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मध्य प्रदेश में खत्म हुई 'दो बच्चे' की शर्त, सरकारी नौकरी के रास्ते से हटी बड़ी बाधा; मोहन सरकार का अहम फैसला

मध्य प्रदेश सरकार ने 23 साल पुराना टू चाइल्ड नियम खत्म करने का फैसला लिया है। अब दो से अधिक बच्चों वाले उम्मीदवार भी सरकारी नौकरी और विभागीय नियुक्तियों के लिए पात्र होंगे। जानिए मोहन सरकार के इस बड़े फैसले की पूरी जानकारी।

Posts by : Jhanvi Gupta | Updated on: Wed, 10 Jun 2026 9:04:13

मध्य प्रदेश में खत्म हुई 'दो बच्चे' की शर्त, सरकारी नौकरी के रास्ते से हटी बड़ी बाधा; मोहन सरकार का अहम फैसला

मध्य प्रदेश सरकार ने सरकारी नौकरियों और सेवा नियमों से जुड़ा एक महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए करीब 23 साल पुराने 'टू चाइल्ड पॉलिसी' प्रावधान को समाप्त करने का फैसला किया है। मुख्यमंत्री मोहन यादव के निर्देश के बाद अब राज्य में दो से अधिक बच्चों वाले उम्मीदवारों को सरकारी नौकरी या विभागीय नियुक्तियों से वंचित नहीं किया जाएगा। इस फैसले को लाखों युवाओं, कर्मचारियों और उनके परिवारों के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है।

सरकार के इस निर्णय के बाद उन अभ्यर्थियों के लिए भी अवसर खुल जाएंगे, जो केवल परिवार में दो से ज्यादा बच्चे होने की वजह से सरकारी सेवाओं के लिए अयोग्य घोषित किए जाते थे। मुख्यमंत्री ने सामान्य प्रशासन विभाग को तत्काल आवश्यक संशोधन करने और संबंधित नियमों में बदलाव की प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश दिए हैं।

भर्ती और पदोन्नति दोनों में हटेगी पाबंदी

राज्य सरकार के अनुसार, मध्य प्रदेश सिविल सेवा नियमों में शामिल उस मसौदा प्रावधान को हटाया जा रहा है, जिसके तहत दो से अधिक जीवित बच्चों वाले व्यक्तियों को प्रत्यक्ष भर्ती और विभागीय पदोन्नति के लिए अयोग्य माना जाता था। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि इस प्रावधान से संबंधित मसौदे को तत्काल प्रभाव से सरकारी पोर्टल से भी हटा दिया गया है।

अब नए संशोधन लागू होने के बाद सरकारी विभागों में नियुक्ति प्रक्रिया के दौरान उम्मीदवारों के बच्चों की संख्या पात्रता का आधार नहीं बनेगी। इससे उन लोगों को भी राहत मिलेगी जो लंबे समय से इस नियम को समाप्त करने की मांग कर रहे थे।

जनसंख्या नियंत्रण के उद्देश्य से लागू किया गया था नियम

दरअसल, यह व्यवस्था वर्ष 2001 में लागू की गई थी। उस समय राज्य सरकार ने जनसंख्या नियंत्रण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से यह नियम बनाया था। इसके तहत 26 जनवरी 2001 या उसके बाद दो से अधिक जीवित बच्चों वाले व्यक्ति को सरकारी नौकरी के लिए अयोग्य माना जाता था।

यह शर्त केवल नई भर्तियों तक सीमित नहीं थी, बल्कि विभागीय नियुक्तियों और कुछ मामलों में पदोन्नति प्रक्रिया पर भी लागू होती थी। ऐसे में कई कर्मचारियों और अभ्यर्थियों को इस नियम के कारण करियर संबंधी चुनौतियों का सामना करना पड़ता था।

कर्मचारियों पर भी लागू होते थे सख्त प्रावधान

इस नीति का असर केवल नौकरी की तैयारी कर रहे युवाओं तक ही सीमित नहीं था। मध्य प्रदेश सिविल सेवा (आचरण) नियम, 1965 के अंतर्गत भी दो से अधिक बच्चों को अनुशासन संबंधी विषय माना गया था।

यदि किसी सरकारी कर्मचारी के निर्धारित कट-ऑफ के बाद तीसरा बच्चा होता था, तो उसके खिलाफ विभागीय कार्रवाई तक की संभावना रहती थी। यही वजह थी कि यह नियम वर्षों से बहस और चर्चा का विषय बना हुआ था। कर्मचारी संगठनों का कहना था कि बदलते सामाजिक और पारिवारिक परिवेश में इस तरह के प्रावधानों की समीक्षा आवश्यक है।

लंबे समय से उठ रही थी नियम हटाने की मांग

सरकारी कर्मचारी संगठनों और विभिन्न सामाजिक समूहों द्वारा लंबे समय से इस नियम को समाप्त करने की मांग की जा रही थी। उनका तर्क था कि वर्तमान परिस्थितियों में यह व्यवस्था अप्रासंगिक हो चुकी है और इससे कई परिवारों को अनावश्यक परेशानियों का सामना करना पड़ता है।

कई मामलों में योग्य उम्मीदवार केवल बच्चों की संख्या के आधार पर नौकरी के अवसरों से वंचित हो जाते थे। कर्मचारी संगठनों का यह भी कहना था कि सरकारी सेवाओं में चयन का आधार योग्यता और क्षमता होनी चाहिए, न कि पारिवारिक स्थिति।

नए मसौदे पर आम लोगों से भी मांगे जाएंगे सुझाव

मुख्यमंत्री मोहन यादव के निर्देश के बाद अब सरकार संशोधित नियमों का नया मसौदा तैयार करेगी। अधिकारियों के मुताबिक, नियमानुसार इस मसौदे को दोबारा प्रकाशित किया जाएगा और उस पर आम नागरिकों, कर्मचारियों तथा संबंधित पक्षों से सुझाव भी आमंत्रित किए जाएंगे।

सरकार का कहना है कि अंतिम अधिसूचना जारी होने तक दो बच्चों की अनिवार्यता को प्रभावी नहीं माना जाएगा। यानी फिलहाल सरकारी नौकरी और विभागीय नियुक्तियों में इस शर्त को लागू नहीं किया जाएगा।

राज्य सरकार का मानना है कि इस फैसले से भर्ती प्रक्रिया अधिक समावेशी बनेगी और उन परिवारों को राहत मिलेगी जो वर्षों से इस नियम के कारण प्रभावित हो रहे थे। आने वाले समय में संशोधित नियमों के लागू होने के बाद सरकारी सेवाओं से जुड़े कई पुराने प्रावधानों में भी बदलाव देखने को मिल सकते हैं।

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