरीक्षण कर व्यवस्थाओं का मूल्यांकन करेंगी और अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपेंगी, ताकि कमियों को समय रहते दूर किया जा सके।

दो महिलाओं की सिजेरियन और तीन की सामान्य डिलीवरी हुई थी

जानकारी के अनुसार संभाग के सबसे बड़े पीबीएम अस्पताल में जिन पांच प्रसूताओं की हालत गंभीर हुई है, उनमें दो महिलाओं की सिजेरियन डिलीवरी हुई थी, जबकि तीन महिलाओं का सामान्य प्रसव कराया गया था। सभी मरीजों को गंभीर स्थिति में आईसीयू में भर्ती किया गया है और उनका इलाज विशेषज्ञ डॉक्टरों की निगरानी में जारी है।

बताया जा रहा है कि फलोदी निवासी 20 वर्षीय एक प्रसूता की हालत सबसे ज्यादा नाजुक बनी हुई है। चिकित्सकों ने उसे वेंटिलेटर सपोर्ट पर रखा है और लगातार निगरानी की जा रही है। अन्य मरीजों का भी डायलिसिस किया जा रहा है ताकि किडनी से जुड़ी जटिलताओं को नियंत्रित किया जा सके।

डिलीवरी के कई दिन बाद दिखे गंभीर लक्षण

अस्पताल सूत्रों के अनुसार प्रसूताओं में परेशानी डिलीवरी के तुरंत बाद नहीं बल्कि लगभग 10 से 15 दिन बाद सामने आई। शुरुआत में महिलाओं को पेशाब रुकने, प्लेटलेट्स कम होने, संक्रमण बढ़ने और शरीर में अन्य जटिल लक्षण महसूस हुए। बाद में जांच के दौरान किडनी से जुड़ी गंभीर समस्याओं का पता चला।

पीबीएम अस्पताल के अधीक्षक डॉ. बीसी घीया ने बताया कि गर्भावस्था और प्रसव से जुड़ी कुछ जटिलताएं कई बार मरीजों में देखने को मिलती हैं, लेकिन हाल के दिनों में ऐसे मामलों की संख्या बढ़ने के कारण डॉक्टरों की टीम ने विशेष रूप से इन मरीजों की निगरानी शुरू की। उन्होंने कहा कि सभी मरीजों को आवश्यक चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है और उनका उपचार पूरी गंभीरता से किया जा रहा है।

जांच के लिए विशेषज्ञ समिति गठित

मामले के सामने आने के बाद अस्पताल प्रशासन ने विशेषज्ञ चिकित्सकों की एक जांच समिति गठित कर दी है। यह समिति संक्रमण, अत्यधिक रक्तस्राव, प्रसव संबंधी जटिलताओं और अन्य संभावित चिकित्सकीय कारणों की विस्तृत जांच कर रही है।

अस्पताल प्रशासन का कहना है कि समिति की रिपोर्ट मिलने के बाद पूरे मामले की वास्तविक तस्वीर सामने आएगी और यदि किसी प्रकार की लापरवाही या व्यवस्थागत खामी सामने आती है तो उसके आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। वहीं दूसरी ओर प्रभावित महिलाओं के परिजनों ने आरोप लगाया है कि उन्हें समय पर पूरी जानकारी नहीं दी गई और अस्पताल प्रशासन की ओर से पर्याप्त संवाद नहीं किया गया। फिलहाल पूरे मामले की जांच जारी है और स्वास्थ्य विभाग रिपोर्ट का इंतजार कर रहा है।

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